नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की नहीं, व्यवस्था की आत्मा मर गई

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नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की नहीं, व्यवस्था की आत्मा मर गई

Noida Techie Death Case: 16-17 जनवरी की वो रात… अंधेरी, ठंड और चारों तरफ छाया घना कोहरा. रात करीब 12:20 का वक्त. सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से ऑफिस से घर लौट रहे थे. जैसे ही कार नोएडा सेक्टर-150 के ‘डेथ प्वाइंट’ के पास पहुंची, 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ पर संतुलन बिगड़ा और पलभर में वह टूटी हुई दीवार को पार करते हुए करीब 70 फुट नीचे गहरे नाले में जा गिरी. करीब डेढ़ घंटे तक युवराज मदद की गुहार लगाते रहे, नीचे मौत थी, ऊपर उम्मीद. लेकिन वहां मौजूद लोग तमाशा देखते रहे और धीरे-धीरे युवराज गाड़ी के साथ पानी में समा गए. इस दुखद घटना के बाद सिस्टम पर सवाल उठाया जा रहा है.

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Noida Techie Death Case: 27 साल के युवराज मेहता की मौत ने झकझोर कर रख दिया है. उनकी मौत के बाद जांच की जा रही है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी है. लेकिन सवाल है, युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? जब युवराज मर रहा था, उस समय घटनास्थल पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF की टीमें भी मौजूद थीं. लेकिन कोई कुछ न कर सका. सभी बचाव के साधन मौजूद रहने के बाद भी युवराज को पानी में समा जाने दिया गया.

युवराज को बचाने के लिए लगा दी जान की बाजी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में चश्मदीद ने जो बताया उससे सिस्टम की पूरी पोल खुल गई. एक ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी में डिलीवरी बॉय मोनिंदर ने युवराज को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी. उसने बताया, रात करीब 12 बजे गाड़ी गड्ढे में गिरी. गाड़ी गिरने के बाद पानी में लड़के ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक खुद को बचाने की गुहार लगाई. मौके पर पुलिस, SDRF, फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद थीं. किसी ने उसकी मदद नहीं की. बोल रहे थे, ठंडा पानी है…पानी में सरिया है…हम नहीं जाएंगे. इस मौत के लिए जिम्मेदार सरकारी महकमा है. मैं वहां रात करीब 1:45 बजे पहुंचा. मैंने देखा सभी किनारे पर खड़े थे, लेकिन कोई पानी में जाने के लिए तैयार नहीं था. मेरे वहां पहुंचने से 10 मिनट पहले ही लड़का डूबा था. मैंने बचाव दल से कहा, तुम बाहर आओ, मैं पानी में जाऊंगा. मैंने कमर में रस्सी बांधी और पानी में करीब 50 मीटर तक अंदर गया. 30 मिनट तक उस लड़के को मैंने पानी के अंदर ढूंढा, लेकिन न तो लड़का मिला और न उसकी गाड़ी मिली.

युवराज की मौत ने खोल दी सिस्टम की पोल

चश्मदीद ने जो बताया, उससे साफ जाहिर होता है कि अगर रेस्क्यू टीम चाहती तो युवराज आज जिंदा होता. बचाव दल आपदा या हादसे के समय कई तरह के आधुनिक और विशेष उपकरणों से लैस होती हैं. जिससे हर परिस्थिति में जान बचाई जा सके.

पानी में डूबने की स्थिति में बचाव के लिए टीम के पास क्या-क्या उपकरण होते हैं

रेस्क्यू बोट
लाइफ जैकेट और लाइफ रिंग
रोप रेस्क्यू किट (मजबूत रस्सियां, हार्नेस, करैबिनर)
अंडरवॉटर सर्च कैमरा
स्कूबा डाइविंग किट (ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क, फिन्स)
फायर टेंडर और वाटर कैनन
फायर एक्सटिंग्विशर (CO₂, फोम, ड्राई केमिकल)
थर्मल सूट और फायर प्रूफ गियर
स्मोक एक्सट्रैक्टर और वेंटिलेशन फैन
हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स
बुलेटप्रूफ / कट-रेसिस्टेंट जैकेट
गैस मास्क और रेस्पिरेटर

पिता की आंखों के सामने पानी में समा गया युवराज

जब युवराज मेहता पानी में डूब रहे थे, तब बाहर उनके पिता राजकुमार मेहता उन्हें बचाने की गुहार लगाते रहे. पुलिस और फायर की टीम मौके पर थी, लेकिन कोई बचाव के लिए आगे नहीं आया. बेटा पानी में डूब रहा था और बाहर पिता सिस्टम को कोसते रहे. राजकुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया- उनका बेटा कह रहा था पापा बचाओ, पापा बचाओ…वहां मौजूद भीड़ तमाशबीन थी. कुछ लोग वीडियो बना रहे थे.

पहले जान गई, फिर सिस्टम जागा

जिस डेथ प्वाइंट पर युवराज की गाड़ी अनियंत्रित हुई और जिस निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में उसकी मौत हुई. वहां 15 दिन पहले भी एक ट्रक गिर गया था. उस समय भी मोनिंदर ने ही ट्रक ड्राइवर की जान बचाई थी. स्थानीय लोगों ने उस खतरनाक जगह को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की. लेकिन नोएडा अथॉरिटी ने आंखें मूंदे रखीं. हालांकि युवराज की मौत के बाद ही वहां मलबा डालकर रास्ता बंद किया गया. यानी – पहले जान गई, फिर सिस्टम जागा.

सीएम योगी से मिलना चाहते हैं युवराज के पिता

मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने कहा, “सरकार द्वारा की गई तेजी से कार्रवाई और SIT टीम के गठन से मुझे राहत मिली है. मुझे विश्वास है कि मेरे बेटे की आत्मा को न्याय मिलेगा. ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए घटना वाली जगह पर उचित सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं. सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं. हम एक बार CM योगी से मिलना चाहेंगे. इससे हमें मन की शांति मिलेगी. सरकार की तरफ से हमें आश्वासन दिया गया है कि हमें सही दिशा में सही सहयोग मिलेगा.

राहुल गांधी ने भी सिस्टम पर उठाया सवाल

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने युवराज की मौत के बाद सिस्टम पर सवाल उठाया. उन्होंने युवराज के पिता और चश्मदीद का वीडियो एक्स पर शेयर किया और लिखा- सड़कें जान ले रही हैं, पुल जान ले रहे हैं, आग जान ले रही है, प्रदूषण जान ले रहा है, भ्रष्टाचार मार रहा है, उदासीनता मार रही है. भारत का शहरी स्तर पर पतन का कारण धन, प्रौद्योगिकी या समाधान की कमी नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही के अभाव के कारण है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, टीना : देयर इस नो अकाउंटेबिलिटी (कोई जवाबदेही नहीं है).

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अरबिंद कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अरबिंद कुमार मिश्रा

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.

करियर का सफरनामा

अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग

खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.

अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.

पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.

पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.

शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)

UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.

बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.

एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.

लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.

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