अनुकंपा पर नौकरी पाने में बेटियों को बराबर का हक, बिलासपुर हाई कोर्ट ने सुनाया फैसला, जानें अन्य राज्यों में क्या है नियम
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 15 Oct 2020 2:30 PM
विवाहित बेटियों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए या नहीं. लंबे समय से इसपर बहस छिड़ी है. कई राज्यों ने विवाहित बेटियों के लिए अनुकंपा के आधार पर नौकरी का रास्ता खोल दिया है
विवाहित बेटियों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिलनी चाहिए या नहीं. लंबे समय से इसपर बहस छिड़ी है. कई राज्यों ने विवाहित बेटियों के लिए अनुकंपा के आधार पर नौकरी का रास्ता खोल दिया है. लेकिन कई जगह अभी भी इसपर असमंजस है. ताजा मामला छत्तीसगढ़ का है, जहां बिलासपुर हाई कोर्ट ने कोल इंडिया को आदेश देते हुए कहा कि वो मृतक पिता की जगह पर उनकी विवाहिता बेटी को नौकरी दे. नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार महिला ने पिता की जगह नौकरी पाने के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी.
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय ने यह भी कहा है कि किसी भी महिला के साथ विवाहित और अविवाहित के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने सीधे तौर पर कहा कि बेटी विवाहित हो या अविवाहित वह पिता पर आश्रित होती है. और उसे भी अनुकंपा पर नौकरी पाने का समान अधिकार है.
विवाहित बेटियों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिले या नहीं मिले इस मुद्गदे पर कई राज्यों में पहले भी विवाद उठा है. और कई राज्यों की हाइकोर्ट ने ऐसे मामले में विवाहित बेटियों के पक्ष में फैसला सुनाया है. वहीं, कई राज्यों में इस संबंध में नियम भी बना दिए हैं. इसी कड़ी में मद्रास हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि विवाहित बेटी भी अनुकंपा के आधार पर नौकरी पाने की अधिकारी होती है. इसके लिए विवाहित बेटी को अपने भाई-बहनों की अनापत्ति प्रामण पत्र देना होगा.
वहीं, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भी 2015 में कहा था कि अनुकंपा के तहत बेटी के शादीशुदा होने के आधार पर नियुक्ति देने से इनकार नहीं किया जा सकता है. इसके साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मृतक आश्रित सेवा नियमावली 1974 के नियम 2(सी) (3) को असंवैधानिक घोषित करते हुए रद्द कर दिया. अदालत ने कहा कि विवाहित बेटी को नियुक्ति न देना लिंगभेद करना है क्योंकि पुत्र के विवाहित होने पर नियुक्ति में प्रतिबंध नहीं है.
वहीं, कोलकाता हाई कोर्ट ने 2017 में कहा था कि विवाहित बेटी को अनुकंपा पर नौकरी से वंचित कर देना असंवैधानिक है. हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी विवाहित बेटी की मां और उसके पिता को सरकारी नौकरी है और सेवा में रहते ही उनकी मौत हो जाती है तो बेटी को उनकी जगह अनुकंपा पर नौकरी पाने का अधिकार है. हां उसे ये दिखाना होगा किवो माता-पिता की कमाई पर ही आश्रित थी.
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का भी कहना है कि किसी मृत सरकारी कर्मचारी की विवाहिता बेटी को भी अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति पाने पूरा हक है.
Posted by : Pritish Sahay
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