ePaper

Vande Matram: राष्ट्रीय गीत पर विशेष चर्चा, सभापति ने बताया राष्ट्र की 'धड़कन'

Updated at : 09 Dec 2025 8:06 PM (IST)
विज्ञापन
Vande Matram: राष्ट्रीय गीत पर विशेष चर्चा, सभापति ने बताया राष्ट्र की 'धड़कन'

सभापति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के लिए 'वंदे मातरम' केवल एक गीत नहीं था, बल्कि यह उनके "दिलों से निकली अंतिम पुकार थी जब वे निडर होकर फांसी के तख्ते की ओर बढ़ रहे थे. उनका बलिदान आज भी इस पवित्र गीत की हर ऊंची धुन में गूंजता है. यह स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के लिए असीम प्रेम से अर्जित की गई थी. स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम को हर घर, हर विद्यालय और हर आंदोलन तक पहुंचाया.

विज्ञापन

Vande Matram: राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के मौके पर राज्यसभा में एक विशेष चर्चा का आयोजन किया गया. चर्चा शुरू होने से पहले सभापति ने एक भावुक और प्रेरणादायक घोषणा करते हुए इस अमर गीत के महत्व को रेखांकित किया. सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि श्रद्धा और गर्व की गहरी अनुभूति से परिपूर्ण हृदय के साथ, हम राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ मनाने के लिए जमा हुए हैं. यह गीत एक रचना नहीं, बल्कि राष्ट्र के दिल की धड़कन है. 


सभापति ने कहा कि यह गीत असंख्य माताओं की अनकही प्रार्थना, उत्पीड़ितों की शांत आशा, और उन लोगों का अडिग साहस है, जिन्होंने कभी स्वतंत्रता का सपना देखने का साहस किया था. उन्होंने याद दिलाया कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जी ने इसकी रचना तब की थी जब मातृभूमि पर औपनिवेशिक शासन का दबाव था. यह गीत जल्द ही स्वतंत्रता के लिए तरस रहे लाखों लोगों के दिलों की धड़कन बन गया, जिसने धर्म, भाषा और भूगोल की सीमाओं से परे पूरे देश को मातृभूमि के प्रति प्रेम से जोड़ दिया.

बलिदानियों का अंतिम उद्घोष बना यह गीत

सभापति ने कहा कि असंख्य स्वतंत्रता सेनानियों के लिए ‘वंदे मातरम’ केवल एक गीत नहीं था, बल्कि यह उनके “दिलों से निकली अंतिम पुकार थी जब वे निडर होकर फांसी के तख्ते की ओर बढ़ रहे थे. उनका बलिदान आज भी इस पवित्र गीत की हर ऊंची धुन में गूंजता है. यह स्मरण कराता है कि स्वतंत्रता दृढ़ संकल्प और राष्ट्र के लिए असीम प्रेम से अर्जित की गई थी. स्वतंत्रता सेनानियों ने वंदे मातरम को हर घर, हर विद्यालय और हर आंदोलन तक पहुंचाया. उन्होंने महाकवि सुब्रमण्यम भारती की सशक्त कविता को उद्धृत किया. 

एक उदात्त, गगनचुंबी मस्तूल के शीर्ष पर वंदे मातरम की ध्वनि गूंजती है. वंदे मातरम दिव्य तेज से प्रदीप्त है. उसकी उदात्तता पूरी दुनिया में छा रही है. सभापति ने उपस्थित सदस्यों से अपनी मातृभूमि को नमन करने का आह्वान किया और जोर देकर कहा कि वन्दे मातरम एक प्रतिज्ञा है. हमारी अस्मिता की प्रतिज्ञा. हमारी एकता की प्रतिज्ञा. हमारे सामूहिक भविष्य की प्रतिज्ञा. इसी भावना ने स्वतंत्रता संग्राम को संबल प्रदान किया, जिसे न कोई साम्राज्य, न कोई अत्याचार और न ही कोई भय डिगा सका. सभापति ने भारत माता के उन सभी सपूतों और आत्माओं को अगाध विनम्रता और कृतज्ञतापूर्वक नमन किया जिन्होंने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी. उनका बलिदान केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं है, यह हमारी शाश्वत मार्गदर्शक ज्योति है. सभापति ने सदस्यों को तीन मूल बातें याद रखने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि एकता हमारी शक्ति है, त्याग हमारा मार्ग है, भारत माता हमारी आत्मा है.

विज्ञापन
Anjani Kumar Singh

लेखक के बारे में

By Anjani Kumar Singh

Anjani Kumar Singh is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola