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Explained: ईडी के रडार पर लीडर - सोनिया गांधी से संजय राउत तक से पूछताछ, इन नेताओं पर कसा शिकंजा

Updated at : 28 Jul 2022 2:05 PM (IST)
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Explained: ईडी के रडार पर लीडर - सोनिया गांधी से संजय राउत तक से पूछताछ, इन नेताओं पर कसा शिकंजा

कांग्रेस में चाहे वह सोनिया या राहुल गांधी हों या फिर कार्ति और पी चिदंबरम, शिवसेना सांसद संजय राउत हों या एनसीपी के अजित पवार, अनिल देशमुख या नवाब मलिक. इन सब पर ईडी ने पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर पूछताछ की, छापे मारे और हिरासत में लेकर जांच की.

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नई दिल्ली : भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कार्रवाई करने वाली जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के रडार पर पूरा विपक्ष और भ्रष्टाचारी सरकारी अधिकारी है और कर्मचारी हैं. ईडी ने विपक्ष के कई नेताओं पर अपना शिकंजा कसकर उनसे पूछताछ की, तो कई नेताओं से पूछताछ जारी है. कांग्रेस में चाहे वह सोनिया या राहुल गांधी हों या फिर कार्ति और पी चिदंबरम, शिवसेना सांसद संजय राउत हों या राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के अजित पवार, अनिल देशमुख या नवाब मलिक. इन सब पर ईडी ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत मामला दर्ज कर पूछताछ की, छापे मारे और हिरासत में लेकर जांच की. आइए, जानते हैं कि रडार पर रहने वाले विपक्ष के किन-किन नेताओं पर ईडी ने शिकंजा कसा और किन-किन से पूछताछ जारी है.

नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया-राहुल गांधी : कांग्रेस

नेशनल हेराल्ड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी से अब तक तीन दिनों तक पूछताछ कर चुका है. इससे पहले उसने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी से इसी मामले में पूछताछ की जा चुकी है. एजेंसी के अनुसार, यंग इंडियन प्राइवेट लिमिटेड ने कांग्रेस को 1 करोड़ रुपये में से केवल 50 लाख रुपये का भुगतान किया था, जो कि डोटेक्स मर्चेंडाइज प्राइवेट लिमिटेड से था. ईडी को संदेह है कि यह कोलकाता की एक सेल कंपनी है. सोनिया और राहुल गांधी फिलहाल जमानत पर बाहर हैं. दिल्ली की एक अदालत ने उनके खिलाफ आरोपों का संज्ञान लिया था और आयकर आकलन रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर आईपीसी की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत अपराधों के लिए मुकदमा चलाने का आदेश दिया था.

कार्ति चिदंबरम : कांग्रेस सांसद

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, ईडी ने कांग्रेस के सांसद और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम पर भी शिकंजा कस चुका है. तलवंडी साबो पावर लिमिटेड परियोजना रिश्वत मामले में ईडी ने कार्ति चिदंबरम से घंटों पूछताछ कर चुका है. आरोप है कि कार्ति चिदंबरम ने तवलंडी साबो पावर परियोजना के लिए 50 लाख रुपये की रिश्वत के लिए चीनी श्रमिकों को वीजा की सुविधा देने में उनकी कथित संलिप्तता थी, जिसे लेकर ईडी जांच कर रहा था. यह आरोप लगाया गया है कि यूपीए सरकार के तहत गृह मंत्रालय ने 2011 में कार्ति चिदंबरम की रिश्वत के बदले चीनी नागरिकों के लिए कथित रूप से अवैध वीजा को मंजूरी दे दी थी. कार्ति के पिता पी चिदंबरम उस समय गृह मंत्री थे. कार्ति ने इस मामले में गिरफ्तारी से सुरक्षा के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जिसका ईडी ने विरोध किया था.

डीके शिवकुमार-पी चिदंबरम : कांग्रेस

इतना ही नहीं, ईडी ने आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल मैक्सिस मामले में यूपीए सरकार में गृह मंत्री और वित्त मंत्री का पद संभाल चुके पी चिदंबरम पर भी अपना शिकंजा कसने में देर नहीं की. आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल मैक्सिस मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम की ईडी अब भी जांच कर रहा है. ईडी ने इससे पहले आईएनएक्स मीडिया मामले में पी चिदंबरम को गिरफ्तार किया था. वहीं, कर्नाटक कांग्रेस प्रमुख डीके शिवकुमार भी मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में ईडी के रडार पर हैं. डीके शिवकुमार को ईडी ने इस मामले में 2019 में कई दौर की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था. फिलहाल, वह जमानत पर बाहर हैं. मामला कथित कर चोरी और हवाला सौदे के आरोप में बेंगलुरु की एक अदालत में शिवकुमार और अन्य के खिलाफ दायर एक पूर्व आयकर विभाग के आरोपपत्र पर आधारित है.

