आखिर क्यों 102 दिन बाद भी 26 साल के आकाश का अंतिम संस्कार करने के लिए परिवार नहीं हुआ राजी?

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आकाश का परिवार

Police Custody Death : 6 मार्च को गिरफ्तारी के बाद 8 मार्च को आर आकाश डेलिसन की तमिलनाडु के एक अस्पताल में हुई. उसके परिवार वालों का आरोप है कि आकाश की मौत पुलिस हिरासत में दी गई यातना की वजह से हुई. परिवार वालों ने मॉर्चरी के बाहर धरना दिया, जिसके दबाव में आरोपी पुलिस वालों को सस्पेंड किया गया, लेकिन परिवार वाले इससे नाखुश थे, बावजूद इसके उनका धरना बिना किसी नतीजे के समाप्त हो गया.

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Police Custody Death : तमिलनाडु के मानमदुरै के रहने वाले वाले आर आकाश डेलिसन का अंतिम संस्कार 17 जुलाई को कोर्ट के आदेश पर सरकारी अधिकारियों ने कर दिया. उसके परिवार वाले उसकी मौत के 102 दिन बाद भी उसके अंतिम संस्कार के लिए राजी नहीं थे. उनका कहना था कि पुलिस कस्टडी में उसके साथ इतना अमानवीय व्यवहार हुआ कि उसकी मौत हो गई.

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आकाश का शव एक सरकारी अस्पताल की मॉर्चरी में रखा हुआ था. उसके परिवार वालों का कहना था कि उन्होंने उसके शव का अंतिम संस्कार इसलिए नहीं किया, क्योंकि वे उसे सबूत के तौर पर रखना चाहते थे. कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि शव को अनिश्चितकाल के लिए मॉर्चरी में नहीं रखा जा सकता. कोर्ट का आदेश 16 जुलाई को सामने आया, उसके बाद 17 को आकाश का अंतिम संस्कार हुआ.

6 मार्च को हुई थी आकाश की गिरफ्तारी

आकाश की गिरफ्तारी 6 मार्च को हुई थी. उसपर हत्या की कोशिश का आरोप था. पुलिस का कहना था कि उसने हिरासत से भागने की कोशिश की और एक पुल से छलांग लगाने के दौरान उसे गंभीर रूप से चोट लग गई, जिसकी वजह से उसकी मौत हो गई. हालांकि परिवार वालों का यह कहना है कि उसे पुलिस हिरासत में इतनी यातना दी गई की उसकी मौत हुई. आकाश ने अस्पताल में अपनी मौत से पहले एक ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के सामने यह बयान दिया था उसके साथ पुलिस हिरासत में अमानवीय व्यवहार हुआ और बुरी तरह से उसकी पिटाई हुई थी.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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