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सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल से चुनावी बॉन्‍ड की बिक्री पर रोक लगाने से किया इनकार, जानिए क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड...?

Updated at : 26 Mar 2021 12:10 PM (IST)
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सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल से चुनावी बॉन्‍ड की बिक्री पर रोक लगाने से किया इनकार, जानिए क्या होता है इलेक्टोरल बॉन्ड...?

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में आरोप लगाया गया था कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सत्ताधारी दल को चंदे के नाम पर घूस देने का काम रहा है. इसे रुकना चाहिए.

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नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने चार राज्य और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के पहले आगामी 1 अप्रैल से इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. हालांकि, इलेक्टोरल बॉन्ड शुरू से ही विवादों में घिरा रहा है. हमेशा इसके दुरुपयोग का मामला उठता ही रहा है. इसके पहले शीर्ष अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए इलेक्टोरल बॉन्ड के दुरुपयोग को लेकर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था.

सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में आरोप लगाया गया था कि इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सत्ताधारी दल को चंदे के नाम पर घूस देने का काम रहा है. इसे रुकना चाहिए. हालांकि, इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए किसी एक दल को नहीं, बल्कि सभी पार्टियों को चंदा मिलता है. इससे पहले की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों द्वारा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिये लिए जाने वाले फंड का आतंकवाद जैसे गलत कार्यों में दुरुपयोग होने की आशंका को लेकर केंद्र सरकार से जवाब तलब किया था. सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा कि क्या इस फंड का उपयोग किए जाने पर कोई नियंत्रण है?

प्रधान न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल से कहा कि सरकार को देखना चाहिए कि इलेक्टोरल बॉन्ड से प्राप्त धन का इस्तेमाल आतंकवाद जैसे गैर-कानूनी उद्देश्यों के लिए किए जाने से किस तरह रोका जाए. पीठ में जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रह्मणियन भी शामिल थे. शीर्ष अदालत ने कहा कि इस धन का इस्तेमाल किस तरह किया जाएगा, इसे लेकर सरकार का किस तरह का नियंत्रण है?

अदालत ने इस सिलसिले में दायर एक याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. याचिका में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सरकार को इलेक्टोरल बॉन्ड खोलने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई है. पीठ ने कहा कि फंड का दुरुपयोग किया जा सकता है. सरकार को इस मामले को देखना चाहिए.

क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड

सरकार ने इस दावे के साथ साल 2018 में इस बॉन्ड की शुरुआत की थी कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा. इसमें व्यक्ति, कॉरपोरेट और संस्थाएं बॉन्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में देती हैं और राजनीतिक दल इस बॉन्ड को बैंक में भुनाकर रकम हासिल करते हैं.

कहां मिलता है इलेक्टोरल बॉन्ड

देश में एसबीआई की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया. ये शाखाएं नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गांधीनगर, चंडीगढ़, पटना, रांची, गुवाहाटी, भोपाल, जयपुर और बेंगलुरु की हैं. अब तक इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री के 12 चरण पूरे हो चुके हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड का सबसे ज्यादा 30.67 फीसदी हिस्सा मुंबई में बेचा गया. इनका सबसे ज्यादा 80.50 फीसदी हिस्सा दिल्ली में भुनाया गया.

Also Read: इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर लोकसभा में हंगामा, कांग्रेस ने कहा प्रधानमंत्री जवाब दें

Posted by : Vishwat Sen

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