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EXCLUSIVE: एनजीटी ने जिसे बैन किया, उसी रैट होल माइनिंग ने दिया 41 श्रमिकों को जीवनदान, जानें इसकी डिटेल

Updated at : 29 Nov 2023 3:28 PM (IST)
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EXCLUSIVE: एनजीटी ने जिसे बैन किया, उसी रैट होल माइनिंग ने दिया 41 श्रमिकों को जीवनदान, जानें इसकी डिटेल

कोल इंडिया के सीसीएल में काम कर चुके वीके जायसवाल ने कोयला खनन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के बारे में भी बताया. उन्होंने बताया कि तीन तरीके से माइनिंग होती है- वर्टिकल, इन्क्लाइंड और क्यूबिकल.

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भारत में जिस रैट होल माइनिंग को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने करीब नौ साल पहले बैन कर दिया, उसी तकनीक ने उत्तराखंड के उत्तरकाशी में हुए टनल हादसे में फंसे 41 श्रमिकों की जिंदगी बचाई. माइनिंग की इस तकनीक के बारे में प्रभात खबर (prabhatkhabar.com) की टीम ने सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड के रिटायर्ड इंजीनियर विजय कुमार जायसवाल से बातचीत की. इंजीनियर ने उत्तरकाशी के सिल्कियारा में 17 दिन तक चले ऑपरेशन के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका से मंगाए गए ऑगर ड्रिलिंग मशीन से लोगों को काफी उम्मीदें थीं. टनल के मलबे के दूसरी ओर फंसे श्रमिकों तक इंजीनियर पहुंचने ही वाले थे कि बीच में चट्टानों में सरिया का गुच्छा मिल गया, जिसकी वजह से मशीन के पंखे ही टूट गए. दोबारा मशीन को चलाया गया, लेकिन वह भी कारगर साबित नहीं हुआ. विजय कुमार जायसवाल ने बताया कि रेस्क्यू टीम एक साथ कई विकल्प पर काम कर रही थी. जब ऑगर ड्रिलिंग मशीन और अमेरिकी एक्सपर्ट को लोगों को बाहर निकालने में सफलता नहीं मिली, तो वर्टिकल ड्रिलिंग भी शुरू कर दी गई. इसी बीच, वहां मौजूद एक्सपर्ट्स की टीम में से किसी इंजीनियर को रैट माइनिंग का आइडिया आया. भारत की इसी तकनीक ने काम किया और टनल में फंसे सभी 41 श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सका.

अत्याधुनिक तकनीक फेल, तब काम आई रैट माइनिंग

कोल इंडिया के सीसीएल में काम कर चुके वीके जायसवाल ने कोयला खनन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक के बारे में भी बताया. उन्होंने बताया कि तीन तरीके से माइनिंग होती है- वर्टिकल, इन्क्लाइंड और क्यूबिकल. कोयला निकालने के मामले में वर्टिकल और क्यूबिकल माइनिंग काफी सफल है, लेकिन अगर बात किसी राहत अभियान की हो, तो इसमें इन्क्लाइंड माइनिंग, जिसे रैट माइनिंग भी कहा जाता है, ही सबसे उपयुक्त है. उन्होंने कहा कि तमाम अत्याधुनिक मशीन जब मजदूरों को सुरक्षित निकालने में फेल हो गए, तब भारतीय तकनीक ही काम आई. उन्होंने कहा कि यह बहुत बड़ी सफलता है. इतने लोगों की जिंदगी बचाने के लिए भारत के इंजीनियरों ने जो कर दिखाया है, वह काबिल-ए-तारीफ है.

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2014 में रैट माइनिंग पर एनजीटी ने लगाया था प्रतिबंध

बता दें कि वर्ष 2014 में एनजीटी ने रैट माइनिंग पर प्रतिबंध लगा दिया था. एनजीटी का कहना था कि यह पर्यावरण के लिए बेहद नुकसानदायक है. साथ ही इंसान की जिंदगी को भी खतरे में डालता है. इसलिए इसलिए इस तकनीक से कोयला खनन पर रोक लग गई. बता दें कि पूर्वोत्तर के राज्यों में रैट माइनिंग काफी लोकप्रिय है. इसमें खर्च काफी कम आता है. इस तरीके में खनन श्रमिक जमीन खोदते हुए आगे बढ़ते जाते हैं और मिट्टी और अन्य मलबे को पीछे की ओर फेंकते जाते हैं.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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