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  • Jan 16 2019 9:26AM

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री की करारी हार, संकट में सरकार

ब्रिटेन की प्रधानमंत्री की करारी हार, संकट में सरकार
ब्रिटिश संसद के बाहर ब्रेग्जिट समर्थकों और विरोधियों ने किया प्रदर्शन.

लंदन : ब्रिटेन की प्रधानमंत्री टेरेसा मे का यूरोपीय संघ (इयू) से अलग होने संबंधी बेक्जिट समझौता मंगलवार को संसद में पारित नहीं हो सका. इसके साथ ही देश के इयू से बाहर जाने का मार्ग और जटिल हो गया. मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास पत्र लाने की घोषणा हो गयी है. मे के समझौते को ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ में 432 के मुकाबले 202 मतों से हार का सामना करना पड़ा. यह आधुनिक इतिहास में किसी भी ब्रितानी प्रधानमंत्री की सबसे करारी हार है.

इस हार के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी लेबर पार्टी के नेता जेरेमी कोर्बिन ने घोषणा की कि उनकी पार्टी मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लेकर आयेगी. ब्रिटेन 1973 में 28 सदस्यीय यूरोपीय संघ का सदस्य बना था. उसे 29 मार्च को इयू से अलग होना है. इयू से अलग होने की तारीख आने में केवल दो महीने बचे हैं, लेकिन ब्रिटेन अभी तक यह निर्णय नहीं ले पाया है कि उसे क्या करना है.

बेक्जिट के समर्थक और ब्रिटेन के इयू में बने रहने के समर्थक दोनों विभिन्न कारणों से इस समझौते का विरोध कर रहे हैं. कई लोगों को आशंका है कि बेक्जिट के कारण ब्रिटेन के यूरोपीय संघ के साथ व्यापार संबंध बिगड़ सकते हैं. मे की कंजर्वेटिव पार्टी के 100 से अधिक सांसदों ने समझौते के विरोध में मतदान किया. ब्रिटेन के हालिया इतिहास में यह किसी सरकार की सबसे करारी संसदीय हार है.

अविश्वास प्रस्ताव लायेगा विपक्ष

इस हार के साथ ही ब्रेक्जिट के बाद इयू के साथ निकट संबंध बनाने की टेरेसा मे की दो वर्षीय रणनीति का भी कोई औचित्य नहीं रहा. मे ने ‘हाउस ऑफ कॉमंस’ में हार के बाद कहा कि सांसदों ने यह बता दिया है कि वे खिलाफ हैं, लेकिन यह नहीं बताया है कि वे किसका समर्थन करते हैं. संसद में परिणाम के बाद कोर्बिन ने कहा कि उनकी सरकार बुधवार को मे की सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश करेगी.

ब्रिटिश पीएम के पास हैं कुछ विकल्प

ब्रिटेन की संसदीय प्रक्रिया के अनुसार, जब सांसद कोई विधेयक खारिज कर देते हैं, तो प्रधानमंत्री के पास ‘दूसरी योजना’ (प्लान बी) के साथ संसद में आने के लिए तीन कामकाजी दिन होते हैं. ऐसी संभावना है कि मे बुधवार को ब्रसेल्स जाकर इयू से और रियायतें लेने की कोशिश करेंगी और नये प्रस्ताव के साथ ब्रिटेन की संसद में आयेंगी.

सांसद इस पर भी मतदान करेंगे. यदि यह प्रस्ताव भी असफल रहता है, तो सरकार के पास एक अन्य विकल्प के साथ लौटने के लिए तीन सप्ताह का समय होगा. यदि यह समझौता भी संसद में पारित नहीं होता है, तो ब्रिटेन बिना किसी समझौते के ही इयू से 29 मार्च को बाहर हो जायेगा.

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