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  • Jan 12 2019 10:53AM

क्या ‘बहनजी’ ने भुला दिया ‘स्टेट गेस्ट हाउस कांड’?

क्या ‘बहनजी’ ने भुला दिया ‘स्टेट गेस्ट हाउस कांड’?

 
आज देश में एक बड़ी राजनीतिक घटना हो रही है, जी हां हम बात कर रहे हैं सपा-बसपा गठबंधन की. लखनऊ के पांच सितारा होटल ताज में अखिलेश यादव और मायावती साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रहे हैं. सपा-बसपा के रिश्ते कितने जटिल थे यह बात जगजाहिर है. 1993 में हुए ‘स्टेट गेस्टहाउस कांड’ के बाद मायावती ने सपा से किनारा कर लिया था. लेकिन पिछले कुछ समय से अखिलेश यादव ने मायावती को काफी मनाया और मायावती उस कांड को भूल गयीं, अब ऐसा कहा जा सकता है. ज्ञात हो कि फूलपुर और गोरखपुर के उपचुनाव के वक्त सपा-बसपा पहली बार साथ आये और इनकी ताकत कितनी है यह बताने की इसलिए जरूरत नहीं क्योंकि दोनों सीटों पर भाजपा चुनाव हार गयी. सपा-बसपा का गंठबंधन वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिए सिरदर्द साबित होगा यह बात भाजपा के शीर्ष नेताओं को भी पता है.  


बुआ-भतीजा का गंठबंधन बना भाजपा का सिरदर्द
 

मायावती का अपना एक वोट बैंक है, जो आसानी से उनके पास से खिसकता नहीं है, यही कारण है कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बावजूद मायावती की लोकप्रियता बनी रही है और वह एक जननेता हैं. वहीं अखिलेश यादव के पास यादवों और मुसलमानों का वोट तो है ही उन्हें सवर्ण भी पसंद करते हैं. इसका कारण यह है कि वे युवा नेता हैं और उनकी छवि पाक-साफ है. उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी की छवि को सुरक्षित रखने के लिए जिस तरह के कठोर निर्णय लिये और मुलायम सिंह यादव और चाचा शिवपाल यादव के विरुद्ध गये उससे भी लोग उनसे प्रभावित हैं. ऐसे में अखिलेश और मायावती का साथ भाजपा के लिए मुसीबत बन सकता है. गौर करने वाली बात यह है कि भाजपा भले पिछले लोकसभा चुनाव में 73 सीटों पर चुनाव जीती, लेकिन कई सीटों पर बसपा दूसरे स्थान पर रही थी.

जानें क्या है गेस्ट हाउस कांड
 

वर्ष 1993 में सपा-बसपा के गठबंधन के बाद प्रदेश में मुलायम सिंह यादव की सरकार बनी थी. उस वक्त बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद  राजनीति में ध्रुवीकरण चरम पर था, ऐसे में सपा-बसपा का गंठबंधन हुआ और मायावती के समर्थन से सरकार बनी थी. चूंकि किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं था, इसलिए जब कुछ मनमुटाव के बाद मायावती ने अपना समर्थन सरकार से वापस ले लिया, तो मुलायम सिंह यादव की सरकार गिर गयी. दो जून 1995 को मायावती ने अपना समर्थन वापस लिया था. जिसके बाद सपा के नाराज कार्यकर्ताओं ने मीराबाई मार्ग स्थित स्टेट गेस्ट हाउस  पर हमला कर दिया था जिसमें मायावती ठहरी हुईं थीं. उन्मादी भीड़ समर्थन वापस लेने की घटना से नाराज थी और वे मायावती को सबक सिखाना चाहते थे. भीड़ गेस्ट हाउस में घुस आयी और मायावती पर हमला कर दिया. जानकार बताते हैं कि उस वक्त भीड़ ने ना सिर्फ मायावती के साथ मारपीट की बल्कि उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया था. यहां तक कि उनके कपड़े भी फाड़ दिये गये थे.  मायावती के जीवन पर लिखी गयी किताब ‘ बहनजी’ में इस घटना का विस्तृत विवरण है.  बताया जाता है कि मायावती ने भीड़ से खुद को बचाने के लिए कमरे में बंद हो गयीं थीं, लेकिन दरवाजा तोड़ दिया गया था और उनके साथ बदसूलकी की गयी थी. उस वक्त भाजपा नेता लालजी टंडन किसी तरह उन्हें वहां से बचाकर ले गये थे जिसके बाद मायावती ने उन्हें राखी बांधना शुरू कर दिया था. कहा तो यह भी जाता है कि इस घटना के बाद मायावती ने साड़ी पहनना छोड़ दिया और सलवार कुर्ता पहनने लगीं. इस घटना के लिए मायावती ने मुलायम सिंह को जिम्मेदार ठहराया था. उस वक्त काफी निचले दर्जे की टिप्पणी भी मायावती पर की गयी थी. बाद में कई बार यह कोशिश की गयी कि सपा-बसपा साथ आयें, लेकिन यह संभव हो ना सका, क्योंकि मायावती ने कहा कि वह सपा के साथ एक ही शर्त पर जा सकती हैं कि मुलायम सिंह यादव उनसे सार्वजनिक तौर पर माफी मांगें. लेकिन इस बात को मुलायम सिंह यादव ने कभी ना तो स्वीकारा और ना माफी मांगी.


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