राहुल गांधी को पीएम बनाने के लिए शर्मिला ने थामा कांग्रेस का दामन! बहन को नहीं मना पाये जगन मोहन रेड्डी

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 04 Jan 2024 2:00 PM

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New Delhi: YSR Telangana Party founder YS Sharmila being greeted by Congress President Mallikarjun Kharge and party leader Rahul Gandhi after joining the Congress, in New Delhi, Thursday, Jan. 4, 2024. (PTI Photo/Arun Sharma)(PTI01_04_2024_000036B)

शर्मिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी की छोटी बहन हैं. कांग्रेस का दामन थामने के बाद उन्होंने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना मेरे पिता का सपना था और मैं इसके लिए काम करूंगी.

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कई दिनों से कयास लगाए जा रहे थे कि आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की बेटी और युवजन श्रमिक रायथू तेलंगाना पार्टी (वाईएसआरटीपी) की संस्थापक वाई. एस. शर्मिला कांग्रेस का दामन थामेंगी. इस कयास पर विराम लग चुका है. गुरुवार को शर्मिला ने कांग्रेस का दामन थाम लिया. शर्मिला ने अपनी वाईएसआर तेलंगाना कांग्रेस पार्टी के कांग्रेस में विलय की भी घोषणा की और कहा कि उन्हें जो भी जिम्मेदारी दी जाएगी वह उसे पूरी ईमानदारी से निभाएंगी. जानकारी के अनुसार शर्मिला ने अपने चाचा और वाईएसआरसीपी के पूर्व सांसद वाईवी सुब्बा रेड्डी के बीच बातचीत विफल होने के बाद उक्त कदम उठाया. सूत्रों के हवाले से मीडिया में जो खबर चल रही है उसके अनुसार, वाई एस जगन मोहन ने शर्मिला को वाईएसआरसीपी में शामिल होने के लिए मनाने के लिए सुब्बा रेड्डी को भेजा था, क्योंकि उन्हें लगा कि यदि उनकी बहन राज्य में विरोधी खेमे में चुनावी मैदान में उतरतीं हैं तो प्रदेश में उनके प्रभाव और छवि को ठेस पहुंचेगा. बताया जा रहा है कि शर्मिला ने 31 दिसंबर और 1 जनवरी को हुई बैठकों में वाईएसआरसीपी में शामिल होने से साफ इनकार कर दिया था.

राहुल गांधी को पीएम के रूप में देखना सपना!

कांग्रेस में शामिल होने के बाद शर्मिला ने कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना मेरे पिता का सपना था और मैं इसके लिए काम करूंगी. उल्लेखनीय है कि शर्मिला, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में कांग्रेस में शामिल हुईं. इसके बाद उन्होंने सोनिया गांधी से उनके आवास पर मुलाकात की जिसकी तस्वीर सामने आई है. कांग्रेस की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश की सबसे बड़ी धर्मनिरपेक्ष पार्टी है क्योंकि यह अडिग तरीके से सभी समुदायों की सेवा करने का काम करती है और सभी वर्गों के लोगों को एकजुट करती है.

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कांग्रेस को अपना समर्थन देने का ऐलान किया था शर्मिला ने

शर्मिला की बात करें तो वह आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई. एस. जगन मोहन रेड्डी की छोटी बहन हैं. उन्होंने कांग्रेस का दामन थामने के बाद कहा कि राहुल गांधी को प्रधानमंत्री के रूप में देखना उनके पिता का सपना था और उन्हें इसमें योगदान देकर खुशी होगी. शर्मिला ने कहा कि उन्हें खुशी है कि वह तेलंगाना में कांग्रेस की जीत का हिस्सा थीं. यहां बताते चलें कि शर्मिला ने तेलंगाना में हालिया विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस को अपना समर्थन देने का ऐलान किया था. शर्मिला ने पिछले दिनों हैदराबाद में अपनी पार्टी की बैठक की अध्यक्षता करने के बाद कहा था कि वह और पार्टी के अन्य नेता कांग्रेस अध्यक्ष खरगे और राहुल गांधी सहित शीर्ष नेतृत्व से दिल्ली में मुलाकात करेंगे. इसके बाद एक खास ऐलान किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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