Terror Funding Case : यासीन मलिक को होगी फांसी? NIA ने दायर की याचिका

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 11 Aug 2025 12:09 PM

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yasin malik

Terror Funding Case: दिल्ली हाई कोर्ट में NIA ने याचिका दायर की है. इसमें यासीन मलिक की उम्रकैद की सजा को बदलकर फांसी की सजा देने की मांग की गई है.

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Terror Funding Case: दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को कश्मीरी अलगाववादी नेता यासीन मलिक से जवाब मांगा है. एनआईए ने एक अपील दायर कर उनके खिलाफ आतंक फंडिंग मामले में मौत की सजा की मांग की है. इस संबंध में livelaw.in ने खबर प्रकाशित की है. खबर के अनुसार, जस्टिस विवेक चौधरी और जस्टिस शलिंदर कौर की बेंच ने यासीन मलिक से कहा कि वह चार हफ्ते के भीतर अपना जवाब दें. इस मामले की अगली सुनवाई 10 नवंबर को होगी.

यासीन मलिक ऑनलाइन भी पेश नहीं हुए

एनआईए के वकील ने 9 अगस्त 2024 के एक आदेश का जिक्र किया, जिसमें यासीन मलिक ने कहा था कि वह अपना केस खुद लड़ेंगे. उस आदेश में यह भी तय किया गया था कि सुरक्षा खतरे की वजह से मलिक अदालत में शारीरिक रूप से नहीं, बल्कि ऑनलाइन मौजूद रहेंगे. सोमवार को मलिक ऑनलाइन भी पेश नहीं हुए. अदालत ने आदेश दिया कि अगली सुनवाई में वह ऑनलाइन मौजूद रहें.

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मलिक को सुनाई जा चुकी है उम्रकैद की सजा

मई 2022 में ट्रायल कोर्ट ने इस मामले में मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. उन्होंने खुद ही अपराध कबूल किया था और आरोपों का विरोध नहीं किया था. स्पेशल जज ने यासीन मलिक को उम्रकैद की सजा सुनाते समय कहा था कि उनका अपराध सुप्रीम कोर्ट के मुताबिक “रेरेस्ट ऑफ द रेयर” की श्रेणी में नहीं आता.

अन्य आरोपियों ने मुकदमा लड़ने का फैसला किया

मामले में अन्य जिन लोगों पर आरोप लगे उन्होंने मुकदमा लड़ने का फैसला किया. इनमें हाफिज मोहम्मद सईद, शब्बीर अहमद शाह, हिजबुल मुजाहिदीन के प्रमुख सलाउद्दीन, राशिद इंजीनियर, जहूर अहमद शाह वटाली, शाहिद-उल-इस्लाम, अल्ताफ अहमद शाह उर्फ फंटूश, नईम खान और फारूक अहमद डार उर्फ बिट्टा कराटे शामिल हैं.

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By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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