सेना में महिला अधिकारियों की पदोन्नति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा - अपना घर दुरुस्त करें

Published by :KumarVishwat Sen
Published at :10 Dec 2022 6:26 PM (IST)
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सेना में महिला अधिकारियों की पदोन्नति में देरी पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा - अपना घर दुरुस्त करें

महिला सैन्य अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘हमें लगता है कि सेना इन महिला अधिकारियों के प्रति निष्पक्ष नहीं रही है. हम मंगलवार को एक स्पष्ट आदेश पारित करने जा रहे हैं. बेहतर होगा कि आप अपने घर को दुरुस्त करें और हमें बताएं कि आप उनके लिए क्या कर रहे हैं.

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने सेना में महिला अधिकारियों की पदोन्नति के मामले में कड़ी टिप्पणी की है. सर्वोच्च अदालत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान सेना से कहा कि पहले वह अपना घर दुरुस्त करे और उसे लगता है कि यह उन महिला अधिकारियों के लिए निष्पक्ष नहीं रही है, जिन्होंने 2020 में अदालत के निर्देश पर स्थायी कमीशन दिए जाने के बाद पदोन्नति में देरी का आरोप लगाया है. प्रधान न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा की पीठ 34 महिला सैन्य अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिन्होंने आरोप लगाया है कि सेना में लड़ाकू और कमांडिंग भूमिकाएं निभाने के लिए पदोन्नति के लिए जूनियर पुरुष अधिकारियों पर विचार किया जा रहा है.

महिलाओं से पहले पुरुष अफसरों के नतीजों की घोषणा न करें

महिला सैन्य अधिकारियों की याचिका पर सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा, ‘हमें लगता है कि सेना इन महिला अधिकारियों के प्रति निष्पक्ष नहीं रही है. हम मंगलवार को एक स्पष्ट आदेश पारित करने जा रहे हैं. बेहतर होगा कि आप अपने घर को दुरुस्त करें और हमें बताएं कि आप उनके लिए क्या कर रहे हैं. पीठ ने कहा कि सबसे पहले, उन पुरुष अधिकारियों के परिणामों की घोषणा न करें, जिन पर अक्टूबर में (पदोन्नति के लिए) विचार किया गया था, जब तक कि आप उनके (महिलाओं के) परिणामों की घोषणा नहीं करते.

मंगलवार को आदेश सुनाएगा सुप्रीम कोर्ट

पीठ ने केंद्र और सशस्त्र बलों की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) संजय जैन और वरिष्ठ अधिवक्ता आर बालासुब्रमण्यन से पूछा कि उन्होंने अक्टूबर में पदोन्नति के लिए इन महिला अधिकारियों पर विचार क्यों नहीं किया. पीठ ने आदेश पारित करने के लिए याचिका को मंगलवार के लिए सूचीबद्ध किया. जब केंद्र के विधि अधिकारियों ने कहा कि वे महिला अधिकारियों के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘हमारा मतलब जैन (एएसजी) और कर्नल बाला (वरिष्ठ वकील) से है. मैं आपके संगठन के बारे में निश्चित नहीं हूं.

1,200 कनिष्ठ पुरुष अधिकारी हुए पदोन्नत

एएसजी ने कहा कि सैन्य प्रतिष्ठान भी महिला अधिकारियों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है. विधि अधिकारी ने बताया कि सेना ने महिला सैन्य अधिकारियों की प्रोन्नति के लिए 150 सीट स्वीकृत की हैं. महिला अधिकारियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना ने कहा कि सर्वोच्च अदालत द्वारा महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने के फैसले के बाद से 1,200 कनिष्ठ पुरुष अधिकारियों को पदोन्नत किया गया है.

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वरिष्ठ महिला अधिकारियों से पहले पुरुषों की न हो पदोन्नति

वरिष्ठ अधिवक्ता वी मोहना ने पीठ को बताया कि पिछली सुनवाई के बाद भी नौ पुरुष अधिकारियों को उच्च रैंक पर रखा गया था. वरिष्ठ महिला अधिकारियों को पदोन्नत करने से पहले कोई पदोन्नति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ‘मुझे पता है कि नेक इरादे वाले वकील इस मामले में पेश हो रहे हैं और मैं वकीलों के खिलाफ नहीं हूं और मैं ये शिकायतें प्रशासन के खिलाफ कर रही हूं.’

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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