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नोएडा में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की नहीं, व्यवस्था की आत्मा मर गई

Updated at : 21 Jan 2026 6:30 AM (IST)
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National Disaster Response Force

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज को ढूंढती एनडीआरएफ की टीम, इनसाइट में युवराज का फाइल फोटो, PHOTO पीटीआई

Noida Techie Death Case: 16-17 जनवरी की वो रात… अंधेरी, ठंड और चारों तरफ छाया घना कोहरा. रात करीब 12:20 का वक्त. सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता अपनी ग्रैंड विटारा कार से ऑफिस से घर लौट रहे थे. जैसे ही कार नोएडा सेक्टर-150 के ‘डेथ प्वाइंट’ के पास पहुंची, 90 डिग्री के खतरनाक मोड़ पर संतुलन बिगड़ा और पलभर में वह टूटी हुई दीवार को पार करते हुए करीब 70 फुट नीचे गहरे नाले में जा गिरी. करीब डेढ़ घंटे तक युवराज मदद की गुहार लगाते रहे, नीचे मौत थी, ऊपर उम्मीद. लेकिन वहां मौजूद लोग तमाशा देखते रहे और धीरे-धीरे युवराज गाड़ी के साथ पानी में समा गए. इस दुखद घटना के बाद सिस्टम पर सवाल उठाया जा रहा है.

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Noida Techie Death Case: 27 साल के युवराज मेहता की मौत ने झकझोर कर रख दिया है. उनकी मौत के बाद जांच की जा रही है. दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांच दिनों के अंदर जांच रिपोर्ट मांगी है. लेकिन सवाल है, युवराज की मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? जब युवराज मर रहा था, उस समय घटनास्थल पर पुलिस, फायर ब्रिगेड, SDRF और NDRF की टीमें भी मौजूद थीं. लेकिन कोई कुछ न कर सका. सभी बचाव के साधन मौजूद रहने के बाद भी युवराज को पानी में समा जाने दिया गया.

युवराज को बचाने के लिए लगा दी जान की बाजी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत मामले में चश्मदीद ने जो बताया उससे सिस्टम की पूरी पोल खुल गई. एक ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी में डिलीवरी बॉय मोनिंदर ने युवराज को बचाने के लिए अपनी जान की बाजी लगा दी. उसने बताया, रात करीब 12 बजे गाड़ी गड्ढे में गिरी. गाड़ी गिरने के बाद पानी में लड़के ने करीब डेढ़ से दो घंटे तक खुद को बचाने की गुहार लगाई. मौके पर पुलिस, SDRF, फायर ब्रिगेड की टीमें मौजूद थीं. किसी ने उसकी मदद नहीं की. बोल रहे थे, ठंडा पानी है…पानी में सरिया है…हम नहीं जाएंगे. इस मौत के लिए जिम्मेदार सरकारी महकमा है. मैं वहां रात करीब 1:45 बजे पहुंचा. मैंने देखा सभी किनारे पर खड़े थे, लेकिन कोई पानी में जाने के लिए तैयार नहीं था. मेरे वहां पहुंचने से 10 मिनट पहले ही लड़का डूबा था. मैंने बचाव दल से कहा, तुम बाहर आओ, मैं पानी में जाऊंगा. मैंने कमर में रस्सी बांधी और पानी में करीब 50 मीटर तक अंदर गया. 30 मिनट तक उस लड़के को मैंने पानी के अंदर ढूंढा, लेकिन न तो लड़का मिला और न उसकी गाड़ी मिली.

युवराज की मौत ने खोल दी सिस्टम की पोल

चश्मदीद ने जो बताया, उससे साफ जाहिर होता है कि अगर रेस्क्यू टीम चाहती तो युवराज आज जिंदा होता. बचाव दल आपदा या हादसे के समय कई तरह के आधुनिक और विशेष उपकरणों से लैस होती हैं. जिससे हर परिस्थिति में जान बचाई जा सके.

