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कौन होते हैं ‘हाइब्रिड’ आतंकवादी? कैसे करते हैं हमला और आतंकवादियों से कितने अलग होते हैं

Updated at : 23 May 2022 10:18 PM (IST)
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कौन होते हैं ‘हाइब्रिड’ आतंकवादी? कैसे करते हैं हमला और आतंकवादियों से कितने अलग होते हैं

Who is Hybrid Terrorist: हाइब्रिड आतंकवादी की पहचान करना सुरक्षा बलों के लिए भी बहुत मुश्किल होता है. ये लोग आम लोगों के बीच रहते हैं और जब भी उन्हें मौका मिलता है, हमले को अंजाम देकर फिर से सामान्य जीवन बिताने लगते हैं.

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Who is Hybrid Terrorist: जम्मू-कश्मीर में इन दिनों हाइब्रिड आतंकवादी काफी चर्चा में है. पुलिस और सुरक्षा बलों के जवान आतंकवाद के सफाये के लिए अभियान चला रहे हैं. इस दौरान कई आतंकवादी पकड़े गये हैं. पुलिस ब्रीफिंग में कुछ आतंकवादियों को आतंकवादी करार दिया जाता है, तो कुछ को ‘हाइब्रिड’ आतंकवादी कहा जाता है. आखिर आतंकवादी और हाइब्रिड आतंकवादी में क्या अंतर होता है.

हाइब्रिड आतंकवादियों की पहचान मुश्किल

आतंकवादी घुसपैठ करके आता है और हमलों को अंजाम देने के बाद भाग जाता है. बहुत कम ऐसे मौके होते हैं, जब आतंकवादी पकड़ा जाता है. जो आतंकवादी होते हैं, उनमें से ज्यादातर मुठभेड़ में मारे जाते हैं. हाइब्रिड आतंकवादी की पहचान करना सुरक्षा बलों के लिए भी बहुत मुश्किल होता है. ये लोग आम लोगों के बीच रहते हैं और जब भी उन्हें मौका मिलता है, हमले को अंजाम देकर फिर से सामान्य जीवन बिताने लगते हैं.

हाइब्रिड आतंकियों का सुरक्षा बलों के पास नहीं होता रिकॉर्ड

पुलिस या सुरक्षा बलों के पास भी इनका कोई रिकॉर्ड नहीं होता है. इसलिए ये लोग अपने आका के हुक्म की तामील करने में कामयाब हो जाते हैं. ‘हाइब्रिड’ आतंकवादी दरअसल आतंकवादियों के रूप में चिह्नित नहीं होते हैं. लेकिन आतंकी मंसूबों के प्रति इनकी सहानुभूति रहती है. इस श्रेणी के आतंकवादी अपने आका के द्वारा दिये गये काम के अनुसार लक्षित हमले करने के लिए पर्याप्त रूप से प्रशिक्षित होते हैं.

Also Read: Hybrid Terrorists Arrested: जम्मू-कश्मीर में लश्कर के पांच ‘हाइब्रिड’ आतंकवादी गिरफ्तार

आम लोगों के बीच घुल-मिल जाते हैं हाइब्रिड आतंकवादी

आतंकवादी वारदात को अंजाम देने के बाद वे भागने की कोशिश नहीं करते. सामान्य जीवन जीने लगते हैं और अगला काम मिलने का इंतजार करते हैं. जब से सीमा पर भारतीय सेना ने गश्ती बढ़ायी है, तब से हाइब्रिड आतंकियों के हमले बढ़ गये हैं. इन्हें टीआरएफ या ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ का नाम दिया गया है. टीआरएफ लश्कर से संबद्ध एक संगठन है. इसमें जम्मू-कश्मीर के युवाओं को भर्ती किया जा रहा है और उन्हें हमले के लिए ट्रेंड किया जा रहा है.

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