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तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द करने और भूख से हुई मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

Updated at : 17 Mar 2021 5:36 PM (IST)
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तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द करने और भूख से हुई मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब

Ration Card Cancellation Supreme Court News : हम आधार कार्ड के मामले में सरकार से जवाब मांग रहे हैं. हम इस मामले पर सुनवाई करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है कि इन सवालों के जवाब दें. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने इस संबंध में बताया कि इस मामले में नोटिस पहले भी जारी किया था और जवाब भी आया जो रिकार्ड में है.

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राशन कार्ड को आधार से लिंक नहीं कराने पर करीब तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द हो गये. सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर मामला बताया है और केंद्र सरकार के साथ- साथ राज्य सरकारों से भी जवाब मांगा है. सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस एस ए बोबड़े, जस्टिस ए सी बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यन ने कहा, इसे विरोध के तौर पर नहीं देखना चाहिए. यह मामला बेहद गंभीर है.

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा 

हम आधार कार्ड के मामले में सरकार से जवाब मांग रहे हैं. हम इस मामले पर सुनवाई करेंगे. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है कि इन सवालों के जवाब दें. अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अमन लेखी ने इस संबंध में बताया कि इस मामले में नोटिस पहले भी जारी किया था और जवाब भी आया जो रिकार्ड में है.

झारखंड में हुई भूख से मौत से भी जुड़ा है मामला 
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जबकि वकील वकील गोंजाल्विस ने कहा, नोटिस मुख्य याचिका पर नहीं है बल्कि वैकल्पिक शिकायत को खत्म करने के लिए जारी किया गया था मामला मुख्य रूप से तीन करोड़ राशन कार्ड रद्द होना औऱ भूख से हुई मौत पर है. सुप्रीम कोर्ट में भूख से हुई मौत को लेकर याचिका दायर हुई जिसेमें संयुक्त याचिकाकर्ता संतोषी की बहन गुड़िया देवी भी शामिल हैं. झारखंड में 11 साल की इस बच्ची की मौत हो गयी थी.

इस याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड से राशन कार्ड लिंक नहीं होने की वजह से उनका राशन कार्ड रद्द कर दिया गया था. इस वजह से उन्हें मार्च 2017 से ही राशन मिलना बंद हो गया था. उनकी बेटी संतोषी की भोजन ना मिलने की वजह से मौत हो गयी.

वकील ने कहा, मामले का दायरा बढ़ा दिया 
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इस मामले में वकील कोलिन गोंजाल्विस ने बताया कि यह मामला किसी एक राज्य का नहीं है. बाम्बे हाईकोर्ट में भी मेरे साथ यही समस्या आयी थी. मुझे लगता था इसे संबधित हाईकोर्ट में दायर किया जाना चाहिए. पीठ ने वकील से कहा कि उन्होंने मामले का दायरा बढ़ा दिया है.

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