पानी में डूबने की स्थिति में बचाव के लिए टीम के पास क्या-क्या उपकरण होते हैं

रेस्क्यू बोट
लाइफ जैकेट और लाइफ रिंग
रोप रेस्क्यू किट (मजबूत रस्सियां, हार्नेस, करैबिनर)
अंडरवॉटर सर्च कैमरा
स्कूबा डाइविंग किट (ऑक्सीजन सिलेंडर, मास्क, फिन्स)
फायर टेंडर और वाटर कैनन
फायर एक्सटिंग्विशर (CO₂, फोम, ड्राई केमिकल)
थर्मल सूट और फायर प्रूफ गियर
स्मोक एक्सट्रैक्टर और वेंटिलेशन फैन
हेलमेट, सेफ्टी ग्लव्स
बुलेटप्रूफ / कट-रेसिस्टेंट जैकेट
गैस मास्क और रेस्पिरेटर

पिता की आंखों के सामने पानी में समा गया युवराज

जब युवराज मेहता पानी में डूब रहे थे, तब बाहर उनके पिता राजकुमार मेहता उन्हें बचाने की गुहार लगाते रहे. पुलिस और फायर की टीम मौके पर थी, लेकिन कोई बचाव के लिए आगे नहीं आया. बेटा पानी में डूब रहा था और बाहर पिता सिस्टम को कोसते रहे. राजकुमार ने मीडिया से बातचीत में बताया- उनका बेटा कह रहा था पापा बचाओ, पापा बचाओ…वहां मौजूद भीड़ तमाशबीन थी. कुछ लोग वीडियो बना रहे थे.

पहले जान गई, फिर सिस्टम जागा

जिस डेथ प्वाइंट पर युवराज की गाड़ी अनियंत्रित हुई और जिस निर्माणाधीन इमारत के बेसमेंट के लिए खोदे गए पानी से भरे गड्ढे में उसकी मौत हुई. वहां 15 दिन पहले भी एक ट्रक गिर गया था. उस समय भी मोनिंदर ने ही ट्रक ड्राइवर की जान बचाई थी. स्थानीय लोगों ने उस खतरनाक जगह को लेकर पहले भी कई बार शिकायत की. लेकिन नोएडा अथॉरिटी ने आंखें मूंदे रखीं. हालांकि युवराज की मौत के बाद ही वहां मलबा डालकर रास्ता बंद किया गया. यानी – पहले जान गई, फिर सिस्टम जागा.

सीएम योगी से मिलना चाहते हैं युवराज के पिता

मृतक के पिता राजकुमार मेहता ने कहा, “सरकार द्वारा की गई तेजी से कार्रवाई और SIT टीम के गठन से मुझे राहत मिली है. मुझे विश्वास है कि मेरे बेटे की आत्मा को न्याय मिलेगा. ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए घटना वाली जगह पर उचित सुरक्षा उपाय भी किए गए हैं. सभी संभव उपाय किए जा रहे हैं. हम एक बार CM योगी से मिलना चाहेंगे. इससे हमें मन की शांति मिलेगी. सरकार की तरफ से हमें आश्वासन दिया गया है कि हमें सही दिशा में सही सहयोग मिलेगा.

राहुल गांधी ने भी सिस्टम पर उठाया सवाल

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने युवराज की मौत के बाद सिस्टम पर सवाल उठाया. उन्होंने युवराज के पिता और चश्मदीद का वीडियो एक्स पर शेयर किया और लिखा- सड़कें जान ले रही हैं, पुल जान ले रहे हैं, आग जान ले रही है, प्रदूषण जान ले रहा है, भ्रष्टाचार मार रहा है, उदासीनता मार रही है. भारत का शहरी स्तर पर पतन का कारण धन, प्रौद्योगिकी या समाधान की कमी नहीं है, बल्कि यह जवाबदेही के अभाव के कारण है. उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा, टीना : देयर इस नो अकाउंटेबिलिटी (कोई जवाबदेही नहीं है).

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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