छिन जाएगी 'आप' सांसद राघव चड्डा की सदस्यता ? संजय सिंह ने कहा- अमित शाह पीछे पड़ गये हैं

**EDS: VIDEO GRAB VIA SANSAD TV** New Delhi: AAP MP Raghav Chadha participates in a debate on Government of National Capital Territory of Delhi(Amendment) Bill, 2023, in the Rajya Sabha during the Monsoon session of Parliament, in New Delhi, Monday, Aug. 7, 2023. (PTI Photo)(PTI08_07_2023_000203A)
गृह मंत्री अमित शाह ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया और कहा कि सदन के दो सदस्य कह रहे हैं कि उनके नाम उनकी सहमति के बिना प्रस्ताव में डाले गये और प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर नहीं है. जानें राघव चड्डा क्यों घिर गये सदन में
आम आदमी पार्टी (आप) के सांसद राघव चड्ढा को लेकर चर्चा जोरों पर है. ऐसे कयास लगाये जा रहे हैं कि उनकी राज्यसभा सदस्यता जा सकती है. इस बीच आप सांसद संजय सिंह का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि देश के गृह मंत्री अमित शाह राघव चड्ढा के पीछे पड़ गये हैं. जैसे झूठे और बेबुनियाद मामले के जरिए राहुल गांधी की सदस्यता छीन ली गयी वैसे ही वे राघव की सदस्यता छीनना चाहते हैं. वे बहुत खतरनाक लोग हैं. वे कुछ भी कर सकते हैं लेकिन हम आम आदमी के सिपाही हैं. हम उनसे नहीं डरते, हम उनसे लड़ते हैं और लड़ते रहेंगे. यदि राघव की सदस्यता छीनी गयी तो वह निर्वाचित होकर वापस आएंगे और उनके खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.
क्या है मामला
राज्यसभा में सोमवार को ‘दिल्ली राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र शासन संशोधन विधेयक 2023’ को प्रवर समिति के पास भेजे जाने संबंधी आप सदस्य राघव चड्ढा के प्रस्ताव को लेकर सत्ता पक्ष के पांच सदस्यों ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि उनकी सहमति के बिना प्रस्ताव में उनके नाम डाले गये और इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजा जाए. सदन में जब विधेयक पर चर्चा पूरी हो गयी तब उपसभापति हरिवंश ने इसे पारित करवाने के क्रम में विपक्षी सदस्यों द्वारा लाए गये संशोधनों को रखवाना शुरू किया. इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के राघव चड्ढा का प्रस्ताव आया जिन्होंने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने का प्रस्ताव था और इसमें समिति के सदस्यों के नाम भी थे.
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इस बीच गृह मंत्री अमित शाह ने व्यवस्था का प्रश्न उठाया और कहा कि सदन के दो सदस्य कह रहे हैं कि उनके नाम उनकी सहमति के बिना प्रस्ताव में डाले गये और प्रस्ताव पर उनके हस्ताक्षर नहीं है. शाह ने कहा कि यह जांच का विषय है. यह मामला अब सिर्फ दिल्ली में फर्जीपने का नहीं है. यह सदन के अंदर फर्जीपने का मामला है. उन्होंने दोनों सदस्यों के बयान दर्ज करवा कर इस मामले की जांच करवाने के लिए कहा जिसके बाद से मामला गरम है.
Also Read: Delhi Services Bill : ‘मामला अब सिर्फ दिल्ली में फर्जीपने का नहीं’, जानें क्यों भड़के अमित शाहबीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने क्या कहा
बीजू जनता दल के सस्मित पात्रा ने कहा कि प्रवर समिति में उनका नाम रखने के लिए उनसे सम्मति नहीं ली गयी थी. उन्होंने कहा कि यह विशेषाधिकार हनन का मामला है. इस पर उपसभापति हरिवंश ने कहा कि चार-पांच सदस्यों ने कहा है कि उन्होंने समिति में अपना नाम नहीं भेजा है और इसकी जांच करवाई जाएगी. अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरई ने भी कहा कि उन्होंने भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं. गृह मंत्री शाह ने इस मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजे जाने की फिर मांग की.
#WATCH देश के गृह मंत्री अमित शाह राघव चड्ढा के पीछे पड़ गए हैं। जैसे झूठे और बेबुनियाद मामले के जरिए राहुल गांधी की सदस्यता छीन ली गई वैसे ही वे राघव की सदस्यता छीनना चाहते हैं। वे बहुत खतरनाक लोग हैं। वे कुछ भी कर सकते हैं लेकिन हम आम आदमी के सिपाही हैं। हम उनसे नहीं डरते, हम… pic.twitter.com/KKNRECGbmO
— ANI_HindiNews (@AHindinews) August 8, 2023
दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा में भी पास
लोकसभा के बाद दिल्ली सेवा बिल राज्यसभा में भी पास हो गया. तीखी बहस के बाद उच्च सदन ने सोमवार को इस बिल पर मुहर लगा दी. ऑटोमैटिक वोटिंग मशीन खराब होने के कारण पर्ची से वोटिंग करायी गयी. पक्ष में 131 और विपक्ष में 102 वोट डले. बिल अब राष्ट्रपति से मंजूरी के लिए जायेगा, उसके बाद कानून बन जायेगा.

राघव चड्ढा ने राज्यसभा में केंद्र को जमकर कोसा
दिल्ली सेवा बिल पर राघव चड्ढा ने राज्यसभा में केंद्र को जमकर कोसा. उन्होंने कहा कि यह बीजेपी के वाजपेयी और आडवाणी के नीतियों का खिलाफ है. बीजेपी काफी समय से दिल्ली को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग करती रही है. आप सांसद चड्ढा ने आगे कहा कि अगर आज बीजेपी दिल्ली सेवा बिल को केंद्र के पक्ष में पास करवाना चाहती है तो यह पूर्व पीएम वाजपेयी जी के साथ-साथ संघर्ष करने वाले सभी बीजेपी नेताओं का भी अपमान है.
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क्या है इस बिल में
यह बिल राजधानी दिल्ली में अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़ा है. इस बिल के कानून बनने के बाद अफसरों की ट्रांसफर और पोस्टिंग से जुड़े फैसले लेने का अधिकार उपराज्यपाल को मिल जायेगा. यह इसी साल मई में लाये गये अध्यादेश की जगह लेगा.
भाषा इनपुट के साथ
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By Amitabh Kumar
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