सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस नेता के. कविता को जमानत देने से किया इनकार

Edited by Amitabh Kumar
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BRS MLC K Kavitha

दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में गिरफ्तार बीआरएस नेता के कविता को सुप्रीम कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है.

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सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस नेता के. कविता को जमानत देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया है. ईडी ने दिल्ली आबकारी नीति घोटाला मामले में उन्हें पिछले दिनों गिरफ्तार किया था जिसके बाद वो जमानत के लिए शीर्ष कोर्ट पहुंचीं थीं. कोर्ट ने बीआरएस नेता कविता से जमानत के लिए निचली अदालत में जाने को कहा है.

के. कविता के द्वारा दायर अर्जी पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उसे सभी के लिए एक समान नीति का पालन करना होगा. किसी को भी जमानत के लिए सीधे शीर्ष कोर्ट में जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती क्योंकि यह एक राजनीतिक मामला है और के कविता एक राजनीतिक शख्सियत हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने ईडी से छह सप्ताह में जवाब मांगा

सुप्रीम कोर्ट ने बीआरएस नेता कविता की उस याचिका पर जांच एजेंसी ईडी से छह सप्ताह में जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने पीएमएलए के प्रावधानों को चुनौती दी है.

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हैदराबाद स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया गया था के कविता को

के कविता की बात करें तो वह तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव की बेटी के साथ-साथ, विधान परिषद सदस्य की सदस्य भी हैं. 46 साल की कविता को ईडी ने कुछ दिन पहले हैदराबाद स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया था. वह 23 मार्च तक जांच एजेंसी की हिरासत में हैं.

सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल ने क्या कहा

सुप्रीम कोर्ट में कविता की ओर से पैरवी वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल कर रहे थे. उन्होंने पीठ ने कहा कि सरकारी गवाह के बयान को आधार बनाकर लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. पीठ ने इसपर कहा कि इस वक्त वह मामले के गुण-दोषों पर विचार नहीं कर रही.

ईडी की ओर से क्या कहा गया

जांच एजेंसी ईडी की ओर से कहा गया है कि दिल्ली एक्साइज पॉलिसी में आम आदमी पार्टी को 100 करोड़ रुपये का लाभ दिया गया है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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