अगर आपने वैक्सीन लिया है, तो कोरोना वायरस आपपर नहीं कर पायेगा प्राणघातक हमला, एम्स दिल्ली के अध्ययन का खुलासा
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 04 Jun 2021 4:32 PM
एम्स दिल्ली द्वारा किये गये एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि अप्रैल-मई 2021 के दौरान जिस भी व्यक्ति ने कोरोना का वैक्सीन लिया और उसके बाद उन्हें संक्रमण हुआ तो ऐसे किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. यह अध्ययन इंडिया टुडे में प्रकाशित है.
एम्स दिल्ली द्वारा किये गये एक अध्ययन में यह बात सामने आयी है कि अप्रैल-मई 2021 के दौरान जिस भी व्यक्ति ने कोरोना का वैक्सीन लिया और उसके बाद उन्हें संक्रमण हुआ तो ऐसे किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. यह अध्ययन इंडिया टुडे में प्रकाशित है.
इस बात की जानकारी कोरोना वायरस की दूसरी लहर के दौरान किये गये पहले जीनोमिक सिक्वेंस स्टडी से मिली है. सरल शब्दों में कहें तो अगर कोई व्यक्ति दोनों वैक्सीन लेने के बाद भी कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाता है तो उसे ब्रेक थ्रू कहा जायेगा. अमेरिका के हेल्थ एजेंसी, सेंटर्स फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन ने कहा है कि ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम है जो दोनों वैक्सीन लेने के बाद भी संक्रमित होते हैं या फिर उन्हें अस्पताल में भरती करने की जरूरत होती है या फिर उनकी मौत हो जाती है.
एम्स दिल्ली ने वैसे लोगों का अध्ययन पहले किया जो वैक्सीन ले चुके थे और उसके बावजूद कोरोना वायरस से संक्रमित हुए. अप्रैल मई महीने में यह देखा गया कि ऐसे लोगों में वायरस लोड बहुत होने के बावजूद किसी भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई. वैक्सीन लेने वाले जिन 63 मरीजों पर अध्ययन किया गया उनमें से 36 मरीजों ने वैक्सीन का दोनों डोज लिया था, जबकि 27 लोगों ने एक डोज वैक्सीन लिया था. इन 63 मरीजों में से 53 ने कोवैक्सीन लिया था जबकि 10 ने कोविशील्ड लगवाया था.
B.1.617 वैरिएंट जिसे पहली बार भारत में खोजा गया था को तीन कैटेगरी – B.1.617.1, B.1.617.2 और B.1.617.3 में विभाजित किया गया है. B.1.617.2 प्रकार का वैरिएंड 23 लोगों यानी (63.9 प्रतिशत) में देखा गया, उनमें से 12 लोगों ने टीके का दोनों डोज लिया था जबकि 11 लोगों ने एक डोज लिया था. जबकि B.1.617.1 प्रकार का वैरिएंट चार और B.1.1.7 एक व्यक्ति में पाया गया था.
Also Read: Bihar News: सीएम नीतीश के खिलाफ बयान देना पड़ा भारी, बीजेपी ने MLC टुन्ना पांडेय को किया सस्पेंड
ध्यान देने वाली बात यह है कि कुछ मरीजों में एंडीबॉडीज मौजूद था बावजूद इसके वे संक्रमित हो गये. यह रिपोर्ट कई मायनों में यूनिक है. हालांकि कोई भी संक्रमण घातक नहीं था लेकिन सभी मरीजों को पांच से सात दिनों तक तेज बुखार रहा. रोगियों की औसत आयु 37 (21-92) थी, जिनमें से 41 पुरुष और 22 महिलाएं थीं. किसी भी मरीज में ऐसी कोई अन्य बीमारी नहीं थी जिसे संक्रमण के लिए जिम्मेदार बताया जाता.
Posted By : Rajneesh Anand
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










