Piyush Goyal in WTO: डब्ल्यूटीओ में बोले पीयूष गोयल, विकासशील-विकसित देशों के बीच विषमता अभी नहीं हुई कम

Piyush Goyal in WTO: वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि डब्ल्यूटीओ के सभी समझौतों में विशेष तथा अलग व्यवहार का प्रावधान विकासशील देशों का अधिकार है और यह बातचीत से परे है.
Piyush Goyal in WTO: विश्व व्यापार संगठन की बैठक में भारतीय प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई कर रहे वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बुधवार को कहा कि डब्ल्यूटीओ (WTO) के सभी समझौतों में विशेष तथा अलग व्यवहार का प्रावधान विकासशील देशों का अधिकार है और यह बातचीत से परे है. पीयूष गोयल ने कहा कि यह व्यवस्था बनी रहनी चाहिए.
न्यूज एजेंसी भाषा की रिपोर्ट के मुताबिक, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि विकासशील और विकसित देशों के बीच विषमता अभी कम नहीं हुई है, बल्कि सचाई यह है कि कुछ मामलों में अंतर बढ़ा है. इसको देखते हुए विशेष और अलग व्यवहार की व्यवस्था प्रासंगिक बनी हुई है. पीयूष गोयल ने डब्ल्यूटीओ सुधार पर एक सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि विशेष और अलग व्यवहार (S&DT) समझौतों से जुड़ा है. यह बातचीत से परे है और सभी विकासशील देशों का अधिकार है.
पीयूष गोयल ने कहा कि विश्व व्यापार संगठन में प्रस्तावित सुधारों के तहत विकसित देश कह रहे हैं कि विकासशील देश विश्व व्यापार संगठन में स्व-घोषित विकास की स्थिति के नाम पर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं. दूसरी तरफ, भारत समेत विकासशील देश विशेष और अलग व्यवहार बरकरार रखने की मांग कर रहे हैं. एस एंड डीटी व्यवस्था के तहत विकासशील और गरीब देशों को कुछ लाभ मिलते हैं. इसमें समझौतों और बाध्यकारी प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिये लंबा समय मिलता है. साथ ही उनके लिये व्यापार के अवसर बढ़ाने के लिये उपाय होते हैं. फिलहाल डब्ल्यूटीओ सदस्य स्वयं को विकासशील देश मनोनीत कर सकते हैं और ये लाभ ले सकते हैं. कुछ विकसित देशों का कहना है कि स्व-घोषणा की व्यवस्था बातचीत के विफल होने का एक कारण है और यह संस्था को अप्रासंगिक भी बनाने का रास्ता है.
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने विश्व व्यापार संगठन के विवाद निपटान व्यवस्था के अपीलीय निकाय के सुचारू कामकाज को फिर से शुरू करने पर भी जोर दिया. अपीलीय निकाय सात लोगों की स्थायी समिति है. यह डब्ल्यूटीओ सदस्यों की शिकायतों के मामले में समितियों की तरफ से जारी रिपोर्ट पर अपील की सुनवाई करती है. फिलहाल अपीलीय निकाय में पद खाली पड़े हैं. इसीलिए आवेदनों पर विचार नहीं किया जा रहा है. अपीलीय निकाय के अंतिम सदस्य का कार्यकाल 30 नवंबर, 2020 को समाप्त हुआ. विकसित देशों ने इस निकाय के कामकाज के मुद्दों को भी उठाया है और इसमें सुधार की मांग कर रहे हैं.
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