Tahawwur Rana: कुछ घंटों में भारत पहुंचेगा 26/11 हमलों का बड़ा आरोपी, तहव्वुर राणा को लेकर विशेष विमान ने भरी उड़ान

Published by : Pritish Sahay Updated At : 09 Apr 2025 10:20 PM

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Tahawwur Rana

Tahawwur Rana: मुंबई हमलों के बड़े आरोपियों में से एक तहव्वुर राणा जल्द ही भारत में होगा. अमेरिका से एक विशेष विमान के जरिए उसे भारत लाया जा रहा है. भारत आने के बाद राणा को एनआईए गिरफ्तार करेगी. इसके बाद उसे एनआईए की कोर्ट में पेश किया जाएगा. NIA की टीम उससे मुंबई हमलों के बारे में पूछताछ करेगी. वहीं, राणा के भारत पहुंचने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने  विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बैठक की.

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Tahawwur Rana: मुंबई आतंकी हमलों का बड़ा आरोपी तहव्वुर राणा कुछ ही घंटों में भारत पहुंच जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक राणा को लेकर अमेरिका से एक विशेष विमान ने उड़ान भर ली है. भारत पहुंचने के बाद राणा को एनआईए गिरफ्तार करेगी. राणा मुंबई में साल 2008 में हुए हमले का बड़ा आरोपी है. इस  हमले के पीछे लश्कर-ए-तैयबा का हाथ था, जिसके अहम तार राणा से जुड़े हुए थे. गिरफ्तारी के बाद एनआईए की टीम आरोपी तहव्वुर राणा से पूछताछ करेगी. रिपोर्ट के मुताबिक उसे दिल्ली के तिहाड़ जेल में रखा जाएगा.

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विदेश मंत्री और एनएसए के साथ की बैठक

तहव्वुर राणा के भारत पहुंचने से पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने विदेश मंत्री एस जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ बैठक की. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सूत्रों से जानकारी मिली है कि गृह मंत्री ने विदेश मंत्री और एनएसए के साथ बैठक में राणा को लेकर चर्चा हुई. बैठक में खुफिया ब्यूरो के निदेशक तपन डेका और विदेश सचिव विक्रम मिस्री भी मौजूद थे. केंद्र सरकार की एक बहु-एजेंसी टीम पाकिस्तानी मूल के कनाडाई नागरिक राणा को भारत लाने के लिए पहले से ही अमेरिका में है. राणा को भारत प्रत्यर्पित कराकर लाया जाना है ताकि उसपर 26/11 मुंबई हमलों के मामले में यहां मुकदमा चलाया जा सके.

अमेरिकी पुलिस ने किया था गिरफ्तार

इससे पहले राणा अमेरिका के जेल में बंद था. अमेरिकी संघीय जांच ब्यूरो (FBI) ने राणा को लश्कर-ए-तैयबा को साजो सामान की सहायता करने के आरोप में गिरफ्तार किया था. अमेरिका में तहव्वुर राणा को 2011 में इस मामले में दोषी ठहराया गया और 14 साल की जेल की सजा सुनाई गई. हालांकि, उसे मुंबई आतंकी हमलों की साजिश रचने के आरोपों से बरी कर दिया गया. वहीं. भारत लगातार अमेरिका से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा था.

मोदी सरकार की बड़ी सफलता- अमिश शाह

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा तहव्वुर हुसैन राणा के भारत प्रत्यर्पण पर बुधवार को कहा कि यह मोदी सरकार की बड़ी सफलता है. एक कार्यक्रम में शिरकत करने के दौरान अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार का प्रयास भारत के सम्मान, भूमि और लोगों पर हमला करने वालों को न्याय के कटघरे में लाना है.

17 साल बाद हो रहा है प्रत्यर्पण

26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर पूर्व राजनयिक केपी फैबियन ने कहा “जबकि हम अमेरिका के फैसले का स्वागत करते हैं, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि 26/11 हमले 2008 में हुए थे, और प्रत्यर्पण में 17 साल लग गए. बावजूद इसके कि भारत ने शुरू में ही विश्वसनीय सबूत उपलब्ध कराए थे. अगर भूमिकाएं बदल दी गई होतीं और 9/11 हमलों का एक आरोपी भारत में होता तो अमेरिका इतना लंबा इंतजार नहीं करता. अमेरिकी कानूनी प्रक्रिया धीमी है और लगातार आने वाले प्रशासन अधिक तेजी से काम कर सकते थे.”

मौत की सजा मिलनी चाहिए- प्रियंका चतुर्वेदी

26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण पर शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा “16 साल के लंबे इंतजार के बाद उसे भारत प्रत्यर्पित किया जा रहा है. उसे मुंबई के भीड़ भरे चौराहे पर मौत की सजा दी जानी चाहिए ताकि भारत की तरफ बुरी नीयत से देखने वाले लोगों का दिल दहल जाए. मुझे उम्मीद है कि हाफिज सईद, डेविड हेडली को भी भारत लाया जाएगा और उन्हें सख्त सजा दी जाएगी.”

विड कोलमैन हेडली से जुड़े हैं राणा के तार

तहव्वुर राणा पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली से जुड़ा है. कोलमैन 26 नवंबर 2008 (26/11) हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है. हेडली ने हमलों से पहले राणा की इमिग्रेशन कंसल्टेंसी के कर्मचारी के रूप में मुंबई की रेकी की थी. इसके अलावा राणा को डेनमार्क में आतंकवादी साजिश में सहायता देने से जुड़े एक मामले में और मुंबई हमलों के लिए जिम्मेदार आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को सहायता देने के एक मामले में अमेरिका में दोषी ठहराया गया था.

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की थी राणा की याचिका

इससे पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 26/11 के मुंबई आतंकवादी हमले के बड़े आरोपी तहव्वुर राणा की भारत प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया था. अमेरिका के लॉस एंजिलिस के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद राणा ने प्रत्यर्पण न करने की गुहार अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से लगाई थी. हालांकि उसकी याचिका को अमेरिकी कोर्ट ने नकार दिया. राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, जो मुंबई हमले के प्रमुख आरोपियों में से एक है. भारत काफी समय से उसके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रहा था. 

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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