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Violence in Farmers Protest : खत्म होगा आंदोलन ? किसानों में पड़ गई फूट, 20 किसान नेताओं को नोटिस, दिल्ली पुलिस ने तीन दिन में जवाब मांगा

By Prabhat khabar Digital
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Violence in Farmers Protest
Violence in Farmers Protest
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गणतंत्र दिवस (Republic Day) के अवसर पर राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली में किसानों द्वारा की गई हिंसा (Violence in Farmers Protest) के बाद किसानों में फूट नजर आने लगी है. दो किसान संगठनों (Farmers Protest) ने खुद को इस आंदोलन से अलग करने का फैसला किया है.

अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीएम सिंह (VM Singh) ने इस संबंध में कहा है कि उनका संगठन इस आंदोलन से खुद को अलग कर रहा है. यही नहीं भारतीय किसान यूनियन (भानू गुट) ने भी किसना आंदोलन खत्म करने की घोषणा की है.

इस बीच दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ट्रैक्टर रैली को लेकर पुलिस के साथ हुए समझौते को तोड़ने के लिए योगेंद्र यादव, बलदेव सिंह सिरसा, बलबीर एस.राजेवाल समेत कम से कम 20 किसान नेताओं को नोटिस जारी किया है. उन्हें 3 दिनों में जवाब देने के लिए कहा गया है.

इधर दिल्ली पुलिस ने गणतंत्र दिवस के दिन किसानों की ट्रैक्टर परेड में हुई हिंसा के सिलसिले में राकेश टिकैत, योगेन्द्र यादव और मेधा पाटकर सहित 37 किसान नेताओं के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज करने का काम किया है. साथ ही इनके खिलाफ दंगा, आपराधिक षड्यंत्र, हत्या का प्रयास सहित भादंसं की विभिन्न धाराओं में आरोप लगाया है.

पुलिस का कहना है कि ट्रैक्टर परेड में हिंसा में किसान नेताओं की भूमिका की जांच की जाएगी. हिंसा और तोड़-फोड़ में दिल्ली पुलिस के 394 कर्मी घायल हुए हैं जबकि एक प्रदर्शनकारी की मौत हुई है. पुलिस ने हिंसा के सिलसिले में अब तक 25 प्राथमिकी दर्ज की हैं. समयपुर बादली थाने में अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने हिंसा के दौरान पुलिस से पिस्तौल, 10 गोलियां और आंसू गैस के दो गोले लूट लिए.

वीएम सिंह ने कहा : किसान नेता वीएम सिंह ने कहा कि गणतंत्र दिवस के दिन राजधानी दिल्ली में जो हुआ इन सब में सरकार की भी गलती को नकारा नहीं जा सकता है. उन्होंने कहा कि कोई 11 बजे की जगह 8 बजे निकल रहा है तो सरकार क्या कर रही थी ? जब सरकार को इस बात की जानकारी थी कि लाल किले पर झंडा फहराने वाले को कुछ संगठनों ने करोड़ों रुपये देने की बात की थी तब सरकार ने कार्रवाई क्यों नहीं की ? आगे श्री सिंह ने कहा कि हम किसी ऐसे व्यक्ति के साथ कृषि कानूनों के विरोध को आगे नहीं बढ़ाने का काम नहीं कर सकते जिसकी दिशा साफ नहीं हो. इसलिए, मैं उन्हें शुभकामनाएं देता हूं...मैं और अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति इस विरोध को तुरंत वापस लेने का ऐलान करते हैं.

किसानों की संख्‍या में कमी : इधर दो महीने से दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसानोंकी संख्या में कमी नजर आ रही है. यदि किसानों के घर वापसी का सिलसिला जारी रहा तो किसान संगठन संसद मार्च और कृषि कानून के संदर्भ में सरकार पर पहले की तरह दबाव बनाने में कामयाब नहीं हो पाएंगे.

Posted By : Amitabh Kumar

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