Aravalli Hills: अरावली पहाड़ियों का क्या है मामला? कांग्रेस मोदी सरकार पर हमलावर
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 23 Dec 2025 9:05 AM
अरावली पहाड़ियों का विवाद क्या है (Photo: PTI)
Aravalli Hills: अरावली की परिभाषा का मुद्दा अब गरमाने लगा है. कांग्रेस 26 दिसंबर को केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने की तैयारी में जुट गई है. जानें क्या है पूरा मामला.
Aravalli Hills: अरावली पहाड़ियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की नई परिभाषा के बाद उत्तर भारत के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं. अरावली दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है, जो राजस्थान, हरियाणा के अलावा गुजरात और दिल्ली तक फैली हुई है. केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद अदालत ने नई परिभाषा को स्वीकार किया है. इसके अनुसार, आसपास की जमीन से कम से कम 100 मीटर ऊंची किसी भी भूमि को अरावली पहाड़ी माना जाएगा. यदि 500 मीटर के दायरे में दो या अधिक ऐसी पहाड़ियां हों और उनके बीच की जमीन हो, तो उसे अरावली पर्वत श्रृंखला माना जाएगा.
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एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा : कांग्रेस
मामले को लेकर कांग्रेस महासचिव सचिन पायलट ने कहा कि अरावली की परिभाषा को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ कांग्रेस 26 दिसंबर को जयपुर में व्यापक प्रदर्शन करेगी. वह केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत गठित एक समिति की अरावली पर्वतमाला की परिभाषा संबंधी हालिया सिफारिशों का जिक्र कर रहे थे, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने 20 नवंबर को स्वीकार कर लिया था. पायलट ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि सरकार जो करने का इरादा रखती है, उसे रोकने के लिए एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.
#WATCH | Bengaluru: On the Aravalli Hills row, Congress leader Sachin Pilot says, "… We will have to urge the Supreme Court to reconsider its decision, because the four governments in Gujarat, Rajasthan, Haryana, and Delhi are all BJP governments. The central government is also… pic.twitter.com/MULgmflpwP
— ANI (@ANI) December 23, 2025
एक तरह से मौत का फरमान : पायलट
आगे पायलट ने कहा कि मेरे विचार से, इसका एकमात्र मकसद खनन क्षेत्र में पैसा कमाने वाले कुछ लोगों को खुश करना हो सकता है. इसमें जो भी शामिल हो, इस बात की न्यायिक जांच होनी चाहिए कि इसकी शुरुआत किसने की, कौन कर रहा है और इसके पीछे कौन है. पायलट ने कहा कि वह 26 दिसंबर को जयपुर में होने वाले मार्च में भाग लेंगे ताकि बीजेपी शासित सरकारों द्वारा अरावली पर्वतमाला को लुप्त होने देने के इरादे के खिलाफ आवाज उठाई जा सके. उन्होंने कहा कि मेरी राय में, अगले कुछ वर्षों में अरावली पर्वतमाला का यही हाल होने वाला है, यह एक तरह से मौत का फरमान है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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