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कृषि कानूनों पर बात करने के लिए सिर्फ एक और मौका दे दो, मगर पहले ये बताओ कि आपकी 'रज़ा' क्या है?

Updated at : 09 Jun 2021 10:04 PM (IST)
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कृषि कानूनों पर बात करने के लिए सिर्फ एक और मौका दे दो, मगर पहले ये बताओ कि आपकी 'रज़ा' क्या है?

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि सरकार विरोध कर रहे किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने किसान संगठनों से तीनों कृषि कानूनों के प्रावधानों में कहां आपत्ति है, ठोस तर्क के साथ अपनी बात रखने को कहा है.

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नई दिल्ली : संसद से पारित तीन कृषि कानूनों को लेकर आंदोलनरत किसानों से बातचीत करने के लिए केंद्र की मोदी सरकार एक बार फिर तैयार हुई है, लेकिन उसका कांटा वहीं ‘आपत्ति’ बताने पर अटका हुआ है. किसान हमेशा तीनों कृषि कानूनों को ‘वापस’ करने की मांग पर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनसे अब भी ‘रज़ा’ ही पूछ रही है.

केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बुधवार को कहा कि सरकार विरोध कर रहे किसानों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने के लिए तैयार है, लेकिन उन्होंने किसान संगठनों से तीनों कृषि कानूनों के प्रावधानों में कहां आपत्ति है, ठोस तर्क के साथ अपनी बात रखने को कहा है. इसके पहले, सरकार और यूनियनों ने गतिरोध खत्म करने और किसानों के विरोध-प्रदर्शन को समाप्त करने के लिए 11 दौर की बातचीत की है, जिसमें आखिरी बातचीत 22 जनवरी 2021 को हुई थी. 26 जनवरी 2021 को किसानों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान एक ट्रैक्टर रैली के दौरान व्यापक हिंसा के बाद बातचीत रुक गई थी.

तीन कृषि कानूनों के विरोध में छह महीने से अधिक समय से दिल्ली की सीमाओं पर हजारों किसान डेरा डाले हुए हैं, जो मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से सटी हुई हैं. इन किसानों को इस बात का भय सता रहा है कि तीन कृषि कानूनों के अमल में आने से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर फसलों की सरकारी खरीद समाप्त हो जाएगी.

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने तीनों कृषि कानूनों को अमलीजामा पहनाने पर अगले आदेश तक रोक लगा रखी है और समस्या का हल खोजने के लिए एक समिति का गठन किया है. केंद्रीय मंत्रिमंडल के बैठक के बाद तोमर ने कहा कि देश के सभी राजनीतिक दल इन कृषि कानूनों को लाना चाहते थे, लेकिन उन्हें लाने का साहस नहीं जुटा सके. मोदी सरकार ने किसानों के हित में यह बड़ा कदम उठाया और सुधार लाए. देश के कई हिस्सों में किसानों को इसका लाभ मिलने लगा, लेकिन इसी बीच किसानों का आंदोलन शुरू हो गया.

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Posted by : Vishwat Sen

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