अजित पवार, अनिल देशमुख और नवाब मलिक : एनसीपी

सीबीआई द्वारा भ्रष्टाचार और आधिकारिक पद के दुरुपयोग के आरोप में अनिल देशमुख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद ईडी ने महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री देशमुख और उनके सहयोगियों के खिलाफ जांच शुरू की. ईडी ने नवंबर 2021 में उन्हें गिरफ्तार किया था और अभी वह न्यायिक हिरासत में हैं. इसके बाद सीबीआई ने भ्रष्टाचार के एक मामले में उनको इस साल अप्रैल में उन्हें गिरफ्तार किया था. वह इस मामले में भी न्यायिक हिरासत में हैं. इसके बाद ईडी ने अंडरवर्ल्ड के डॉन दाऊद इब्राहीम और उसके साथियों की गतिविधियों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में 23 फरवरी को पीएमएलए के तहत नवाब मलिक को गिरफ्तार किया. वह अभी न्यायिक हिरासत में हैं. एनसीपी के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री अजीत पवार अपने परिवार के सदस्यों से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी की जांच के घेरे में हैं। ईडी ने आरोप लगाया है कि कई बेनामी संपत्तियों में अवैध धन का इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें हाल ही में कुर्क किया गया था.

संजय राउत-अनिल परब : शिवसेना

इसके अलावा, ईडी ने हाल ही में महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री और शिवसेना नेता अनिल परब के खिलाफ मामला दर्ज किया. ईडी ने अनिल परब के दो आवासों सहित सात ठिकानों पर छापेमारी भी की. परब द्वारा तटीय नियामक क्षेत्र (सीआरजेड) नियमों के उल्लंघन में रत्नागिरी के दापोली में बनाए गए एक रिसॉर्ट के संबंध में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला दर्ज किया गया. इसके साथ ही, शिवसेना सांसद संजय राउत और उनकी पत्नी मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में ईडी के रडार पर हैं. जांच एजेंसी मुंबई के गोरेगांव उपनगर – पात्रा चॉल घोटाला में एक पुनर्विकास परियोजना में कथित अनियमितताओं के मामले की जांच कर रही है. ईडी इनसे भी कई घंटों तक पूछताछ कर चुकी है. ईडी के अनुसार, 2010 में अपराध की आय का एक हिस्सा (83 लाख रुपये) संजय राउत की पत्नी वर्षा राउत को प्रवीण राउत की पत्नी माधुरी प्रवीण राउत से प्राप्त हुआ था. इस राशि का कथित तौर पर वर्षा राउत ने दादर में एक फ्लैट खरीदने के लिए उपयोग किया था. ईडी की जांच शुरू होने के बाद वर्षा राउत ने माधुरी राउत को 55 लाख रुपये ट्रांसफर किये.

अभिषेक बनर्जी-पार्थ चटर्जी : टीएमसी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी अपनी पत्नी रुजीरा बनर्जी के साथ कथित कोयला तस्करी मामले में ईडी की जांच के घेरे में हैं. इस मामले में जहां अभिषेक बनर्जी से ईडी दो बार पूछताछ कर चुकी है. इसके अलावा, शिक्षक भर्ती घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल के मंत्री पार्थ चटर्जी इस समय ईडी की हिरासत में हैं. इस मामले में ईडी पार्थ चटर्जी की करीबी अर्पिता मुखर्जी के ठिकानों पर छापेमारी करके अब तक करीब 50 करोड़ रुपये से अधिक की रकम जब्त की है.

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फारूक अब्दुल्ला : नेशनल कॉन्फ्रेंस

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ईडी के निशाने पर हैं. यह मामला जम्मू-कश्मीर क्रिकेट संघ (जेकेसीए) में 43 करोड़ रुपये की कथित अनियमितता से जुड़ा है. जब कथित अपराध हुआ था, तब फारूक अब्दुल्ला जेकेसीए के अध्यक्ष के पद पर आसीन थे. इस मामले में ईडी उनसे भी पूछताछ कर रहा है.

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