Tripura Election Result: रुझानों के अनुसार त्रिपुरा में भाजपा सरकार, टिपरा मोथा पार्टी ने जीता दिल

त्रिपुरा की 60 विधानसभा सीटों पर 16 फरवरी को हुए चुनाव के लिए बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना शुरू हुई है. बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 31 सीटों पर जीत दर्ज करनी है.
नाॅर्थ-ईस्ट के राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव की मतगणना शुरू हो चुकी है. त्रिपुरा (Tripura) की 60 विधानसभा सीट के लिए हुए मतदान में अबतक प्राप्त मतगणना के रुझानों में भाजपा 32 सीटों पर आगे चल रही है और उसे एक सीट पर जीत हासिल हो चुकी है. पिछले चुनाव के मुकाबले उसे 10 सीटों का नुकसान होता दिख रहा है.
त्रिपुरा में भाजपा ने इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ गठबंधन किया है. यहां भाजपा का सीधा मुकाबला विपक्षी लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन से हो रहा है. आजतक टीवी चैनल के अनुसार भाजपा 30 सीटों पर आगे चल रही है. जबकि चुनाव आयोग के अनुसार 60 में से 60 सीटों का रुझान अभी मिल रहा है, जिनमें से 32 पर भाजपा और 11 पर लेफ्ट आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस 4 सीटों पर आगे है. टिपरा मोथा पार्टी को 11 सीटों पर बढ़त मिल रही है जो उनकी बड़ी बढ़त है. मोथा पार्टी पूर्व शाही वंशज प्रद्योत माणिक्य देबबर्मा द्वारा बनायी गयी है.
त्रिपुरा की 60 विधानसभा सीटों पर 16 फरवरी को हुए चुनाव के लिए बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतगणना शुरू हुई है. बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 31 सीटों पर जीत दर्ज करनी है. इस बार चुनाव में कुल 23.13 लाख मतदाताओं में से 89.90 प्रतिशत लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था. यहां महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है.
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By रजनीश आनंद
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.
राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.
रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.
आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.
रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.
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