घोटालों की राजनीति के पांच वर्ष

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घोटालों की राजनीति के पांच वर्ष

-दर्शक- गुजरे पांच वर्षों (1991 से 1996 लोकसभा) की राजनीति, कई अर्थों में भारत का भविष्य तय करनेवाली है. पहली बार नेहरू परिवार के बाहर का कोई व्यक्ति पांच वर्षों तक प्रधानमंत्री रहा. नरसिंह राव इसलिए भी स्मरण रहेंगे कि वह दक्षिण से आनेवाले पहले प्रधानमंत्री थे. ‘मौनी बाबा’ कह कर वह पुकारे जा चुके […]

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-दर्शक-

गुजरे पांच वर्षों (1991 से 1996 लोकसभा) की राजनीति, कई अर्थों में भारत का भविष्य तय करनेवाली है. पहली बार नेहरू परिवार के बाहर का कोई व्यक्ति पांच वर्षों तक प्रधानमंत्री रहा. नरसिंह राव इसलिए भी स्मरण रहेंगे कि वह दक्षिण से आनेवाले पहले प्रधानमंत्री थे. ‘मौनी बाबा’ कह कर वह पुकारे जा चुके हैं. उनके ही कार्यकाल में पहली बार प्रधानमंत्री पर किसी व्यक्ति (शेयर दलाल हर्षद मेहता) ने एक करोड़ घूस देने का आरोप लगाया. यह घटना इसलिए याद की जायेगी कि आरोप लगानेवाले के खिलाफ प्रधानमंत्री पद से कोई कार्रवाई नहीं हुई. एक अर्थ भरी चुप्पी नरसिंह राव ने साध ली. इसके बाद होनेवाले भ्रष्टाचारों में यह अर्थपूर्ण चुप्पी बढ़ती गयी.
इन घोटालों ने न सिर्फ राजनीति का चेहरा और चरित्र बदला, बल्कि भविष्य की अस्थिर राजनीति के बीज बोये. नरसिंह राव के समय हुए यूरिया घोटाले के भंडाफोड़ ने, नौ दिन पुरानी देवगौड़ा सरकार के लिए संकट पैदा कर दिया है. इस घोटाले ने पूर्व प्रधानमंत्री नरसिंह राव और उनके पुत्र प्रभाकर राव को कठघरे में खड़ा कर दिया है. पिछले साल नवंबर में राव सरकार ने ‘नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड’ को अनुमति दी कि वह तुर्की की एक मामूली अज्ञात कंपनी ‘करसन लिमिटेड’ से यूरिया खरीदने का अनुबंध करे. उसे 3.80 करोड़ का यूरिया भेजने का आर्डर मिला. कंपनी को पूरा पैसा बतौर अग्रिम (एडवांस) दिया गया. पर आज तक एक खेप भी यूरिया नहीं पहुंची हैं. अब तो उस तुर्की कंपनी की विश्वसनीयता पर ही सवाल उठने लगे हैं.
सीबीआइ ने इस मामले की तहकीकात आरंभ की. पिछले सप्ताह ‘नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड’ के तीन अधिकारियों को सीबीआइ ने पकड़ा. ये अधिकारी हैं. प्रबंध निदेशक सीके रामकृष्णन, पूर्व प्रबंध निदेशक एसडी कंवर, प्रबंधक (प्रशासन व वित्त) दीपक लाल, आपराधिक मामलों में न्यायिक या पुलिस हिरासत में लोग रखे जाते हैं, पर इस मामले का रोचक पहलू है कि इन्हें सीबीआइ कांप्लेक्स में ही रखा गया है.

इस पूरी सौदेबाजी या दलाली का एक अंग किकबैक के रूप में 37 लाख रुपये हैदराबाद स्थित साईं कांप्लेक्स के मालिक एमएस राव को मिला. इस पैसे से उन्होंने एक वातानुकूलित कंटेसा गाड़ी खरीदी. गुंटूर स्थित अपने गांव में जमीन खरीदी. श्री राव ने सीबीआइ को बताया कि दलाली में मिली राशि दुबई स्थित स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक में जमा की गयी. बाद में हवाला रकम के रूप में संजीव राव और प्रभाकर राव को दी गयी. प्रभाकर राव, पूर्व प्रधानमंत्री के पुत्र हैं.

एस राव के अनुसार ‘करसन लिमिटेड’ से सीधे किकबैंक (दलाली) के रूप में दो लाख डॉलर उन्हें मिला. यह भुगतान सफल दलाली के एवज में किया गया. यह राशि हैदराबाद स्थित ग्रिंडलेज बैंक की शाखा में उनके खाते में जमा की गयी. इस राशि का एक बचा हिस्सा श्री राव ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, हैदराबाद स्थित शाखा में अपनी पत्नी के खाते में ट्रांसफर कर दिया. इस लेन-देन में दुबई, लंदन और अमेरिका स्थित कुछ दलाल भी शामिल हैं.
यह पूरा घोटाला 133 करोड़ की यूरिया खरीद का एक माध्यम है. सारे डीलों की जांच हो, तो और भी विस्फोटक तथ्य प्रकाश में आयेंगे. चर्चा है कि भाजपा को इस घोटाले की पूरी जानकारी है. अटल बिहारी वाजपेयी ने प्रधानमंत्री की हैसियत से इस घोटाले पर कड़ी नजर रखी थी. प्रधानमंत्री बनने के दूसरे दिन उन्होंने रामाकृष्णन को नौकरी से बरखास्त कर दिया. दिल्ली में यह धारणा है कि नेशनल फर्टिलाइजर लिमिटेड के अफसर तो मामूली दलाल-बिचौलिये हैं. असली घाटालेबाज कांग्रेस के बजे ताकतवर लोग हैं.
इस घोटाले के असमय भंडाफोड़ ने दिल्ली में राजनीतिक संतुलन बिगाड़ दिया है.

वाम मोरचा के दल खास तौर से परेशान हैं. भाजपा राव सरकार के भ्रष्टाचारों की पुलिंदा के साथ तैयार है. माकपा हैरान है कि वह कौन सा रुख अख्तियार करे? कांग्रेस, इस भंडाफोड़ से आहत है.इन घोटालों के भंडाफोड़ के बाद आम राय है कि नरसिंह राव की सरकार ‘घोटालों की राजनीति’ की जड़ें मजबूत करने के लिए ही याद की जायेगी. उदारीकरण या अन्य वजहों से यह सरकार उतनी याद नहीं रहेगी, जितना भ्रष्ट कारनामों के कारण. इस सरकार के आने के पहले बोफोर्स जैसे घाटाले ही हो पाते थे, जिसमें 66 करोड़ दलाली लेने की बात होती है.

पर नरसिंह राव की स रकार बनने के बाद घोटाले हजारों-हजार करोड़ में होने लगे. विदेशी डीलों में दलाल और बिचौलिये छा गये. शेयर घोटाला, बैंक घोटाला, चीनी घोटाला, टेलीकॉम घोटाला, हवाला और अब यूरिया घोटाला.पता नहीं और कितने घोटाले नरसिंह राव सरकार की फाइलों में दबे-ढके हैं. आज चीन परमाणु परीक्षण कर रहा है. दुनिया की सबसे बड़ी ताकत के रूप में पहचान बना रहा है. पाकिस्तान धौंस दिखा रहा है.

अमेरिका, सहायता कम न करने की दया दिखा रहा है, दक्षिण एशिया के छोटे-छोटे देश दुनिया की बड़ी ताकत बन कर उभर रहे हैं. तब 92 करोड़ की आबादीवाले देश की क्या स्थिति हैं? नेताओं का ईमान खतरे में है. उनकी विश्यसनीयता खत्म हो गयी हैं. घोटालेबाज और दलाल छा गये हैं? क्या इसी भारत के लिए लोगों ने कुरबानी दी थी?

सीबीआइ ने राव के पुत्र से पूछताछ की
नयी दिल्ली, 9 जून : केंद्रीयजांच ब्यूरो ने 133 करोड़ रुपये के यूरिया घोटाले के सिलसिले में पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव के पुत्र पीवी प्रभाकर सर पर यूरिया सौदेमें करीब 40लाख डॉलर का रिश्वत लेने का आरोप लगाया है. सीबीआइ अधिकारियों ने हैदराबाद में प्रभाकर राव से पूछताछ की. इस पूछताछ के बारे में सीबीआइ अधिकारियों ने कोई भी विवरण देने से इनकार किया. हैदराबाद में सीबीआइ के आरक्षी महानिरीक्षक आरएन सिंह तथा नयी दिल्लीमें ब्यूरो के संयुक्त निदेशक गोपाल आचारी ने भी इस बारे कुछ बताने से इनकार किया.
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