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हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को कानूनी मान्यता क्यों दिलाना चाहती है सुक्खू सरकार?

Updated at : 19 Apr 2023 4:04 PM (IST)
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हिमाचल प्रदेश में भांग की खेती को कानूनी मान्यता क्यों दिलाना चाहती है सुक्खू सरकार?

HP CM Sukhu Legalise Cannabis Cultivation - गांजा परंपरागत रूप से पुराने हिमाचल के कुछ हिस्सों में उगाया जाता रहा है, जिसमें शिमला, मंडी, कुल्लू, चंबा और सिरमौर शामिल हैं.

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Himachal Pradesh CM Sukhu To Validate Cannabis Cultivation : हिमाचल प्रदेश की सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार राज्य में भांग की खेती को वैध करने की तैयारी में है. हिमाचल में भांग की खेती के लिए नीति बनायी जाएगी. भांग की खेती को वैध करने से राज्य को सालाना 18 हजार करोड़ रुपये आय होने का अनुमान है. प्रदेश में अनुमानित 2400 एकड़ भूमि में भांग की संगठित अवैध खेती हो रही है. गांजा परंपरागत रूप से पुराने हिमाचल के कुछ हिस्सों में उगाया जाता रहा है, जिसमें शिमला, मंडी, कुल्लू, चंबा और सिरमौर शामिल हैं. सरकार ने गांजा की खेती वैध करने के लिए पांच विधायकों की एक समिति बनायी है. यह समिति हिमाचल के उन क्षेत्रों का दौरा करेगी, जहां पर भांग की खेती अवैध रूप से की जाती है. यह समिति सभी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद महीनेभर में अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी. इस रिपोर्ट के आधार पर भांग की खेती को वैध करने के बारे में सरकार अंतिम फैसला लेगी.

भांग की खेती का इतिहास 12 हजार वर्ष पुराना

एनडीपीएस एक्ट के तहत राज्यों को औषधीय उपयोग के लिए भांग की खेती को साधारण और विशेष आदेशों के तहत अनुमति देने की शक्तियां निहित की गई हैं. यह अनुमति केवल भांग के रेशे अथवा इसके बीज का बागवानी और औषधीय उपयोग के लिए ही दी जा सकती है. आपको बता दें कि भांग की खेती का इतिहास लगभग 12 हजार वर्ष पुराना है. इसकी गिनती मानव द्वारा उगायी जानेवाली सबसे पुरानी फसलों में होती है. ऐसे में सुक्खू सरकार राज्य में भांग की खेती को राजस्व अर्जित करने के उद्देश्य से वैध करने की सोच रही है. सरकार का मानना है कि औषधीय और औद्योगिक क्षेत्र के लिए भांग की खेती कारगार साबित होगी.

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भांग में पाये जाते हैं कई औषधीय गुण

भांग में कई औषधीय गुण पाये जाते हैं. इसके उपयोग से कैंसर, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, अवसाद आदि से बहुत आराम मिलता है. कई देशों में भांग की खेती को कानूनी मान्यता दी गई हैं. भारत में भी कई राज्यों में भांग की खेती को कानूनी दायरे में रखा गया है. भांग की खेती का इतिहास लगभग 12 हजार वर्ष पुराना है और इसे मानव द्वारा उगायी गई सबसे पुरानी फसलों में गिना जाता है. सदियों से यह खुले में प्राकृतिक तौर पर उगती रही है. नारकोटिक ड्रग्स एवं साइकोट्रोपिक सब्स्टांसेज (NDPS) एक्ट के तहत राज्यों को औषधीय उपयोग के लिए भांग की खेती को साधारण अथवा विशेष आदेशों के तहत अनुमति प्रदान करने की शक्तियां निहित की गई हैं. यह अनुमति केवल भांग के रेशे अथवा इसके बीज या बागवानी और औषधीय उपयोग के लिए ही दी जा सकती है.

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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