Manish Sisodia: 11 दिन तक कहां 'लापता' थे मनीष सिसोदिया, फोन भी बंद...अब हुआ बड़ा खुलासा
Published by : Aman Kumar Pandey Updated At : 08 Mar 2025 11:47 AM
Manish Sisodia
Manish Sisodia: दिल्ली की राजनीति में अचानक 'गायब' हुए मनीष सिसोदिया आखिर पिछले 11 दिनों से कहां थे?
Manish Sisodia: दिल्ली विधानसभा चुनाव में हार के बाद आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया सार्वजनिक कार्यक्रमों से नदारद थे, जिससे उनके बारे में कई तरह के सवाल उठने लगे थे. कुछ दिनों तक उनका फोन भी बंद था, जिससे उनकी अनुपस्थिति को लेकर चर्चा और तेज हो गई. अब मनीष सिसोदिया ने खुद सामने आकर इस बात का खुलासा किया है कि वे पिछले 11 दिनों से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में शामिल थे.
शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “पिछले 11 दिन से राजस्थान के एक गांव में विपश्यना ध्यान शिविर में था. मौन, एकांत और अपने ही अंतर्मन का अवलोकन कर रहा था. फोन भी बंद था और बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ था. आज सुबह ही शिविर पूरा हुआ है.”
सिसोदिया ने आगे बताया कि अब वे नए जोश के साथ वापसी कर रहे हैं. उन्होंने कहा, “आज शाम तक दिल्ली लौटूंगा, नई ऊर्जा और नए जोश के साथ. और मेरा संकल्प वही रहेगा — देश के हर बच्चे को शानदार शिक्षा मिले. अच्छी शिक्षा ही हर बच्चे को न सिर्फ सफल बल्कि एक बेहतर इंसान बनाती है. शिक्षा के मानवीकरण का काम भी आगे बढ़ाना है.”
इसे भी पढ़ें: अगले 48 घंटे आंधी और भारी बारिश की संभावना, 13 मार्च तक रहेगा पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव, IMD का अलर्ट
पूर्व शिक्षा मंत्री ने विपश्यना के अपने अनुभव को भी साझा किया. उन्होंने लिखा, “यह केवल ध्यान नहीं बल्कि एक गहरी आध्यात्मिक यात्रा है. इस दौरान दिन में 12 घंटे से अधिक समय केवल अपनी सांसों को देखने में बीतता है. बिना किसी प्रतिक्रिया के बस अपने मन और शरीर को समझने का प्रयास किया जाता है. गौतम बुद्ध की वही सीख — चीजों को वैसे ही देखना जैसी वे वास्तव में हैं, न कि जैसी हम उन्हें देखना चाहते हैं. इस यात्रा में कोई संवाद नहीं होता — न फोन, न किताबें, न लेखन और न ही किसी से आंख मिलाने का अवसर.”
सिसोदिया ने बताया कि शिविर के शुरुआती कुछ दिन काफी चुनौतीपूर्ण होते हैं. उन्होंने लिखा, “पहले कुछ दिन दिमाग़ भागता है, बेचैन होता है, लेकिन धीरे-धीरे समय ठहरने लगता है. एक अजीब-सी शांति हर हलचल के बीच जन्म लेने लगती है.”
इसे भी पढ़ें: दूल्हे की मेहंदी में मोहब्बत की एक-एक निशानी, वीडियो देख दुल्हन भी शरमा जाए
सिसोदिया ने कहा कि इस शिविर में शामिल 75% लोग 20-35 वर्ष की उम्र के थे. जब आखिरी दिन बातचीत का मौका मिला, तो पता चला कि सफलता की दौड़ में शामिल ये युवा थकान, उलझन और भीतर की बेचैनी से जूझ रहे थे. उनकी शिकायत थी कि जिस शिक्षा ने उन्हें सफलता की इस दौड़ के काबिल बनाया, उसमें इस मानसिक तनाव और उलझनों से निपटने का तरीका भी सिखा दिया जाता, तो उनका जीवन अधिक खुशहाल होता.
इसे भी पढ़ें: लापरवाह माता-पिता! लिफ्ट में फंसा मासूम बच्चा, मदद को कोई नहीं आया, देखें वीडियो
सिसोदिया ने खुशी जताई कि दिल्ली में शिक्षा मंत्री रहते हुए उन्होंने स्कूलों में हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के तहत रोज़ाना हर बच्चे के लिए ‘हैप्पीनेस क्लास’ शुरू करवाई थी. उन्होंने कहा कि शिक्षा के मानवीयकरण की दिशा में यह एक बड़ा कदम है. यह वही हैप्पीनेस क्लास है, जिसका ज़िक्र विपश्यना ध्यान के बाद इन युवाओं ने किया.
इसे भी पढ़ें: दूल्हा- दुल्हन में महायुद्ध! देखें वीडियो
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Aman Kumar Pandey
अमन कुमार पाण्डेय डिजिटल पत्रकार हैं। राजनीति, समाज, धर्म पर सुनना, पढ़ना, लिखना पसंद है। क्रिकेट से बहुत लगाव है। इससे पहले राजस्थान पत्रिका के यूपी डेस्क पर बतौर ट्रेनी कंटेंट राइटर के पद अपनी सेवा दे चुके हैं। वर्तमान में प्रभात खबर के नेशनल डेस्क पर कंटेंट राइटर पद पर कार्यरत।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










