मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक से विपक्ष का वॉकआउट, NCPI को बुलाए जाने पर आपत्ति

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महुआ मोइत्रा के साथ महुआ माझी

महुआ मोइत्रा (बाएं) के साथ महुआ माजी (दाएं)

संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक एक दिन पहले रविवार को दिल्ली में राजनीतिक घमासान देखने को मिला. केंद्र सरकार द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनटों के भीतर विपक्षी दलों ने एकजुट होकर बैठक का बहिष्कार कर दिया और बाहर निकल गए.

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All Party Meeting Walkout : संसद के बेहद महत्वपूर्ण मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक एक दिन पहले रविवार को सभी दलों की एक बैठक (ऑल पार्टी मीटिंग) बुलाई गई थी. केंद्र सरकार की ओर से बुलाई गई इस बैठक के शुरू होते ही विपक्ष ने एकजुट होकर मीटिंग से वॉकआउट कर दिया. विपक्ष द्वारा मीटिंग का बहिष्कार करने के बाद सरकार और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है.

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​सरकार द्वारा बुलाई गई इस बैठक में भाग लेने के लिए कई प्रमुख विपक्षी दलों के बड़े नेता पहुंचे थे. लेकिन जैसे ही बैठक की कार्यवाही शुरू हुई, सरकार और विपक्ष के बीच कुछ जरूरी मुद्दों को लेकर गंभीर मतभेद सामने आ गए. इन मतभेदों के चलते बातचीत आगे बढ़ने से पहले ही विपक्षी नेताओं ने एक साथ बैठक से बाहर निकलने (वॉकआउट करने) का सामूहिक फैसला ले लिया. इस अचानक उठाए गए कदम ने सरकार के साथ विपक्ष के कड़े राजनीतिक मुकाबले को और ज्यादा तेज कर दिया है.

एनसीपीआई को बुलाने पर विपक्ष ने जताई आपत्ति

सर्वदलीय बैठक में NCPI को बुलाए जाने पर विपक्ष ने कड़ा विरोध जताया. इससे कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, जेएमएम, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत पूरे विपक्ष ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट किया. टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि जिन 20 सांसदों को एनसीपीआई के नाम पर बैठक में बुलाया गया, उनके विलय को अब तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं. उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसी स्थिति में संसदीय कार्य मंत्री ने उन्हें किस आधार पर बैठक का निमंत्रण दिया. महुआ ने कहा कि विपक्ष ने इस पर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है और इसी के प्रतीक के तौर पर सर्वदलीय बैठक से वॉकआउट किया.

टीएमसी सांसद काकोली घोष का दावा

लोकसभा सांसद काकोली घोष दस्तिदार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों का एनसीपीआई में विलय हो चुका है. उन्होंने दावा किया कि लोकसभा अध्यक्ष ने इस विलय को स्वीकार कर लिया है और सदन में एनसीपीआई के सांसदों के लिए अलग बैठने की व्यवस्था भी की जाएगी. उनके इस बयान से सर्वदलीय बैठक में एनसीपीआई की मौजूदगी को लेकर जारी विवाद और तेज हो गया है.

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क्या था मीटिंग का एजेंडा?

केंद्र सरकार ने संसद सत्र के दौरान होने वाले संसद के कामकाज और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाई थी. हालांकि, बैठक शुरू होने के कुछ ही मिनटों बाद विपक्षी दलों के वॉकआउट करने से बैठक का मूल एजेंडा पीछे छूट गया और एनसीपीआई को आमंत्रित किए जाने का विवाद चर्चा का केंद्र बन गया.



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आलोक पाठक

लेखक के बारे में

By आलोक पाठक

आलोक पाठक वर्ष 2019 से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। अपने पत्रकारिता सफर के दौरान वे खबर मंत्र, गांडीव और नक्षत्र न्यूज़ जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं। वर्तमान में वे प्रभात खबर के डिजिटल विभाग में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। हिंदी भाषा और लेखन के प्रति उनका विशेष लगाव है। उन्हें भू-राजनीति (Geopolitics) और राष्ट्रीय राजनीति से जुड़े विषयों पर लिखना पसंद है। निजी जीवन में कहानियां और कविताएं लिखना तथा कालजयी साहित्य का अध्ययन उनकी प्रमुख रुचियों में शामिल है। उनका प्रयास तथ्यों पर आधारित, सरल और प्रभावी लेखन के माध्यम से पाठकों तक सार्थक जानकारी पहुंचाना है।

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