क्या होगा राजस्थान का? कांग्रेस में पड़ी फूट, पहले भी हो चुका है गहलोत-पायलट के बीच टकराव, जानें समीकरण

Rajasthan political crisis: दिसंबर 2018 में कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के ठीक बाद मुख्यमंत्री पद के लिए गहलोत और पायलट का टकराव हुआ था. पार्टी आलाकमान ने गहलोत को तीसरी बार मुख्यमंत्री चुना, जबकि पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया.
Rajasthan political crisis: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद सचिन पायलट को मुख्यमंत्री बनाये जाने के हाइकमान के संभावित फैसले पर बवाल खड़ा हो गया है. गहलोत समर्थकों ने साफ कर दिया कि विधायकों की राय के बिना सीएम का फैसला नहीं होना चाहिए. इस मुद्दे को लेकर गहलोत समर्थक करीब 90 विधायकों ने रविवार रात को सियासी ड्रामेबाजी के बीच विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी को इस्तीफे सौंप दिये. इनमें निर्दलीय विधायक भी शामिल हैं.
इससे पहले, विधायकों के समूह ने मंत्री शांति धारीवाल के आवास पर एक बैठक की, जिसे सचिन पायलट के अगले मुख्यमंत्री बनने की संभावना को विफल करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है. बताया जा रहा है कि विधायकों को इसमें एक प्रस्ताव पास करने को कहा जाने वाला था कि नये मुख्यमंत्री के चुनाव के लिए हाइकमान को अधिकृत किया जाता है. गहलोत गुट को इस बात की आशंका थी कि हाइकमान सचिन पायलट को सत्ता सौंपने जा रही है. बैठक में शामिल होने के लिए सचिन पायलट, अजय माकन, मल्लिकार्जुन खड़गे और अशोक गहलोत मौजूद थे.
सरकार के साथ
कांग्रेस 108
निर्दलीय 13
रालोद 01
माकपा 02
भारतीय ट्राइबल पार्टी 02
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भाजपा 71
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी 03
कुल 74
-बहुमत के लिए चाहिए 100 विधायकों का समर्थन
भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने रविवार रात कहा कि राज्य में मौजूदा राजनीतिक हालात राष्ट्रपति शासन की ओर इशारा कर रहे हैं. राठौड़ ने ट्वीट किया, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी, आप नाटक क्यों कर रहे हों. मंत्रिमंडल के इस्तीफे के बाद अब देरी कैसी. आप भी इस्तीफा दे दीजिए.
गहलोत सरकार में मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि भाजपा राज्य की कांग्रेस सरकार को गिराना चाहती है. कहा कि कांग्रेस के विधायकों के पार्टी के विधायक दल की बैठक में शामिल न होकर विधानसभा अध्यक्ष डॉ सीपी जोशी के आवास पहुंचने को आलाकमान के प्रति विद्रोह के रूप में नहीं देखा जाये, बल्कि यह हमारे परिवार की बात है.
दिसंबर 2018 में कांग्रेस के विधानसभा चुनाव जीतने के ठीक बाद मुख्यमंत्री पद के लिए गहलोत और पायलट का टकराव हुआ था. पार्टी आलाकमान ने गहलोत को तीसरी बार मुख्यमंत्री चुना, जबकि पायलट को उपमुख्यमंत्री बनाया गया. जुलाई 2020 में, पायलट ने 18 पार्टी विधायकों के साथ गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ बगावत कर दी थी. तब से पायलट गहलोत गुट को खटकते रहे हैं. गहलोत समर्थक नेताओं का कहना है कि गहलोत अनुभवी नेता हैं और वे सबको साथ लेकर चलते हैं.
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