अमृतपाल सिंह के 5 साथियों पर NSA लगाया गया, ‘वारिस पंजाब दे’ के हैं सदस्य, जानें एक्ट की बड़ी बातें

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अमृतपाल सिंह के 5 साथियों पर NSA लगाया गया, ‘वारिस पंजाब दे’ के हैं सदस्य, जानें एक्ट की बड़ी बातें

अमृतपाल सिंह के पास आय से अधिक संपत्ति होने की जानकारी मिली है और यह सूचना भी है कि उसे विदेश से फंडिंग मिलती थी.

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अमृतपाल सिंह के पांच साथियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगाया गया है. यह जानकारी पंजाब पुलिस के आईजी सुखचैन सिंह गिल ने मीडिया को दी. उन्होंने बताया कि ये पांचों ‘वारिस पंजाब दे’ के सदस्य हैं. आईजी ने बताया कि अमृतपाल सिंह अभी भी फरार चल रहा है .

विदेश से फंडिंग का शक

उन्होंने बताया कि अमृतपाल सिंह के पास आय से अधिक संपत्ति होने की जानकारी मिली है और यह सूचना भी है कि उसे विदेश से फंडिंग मिलती थी. उन्होंने बताया कि पंजाब में स्थिति शांतिपूर्ण है. पंजाब पुलिस ने सिर्फ ‘वारिस पंजाब दे’ के कुछ तत्वों के खिलाफ विशेष कार्रवाई की, जिनके खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं.

हिरासत में लिये गये लोगों को डिब्रूगढ़ भेजा गया

आईजी ने बताया कि हिरासत में लिये गये चार लोगों दलजीत कलसी, बसंत सिंह, गुरमीत सिंह और भगवंत सिंह को असम के डिब्रूगढ़ भेज दिया गया है. एक और व्यक्ति जिन्हें हिरासत में लिया गया है वे अमृतपाल सिंह के चाचा हैं जो अभी डिब्रूगढ़ के रास्ते में हैं.

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अमृतपाल सिंह की नहीं हुई है गिरफ्तारी

आईजी सुखचैन सिंह गिल ने बताया कि अमृतपाल सिंह की गिरफ्तारी अबतक नहीं हुई है. उसे गिरफ्तार करने की कोशिश हो रही है. वह अभी पुलिस की गिरफ्त में नहीं आया है. लेकिन ऐसी जानकारी है कि उसके संबंध आईएसआई से हो सकते हैं. पुलिस सभी एंगल पर जांच कर रही है.

क्या है राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA)

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून या नेशनल सिक्यूरिटी एक्ट वह कानून है, जो राज्य और केंद्र सरकार को विशेष शक्ति प्रदान करती है, जिसके तहत वह किसी संदिग्ध नागरिक या विशेष परिस्थितियों में विदेशी नागरिक को भी गिरफ्तार कर सकती है. इस एक्ट के तहत अगर सरकार को यह लगे कि कोई व्यक्ति देश में कानून का राज्य चलाने में बाधा बन रहा है तो उसकी गिरफ्तारी का आदेश सरकार दे सकती है. यह एक्ट 1980 में इंदिरा गाधी के शासनकाल में बना था. इस एक्ट के तहत गिरफ्तारी पहले तीन माह के लिए की जाती है और उसके बाद आवश्यकतानुसार उसे बढ़ाया जा सकता है.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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