निर्भया के दोषियों को तो हुई फांसी, लेकिन देश में वर्ष 2014-18 के बीच बलात्कार के 1.75 लाख से अधिक मामले

Updated:
विज्ञापन

Nirbhaya convicts were hanged but देशभर में वर्ष 2014-18 के बीच बलात्कार के 1.75 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और इस दौरान मध्य प्रदेश में सबसे अधिक मामले सामने आए. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों में यह सामने आया है.

विज्ञापन

नयी दिल्ली : देशभर में वर्ष 2014-18 के बीच बलात्कार के 1.75 लाख से अधिक मामले दर्ज किए गए और इस दौरान मध्य प्रदेश में सबसे अधिक मामले सामने आए. राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के ताजा आंकड़ों में यह सामने आया है.

गृह मंत्रालय के अधीन आने वाली केंद्रीय एजेंसी के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2016 में बलात्कार के सबसे अधिक 38,947 मामले दर्ज किए गए. देशभर में वर्ष 2014 में 36,739 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए थे. जबकि 2015 में 34,094 मामले, 2017 में 32,559 मामले जबकि 2018 में 33,356 मामले दर्ज किए गए. एनसीआरबी के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, इन पांच वर्षों के दौरान देशभर में कुल 1,75,695 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए.

पांच वर्षों के दौरान 25,259 मामलों के साथ इस सूची में मध्य प्रदेश अव्वल रहा और इसके बाद उत्तर प्रदेश में 19,406 मामले जबकि राजस्थान में 18,542 मामले और महाराष्ट्र में 15,613 बलात्कार के केस दर्ज किए गए. इस दौरान असम में 8,889 बलात्कार के मामले दर्ज किए गए जबकि दिल्ली में 8,693 और छत्तीसगढ़ में 8,592 ऐसे मामले दर्ज किए गए.

प्रतिशत के तहत देखें तो वर्ष 2018 में महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों का यह 8.8 प्रतिशत रहा जबकि वर्ष 2017 में 9.04 प्रतिशत, 2016 में 11.49 प्रतिशत, 2015 में 10.35 प्रतिशत और 2014 में 10.82 प्रतिशत रहा. एनसीआरबी देशभर में होने वाले अपराधों का डेटा इकट्ठा करने का काम करता है.

विज्ञापन
Rajneesh Anand

लेखक के बारे में

By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola