सोनिया गांधी ने कहा-महिला आरक्षण बिल राजीव गांधी का सपना, लेकिन SC, ST और OBC के लिए अलग से आरक्षण की मांग की

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सोनिया गांधी ने कहा-महिला आरक्षण बिल राजीव गांधी का सपना, लेकिन SC, ST और OBC के लिए अलग से आरक्षण की मांग की

सोनिया गांधी ने कहा कि बिल को कानून बनाने में देरी करना महिलाओं के साथ नाइंसाफी होगी. इसलिए मैं सरकार से मांग करती हूं कि इस बिल को अविलंब कानून का रूप दिया जाए. साथ ही मेरी यह मांग भी है कि इस बिल में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था हो.

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महिला आरक्षण बिल पर कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि मैं ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम‘ का समर्थन करती हूं. सोनिया गांधी ने अपने संबोधन में भारतीय नारी के बलिदान की चर्चा की. उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई और नये भारत के निर्माण में भारतीय नारी की अहम भूमिका रही है. उसने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपना योगदान दिया है. सोनिया गांधी ने कहा कि स्त्री ने हमें सोचने समझने की शक्ति दी है.

महिला आरक्षण बिल राजीव गांधी का सपना

सोनिया गांधी ने कहा कि आधी आबादी को नगर निकायों और पंचायतों में भागीदारी दिलाने के लिए मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी ने बिल लाया था. लेकिन उस वक्त यह बिल पास नहीं हो पाया था. बाद में पी वी नरसिम्हा राव ने इस बिल को पास कराया था. सोनिया गांधी ने कहा कि मैं इस बिल का समर्थन करती हूं, लेकिन मेरी जो चिंता है मैं उसे बताना चाहती हूं. सरकार कह रही है कि महिला आरक्षण के लिए देश की औरतों को और इंतजार करना होगा. मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि आखिर महिलाओं को और कितना इंतजार करना होगा, दो साल, तीन साल या और कितने साल?


बिल में देरी महिलाओं के साथ नाइंसाफी

सोनिया गांधी ने कहा कि बिल को कानून बनाने में देरी करना महिलाओं के साथ नाइंसाफी होगी. इसलिए मैं सरकार से मांग करती हूं कि इस बिल को अविलंब कानून का रूप दिया जाए. साथ ही मेरी यह मांग भी है कि इस बिल में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़े वर्ग की महिलाओं के लिए भी आरक्षण की व्यवस्था हो. सरकार नवीनतम जनगणना के अनुसार यह व्यवस्था करे. मेरी पार्टी इस बिल का समर्थन करती है और यह मांग करती है कि जल्द से जल्द इसे लागू किया जाए, तभी राजीव गांधी का सपना पूरा होगा.

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देश में 15 लाख चुनी हुई महिला नेता

लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने वाले 128वें संविधान संशोधन विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए सोनिया गांधी ने कहा कि यह उनके लिए मार्मिक क्षण है. सोनिया गांधी ने कहा- स्थानीय निकायों में महिलाओं की भागीदारी तय करने वाला संविधान संशोधन विधेयक मेरे जीवनसाथी राजीव गांधी जी ही लेकर आए थे जो राज्यसभा में सात वोटों से गिर गया था. बाद में पीवी नरसिम्हा राव जी के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार ने उसे पारित करवाया. आज उसी का नतीजा है कि देश में 15 लाख चुनी हुई महिला नेता हैं.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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