RG Kar Hospital Case : आरजी कर केस में कोर्ट का बड़ा फैसला, संजय रॉय दोषी करार
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 18 Jan 2025 2:43 PM
आरजी कर मेडिकल कॉलेज
RG Kar Hospital Case : कोलकाता के आरजी कर मामले में कोर्ट ने शनिवार को फैसला सुनाया. इस मामले में कुल 60 दिनों तक सुनवाई हुई.
RG Kar Hospital Case : कोलकाता के एक कोर्ट ने आरजी कर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के मामले में आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया है. इस घटना के बाद देश भर के डॉक्टरों और अन्य लोगों ने बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन किया था. अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिरबन दास द्वारा मुकदमा शुरू होने के 57 दिन बाद फैसला सुनाया गया. बंद कमरे में सुनवाई 12 नवंबर को शुरू हुई थी. मामले में 50 गवाहों से पूछताछ की गई थी. सुनवाई 9 जनवरी को समाप्त हुई.
संजय रॉय को क्यों बनाया गया मुख्य आरोपी?
संजय रॉय मामले में मुख्य आरोपी है. वह एक सिविल वॉलंटियर था जो सिटी पुलिस के साथ मिलकर काम करता था. कोलकाता पुलिस ने उसे डॉक्टर का शव मिलने के एक दिन बाद 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था. पीड़ित के शव के पास मिले ब्लूटूथ इयरफोन के आधार पर पुलिस ने संजय रॉय को गिरफ्तार किया था. सीसीटीवी कैमरे में फुटेज में ब्लूटूथ इयरफोन को गले में लटकाए सेमिनार हॉल में प्रवेश करते संजय रॉय नजर आया था.
आरजी कर मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई
कलकत्ता हाई कोर्ट ने मामले को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया था. अपराध के तुरंत बाद पुलिस और राज्य सरकार के रवैये पर कड़ी टिप्पणी कोर्ट ने की थी. केंद्रीय एजेंसी ने मुख्य आरोपी के लिए मौत की सजा की मांग की है. सीबीआई ने मामले में कार्रवाई की. एजेंसी ने सबूत नष्ट करने के कथित प्रयासों के लिए आरजी कार के पूर्व प्रिंसिपल संदीप घोष और ताला पुलिस स्टेशन के अधिकारी अभिजीत मंडल को भी गिरफ्तार किया. घोष और मंडल को जमानत पर रिहा कर दिया गया, क्योंकि एजेंसी 90 दिनों से पहले उनके खिलाफ आरोपपत्र दर्ज करने में विफल रही.
डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद देशभर में विरोध प्रदर्शन
डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद देश भर में विरोध प्रदर्शन हुए. इससे ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों की सुरक्षा पर सवाल उठे और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय कानून की मांग की गई. विरोध प्रदर्शनों के कारण मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी सरकार और राज्य भर में प्रदर्शनकारी डॉक्टरों के बीच लंबे समय तक गतिरोध बना रहा.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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