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Industry

  • Dec 7 2018 12:45PM

कच्चे तेल का उत्पादन आैर निर्यात घटाने के फैसले से अमेरिका, रूस आैर सऊदी अरब को हो सकता है नुकसान!

कच्चे तेल का उत्पादन आैर निर्यात घटाने के फैसले से अमेरिका, रूस आैर सऊदी अरब को हो सकता है नुकसान!

वियना/नयी दिल्ली : अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल के गिरते दामों पर नियंत्रण करने की खातिर इसके उत्पादन आैर निर्यात में कटौती किये जाने को लेकर वियना में गुरुवार से पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का संगठन (आेपेक) के सदस्य देशों की बैठक की जा रही है. इस बैठक से इतर इस संगठन के सदस्य देशों में प्रमुख सऊदी अरब के तेल मंत्री ने यह आशंका भी जाहिर की है कि संभवतः आेपेक के सदस्य देश कच्चे तेल के उत्पादन आैर निर्यात में कटौती को लेकर राजी नहीं होंगे. सही मायने में देखा जाये, तो यदि इस बैठक में आेपेक के सदस्य देश इस मसले पर राजी हो भी जाते हैं, तो उत्पादन आैर निर्यात घटाने के फैसले से सबसे अधिक अमेरिका, रूस आैर सऊदी अरब को ही नुकसान होने के आसार दिखायी दे रहे हैं. इसका कारण यह है कि फिलहाल, दुनिया भर के पेट्रोलियम बाजारों पर इन्हीं तीन देशों का पूरे का पूरा नियंत्रण है. 

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अंतरराष्ट्रीय बाजार से खत्म हो गयी आेपेक की बादशाहत

भारत समेत पूरी दुनिया के मीडिया में पहले ही इस बात की चर्चा पूरे जोर-शोर के साथ हो चुकी है कि अमेरिका, रूस आैर सऊदी अरब के आगे पेट्रोलियम पदार्थों के उत्पादन के क्षेत्र या फिर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल उत्पादक देशों के संगठन आेपेक की बादशाहत पीछे छूटती जा रही है. इस आेपेक देशों की जगह फैसले इन देशों ने ही लेना शुरू कर दिया है, जिससे पूरी दुनिया के पेट्रोलियम बाजारों पर नियंत्रण किया जा रहा है. कहा तो यह भी जाता है कि इन तीन देशों के राष्ट्राध्यक्षों के महज एक बयान या फिर ट्वीट से ही कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट या उछाल का माहौल बन जाता है. 


दुनिया के तीन शक्तिशाली लोगों के हाथ से हैंडल हो रहा तेल बाजार

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, पेट्रोलियम बाजारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और सऊदी अरब के नायब शहज़ादे मोहम्मद बिन सलमान एेसे शख्स हैं, जिनके एक बयान से अंतररराष्ट्रीय तेल बाजार का माहौल ही बदल जाता है. माना यह भी जा रहा है कि आगामी वर्ष 2019 से दुनिया भर के तेल के बाजारों में इन्हीं तीन शख्सों का दबदबा कायम हो जायेगा. मीडिया की रिपोर्टों में बताया यह भी जा इन तीन लोगों के आपसी समीकरण और आर्थिक नफा-नुकसान अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल के दामों में उतार-चढ़ाव के लगातार कारण भी बन रहे हैं.


गौरतलब है कि पेट्रोलियम निर्यात करने वाले देशों का संगठन (आेपेक) में दुनिया भर के करीब 14 देश शामिल हैं. इसमें भारत को छोड़कर अल्जीरिया, अंगोला, ईक्वाडोर, इरान, ईराक, कुवैत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, नाइजीरिया, लीबिया, वेनेजुएला,गैबॉन आैर गिनी शामिल हैं. भारत दुनिया भर में तेल आयातक देशों में सबसे बड़ा तीसरा देश है. आेपेक का वर्ष 1960 से ही वियना में मुख्यालय है, जहां समय-समय पर बैठक हुआ करती है. 

मुखौटा कंपनी बनाकर अमेरिका ने सऊदी अरब के दबदबे में लगाया सेंध

अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में बीते एक दशक के दौरान काफी बदलाव आये हैं. तेल के बाजार पर सऊदी अरब का लंबे समय से कायम वर्चस्व में सेंध लगाते हुए अमेरिका ने भी मुखौटा कंपनियों (शेल या छद्म कंपनी) के जरिये तेल के उत्पादन में काफी इजाफा किया आैर उत्पादित तेलों को दुनिया भर में खपाने के लिए राजनीतिक आैर प्रशासनिक दबाव बनाना भी शुरू किया. इसी तरह, तेल के उत्पादन में रूस भी खाड़ी देशों को पीछे छोड़ते हुए इस समय आगे चल रहा है. कुल मिलाकर देखा जाये, तो इस समय पेट्रोलियम पदार्थों के अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अमेरिका, रूस आैर सऊदी अरब का ही दबदबा कायम हैु. एेसे में अगर देखा जाये, तो यदि वियना में चल रही आेपेक देशों की बैठक में उत्पादन आैर निर्यात में कटौती किये जाने का फैसला किया जाता है, तो इससे सबसे अधिक नुकसान अमेरिका, रूस आैर सऊदी अरब को ही होने की आशंका अधिक है. 


पीएम मोदी समेत दुनिया भर के नेताआें की अपील पर गौर करेगा आेपेक

हालांकि, आेपेक देशों की बैठक के बाद सऊदी अरब के तेल मंत्री खलील-अल-फलीह ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत के दौरान भारत आैर खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल करते हुए कहा है कि तेल निर्यातक देशों का संगठन ओपेक गिरती कीमतों को थामने के लिए निर्यात में कटौती पर फैसले से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित दुनियाभर के नेताओं के बयान पर गंभीरता से विचार करेगा. इसका सीधा सा मतलब यह है कि भारत तेल का उपयोग या आयात करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश है. भारत अपनी ऊर्जा संबंधी 80 प्रतिशत जरूरतों को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है. अंतरराष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर यहां के उपभोक्ताआें की जेबों पर पड़ता है. इस लिहाज से यहां की सरकारें अपने उपभोक्ताआें के हितों को देखते हुए तेल की कीमतों को निर्धारित करने का फैसला करती है. मोदी की अगुवाई में विश्व नेताओं ने ओपेक से कच्चे तेल की उचित एवं जवाबदेह कीमत तय करने की अपील की है.


विचारों को गंभीरता से लेते हैं पीएम मोदीः फलीह

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के समूह (ओपेक) की बैठक में संवाददाताओं से बातचीत में फलीह ने कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विचारों को गंभीरता से लेते हैं, जो (अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरह) इस मुद्दे पर मुखर रहे हैं. हमने जी-20 सम्मेलन के दौरान ब्यूनस आयर्स में उनसे मुलाकात की थी. निजी तौर पर उन्होंने अपने मुद्दों को बहुत मजबूती के साथ रखा कि वह भारतीय उपभोक्ताओं का ख्याल रखते हैं और उसे लेकर बहुत गंभीर हैं. मैंने भारत में भी उन्हें तीन ऊर्जा कार्यक्रमों में देखा है, जहां वह काफी मुखर थे. 

शुक्रवार को फिर होगा आेपेक देशों का मंथन, समझौता होना अभी बाकी

तेल निर्यातक देशों का संगठन ओपेक कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के लिए शुक्रवार को रूस समेत 10 साझेदार देशों के साथ बैठक करेगा. संगठन की आेर से गुरुवार को आयोजित बैठक में तेल की कीमतों में गिरावट को देखते हुए कटौती के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी. हालांकि, यह समझौता नहीं हो सका था. सऊदी अरब के पेट्रोलियम मंत्री खालिद-अल-फलीह ने वियना में ओपेक की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि नहीं, मैं तेल उत्पादन में कटौती को लेकर समझौते पर आश्वस्त नहीं हूं. 

उत्पादन आैर निर्यात कटौती के पक्ष में नहीं है रूस

वहीं, रूस के ऊर्जा मंत्री एलेक्जेंडर नोवाक ने सेंट पीटर्सबर्ग में गुरुवार को कहा कि हमारी जलवायु परिस्थितियों के चलते अन्य देशों की तुलना में हमारे लिए कटौती करना ज्यादा मुश्किल है. इस बीच, सऊदी अरब को अमेरिका की ओर से मानसिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को एक ट्वीट कर ओपेक देशों से कच्चे तेल की कीमतें नहीं बढ़ाने की मांग की थी. अल-फलीह ने जोर देकर कहा कि हमें कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती के लिए किसी की इजाजत की जरुरत नहीं है. वहीं, सऊदी अरब के प्रतिद्वंद्वी और ओपेक के तीसरे सबसे बड़ा उत्पादक देश ईरान ने उत्पादन में भारी कटौती का पक्ष लिया है. 

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