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Coronavirus Impact : 14 साल तक गणित पढ़ाने वाले अब 150 रुपए दिहाड़ी की नौकरी कर रहे

Updated at : 21 Jun 2020 10:46 AM (IST)
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Coronavirus Impact : 14 साल तक गणित पढ़ाने वाले अब 150 रुपए दिहाड़ी की नौकरी कर रहे

Telangana Teachers Misery: यह महज दो या तीन तस्वीर नहीं है. रिपोर्टस के मुताबिक इनदिनों तेलंगाना में यह तस्वीर आम हो गयी है. जहां शिक्षक अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी के अलावा कई और कार्य कर रहे हैं जिससे परिवार का पेट भर सकें. कोरोना वायरस के प्रसार (Coronavirus) को रोकने के लिए लागू किये गये लॉकडाउन के (Lockdown) कारण निजी क्षेत्रों में नौकरीयों मे कटौति की गयी, मानदेय में कटौती की गयी. इसका परिणाम आज ये शिक्षक भुगत रहे हैं. एक दो इन शिक्षकों को पहले ही कम तनख्वाह मिलती थी, पर लॉकडाउन वे उसे भी छीन लिया.

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वेमुला कोटेश्वर राव, गणित के शिक्षक, 14 वर्षों तक बच्चों को गणित की शिक्षा दी, पर आज कोरोना महमारी ने इनके ही जीवन का गणित खराब कर दिया. आज 150 रुपये दैनिक मजदूरी की दर पर काम कर रहे हैं. क्योंकि परिवार के पेट का सवाल है. एक तो पहले ही तनख्वाह कम थी, इसके बाद कोरोना वायरस ने रही सही कसर पूरी कर दी. फिर मार्च में नौकरी छूट गयी. कोटेश्वर बताते हैं कि कभी 100 छात्रों को पढ़ाते थे, पर आज बेटी के लिए एक फ्रॉक खरीदने के पैसे नहीं है.

शेख जहीर अहमद गैस एंजेसी के लिए काम कर रहे हैं. एजेंसी में वो सिलिंडर को उतारने का काम करते हैं. इस कार्य के लिए उन्हें 300 रूपये प्रतिदिन मिलता है. शेख बताते हैं कि पांच लोग मिलकर एक ट्रक से 500 सिलिंडर उतारते हैं. उन्होंने कहा कि स्कूल ने उन्हें बिना बकाया राशि का भुगतान किये ही बाहर का रास्ता दिखा दिया. इसलिए वो हैदराबाद छोड़कर मनछेरियल जिला में आ गये जहां वो अब काम करते हैं. शेख जहीर तेलंगाना के मुख्यमंत्री से गुहार लगाते हुए कहते हैं कि राज्य में उनके जैसे बहुत शिक्षकों की हालत खराब हो गयी है. इसलिए मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव उनके बारे में कुछ सोचें.

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मरागनी राम बाबू, निजी स्कूल के प्रिंसिपल अपनी पत्नी के साथ ठेला लगाकर इडली डोसा और वड़ा बेच रहे हैं. मरागनी राम बाबू खम्मम स्थिति एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल थे, 22000 तनख्वाह थी, आज सड़क किनारे ठेला लगाकर 200 रुपये प्रतिदिन कमा रहे हैं. राम बाबू बताते है कि लॉकडाउन के कारण स्कूल बंद हो गया इसके बाद प्रबंधन ने यह कहते हुए नौकरी से निकाल दिया की अब स्कूल खुलने के बाद प्रिंसिपल की जरूरत नहीं पड़ेगी. शुरूआत में ठेला लगाने में थोड़ी झिझक हुई पर परिवार का पेट भरने के लिए आखिरकार अब इस काम को कर रहा हूं.

यह महज दो या तीन तस्वीर नहीं है. रिपोर्टस के मुताबिक इनदिनों तेलंगाना में यह तस्वीर आम हो गयी है. जहां शिक्षक अपनी आजीविका चलाने के लिए मजदूरी के अलावा कई और कार्य कर रहे हैं जिससे परिवार का पेट भर सकें. कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए लागू किये गये लॉकडाउन के कारण निजी क्षेत्रों में नौकरीयों मे कटौती की गयी, मानदेय में कटौती की गयी. इसका परिणाम आज ये शिक्षक भुगत रहे हैं. एक तो इन शिक्षकों को पहले ही कम तनख्वाह मिलती थी, पर लॉकडाउन ने उसे भी छीन लिया.

तेलंगाना के प्राइवेट टीचर्स फोरम के मुताबिक राज्य में 11,700 सरकार से मान्यता प्राप्त प्राइवेट स्कूल हैं. जिन्होंने 15 मार्च के बाद से इन स्कूलों में काम करने वाले लगभग डेढ़ लाख शिक्षकों को सैलरी नही मिली है. इनमें से कुछ शिक्षक अपने गांव चले गये हैं. कुछ दूसरे कार्य कर रहे हैं.

Posted By: Pawan Singh

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