MP Election 2023 : गणेश सिंह के लिए कांग्रेस को सतना विधानसभा से हराना कितना मुश्किल ? जानें सीट का समीकरण
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 06 Oct 2023 9:38 AM
MP Election 2023 : सिद्धार्थ कुशवाहा को प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ का करीबी भी माना जाता है. कुशवाहा को टक्कर देने के लिए बीजेपी ने सतना से सांसद गणेश सिंह को चुनावी मैदान पर उतारा है. जानें सतना विधानसभा सीट का समीकरण
MP Election 2023 : मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तारीख के ऐलान से पहले बीजेपी ने उम्मीदवारों की तीन सूची जारी की है. दूसरी सूची जारी होने के बाद से प्रदेश की राजनीति गरम है. दरअसल, दूसरी लिस्ट में 7 सांसदों को विधानसभा का टिकट बीजेपी की ओर से दिया गया है, उन सांसदों में से एक नाम गणेश सिंह का भी है. गणेश सिंह को पार्टी ने रीवा संभाग में आने वाले सतना विधानसभा सीट से चुनावी रण में उतारा है. आपको बता दें कि यह सीट वर्तमान में कांग्रेस के कब्जे है. यहां से कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा विधायक हैं. पिछले विधानसभा चुनाव यानी साल 2018 में सिद्धार्थ कुशवाहा ने 3 बार के विधायक बीजेपी के शंकरलाल तिवारी को 12,558 वोटों से पराजित किया था. पिछली बार सतना में कुल 37 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. सिद्धार्थ कुशवाहा को कुल 60,105 वोट मिले थे, वहीं शंकर लाल तिवारी को 47,547 वोट प्राप्त हुए थे. 2018 के चुनाव में यहां तीसरे नंबर पर बीएसपी का उम्मीदवार रहा था.
2023 विधानसभा चुनाव को लिए फिलहाल कांग्रेस ने अपना प्रत्याशी नहीं उतारा, लेकिन अब देखना यह है कि कांग्रेस सिद्धार्थ कुशवाहा पर फिर से दांव लगाती है या किसी तगड़े उम्मीदवार को चुनावी मैदान में उतारती है. गौर हो कि सिद्धार्थ कुशवाहा को मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के कद्दावर नेता कमलनाथ का करीबी भी माना जाता है. साल 2020 में जब मध्य प्रदेश में सत्ता परिवर्तन देखने को मिला था, तो उस वक्त भी कई बार सिद्धार्थ कुशवाहा का नाम चर्चा में आया था. सिद्धार्थ कुशवाहा के भी पाला बदलने की अटकलें तेज थी. हालांकि उन्होंने कमलनाथ का साथ नहीं छोड़ा और कांग्रेस के साथ इस संकट की घड़ी में नजर आए.
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सिद्धार्थ कुशवाहा की बात करें तो उनके पिता सुखलाल कुशवाहा ने लोकसभा चुनाव में पूर्व सीएम अर्जुन सिंह को पराजित किया था. आइए एक नजर डालते हैं सतना विधानसभा सीट पर
कितने हैं मतदाता और क्या है सतना विधानसभा सीट का जातिगत समीकरण
चुनाव आयोग की ओर से 2018 में जारी किए आंकड़ों की बात करें तो, सतना विधानसभा में कुल 2.30 लाख से ज्यादा मतदाता थे. इसमें 1.22 लाख से ज्यादा पुरुष मतदाता जबकि 1.08 लाख से ज्यादा महिला मतदाता हैं. सतना जिले में क्षत्रिय, पटेल, वैश्य, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जन जाति और ब्राह्मण मतदाता निर्णायक स्थिति में नजर आते हैं.
सतना विधानसभा सीट का इतिहास जानें
-साल 2013, 2008 और 2003 में सतना विधानसभा सीट से बीजेपी के शंकरलाल तिवारी ने जीत दर्ज की थी.
-1998 में कांग्रेस के सईद अहमद में सतना विधानसभा सीट से जीत दर्ज की थी.
-1993 और 1990 में बीजेपी के बृंजेन्द्र पाठक ने सतना विधानसभा सीट से चुनाव जीता.
-इससे पहले 1985 और 1980 में सतना से कांग्रेस के लालता प्रसाद खरे चुनाव जीते थे जबकि 1977 में कांग्रेस के अरुण सिंह ने यहां से जीत दर्ज की थी.
-1972 में कांग्रेस के कांता चुनाव जीते थे.
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गणेश सिंह के सियासी सफर पर एक नजर
सांसद गणेश सिंह को बीजेपी ने इस बार सतना विधानसभा सीट से उतारा है. गणेश सिंह की बात करें तो वो सतना लोकसभा सीट से चार बार के सांसद हैं. गणेश विंध्य क्षेत्र में बीजेपी का बड़ा चेहरा बताये जाते हैं. गणेश सिंह 2004 में पहली बार बीजेपी के टिकट पर लोकसभा सदस्य चुने गए थे. जिस वक्त बीजेपी ने उन्हें लोकसभा का टिकट दिया था, वे सतना जिला पंचायत के अध्यक्ष के पद पर थे. इसके बाद गणेश सिंह ने लगातार 4 लोकसभा चुनाव जीते. गणेश सिंह इस बार पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने जा रहे हैं.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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