निर्भया को इंसाफ: फांसी रुकवाने के लिए रातभर चला ड्रामा, लेकिन मां ने नहीं मानी हार

Author : Amitabh Kumar Published by : Prabhat Khabar Updated At : 20 Mar 2020 10:25 AM

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nirbhaya convicts hanging : फांसी के पहले रातभर कोर्ट में ड्रामा चला. निर्भया केस के दोषियों की फांसी की सजा रुकवाने का जो आखिरी प्रयास प्रयास गुरुवार दोपहर को शुरू हुआ, वह रात करीब सवा तीन बजे तक चला.

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nirbhaya convicts hanging : दिल्ली में 16 दिसंबर 2012 को एक महिला के साथ हुए गैंग रेप और मर्डर के मामले के चारों दोषियों को शुक्रवार की सुबह साढ़े पांच बजे फांसी दे दी गयी. फांसी के पहले रातभर कोर्ट में ड्रामा चला. निर्भया केस के दोषियों की फांसी की सजा रुकवाने का जो आखिरी प्रयास प्रयास गुरुवार दोपहर को शुरू हुआ, वह रात करीब सवा तीन बजे तक चला. घड़ी की छोटी सुई 3 और चार के बीच थी जबकि बड़ी सुई 3 पर थी, जब सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता की तरफ से दोनों याचिका खारिज कर दी. आइए आपको बताते हैं रातभर का ड्रामा…

-घड़ी में करीब 9:45 बजे निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचे. निर्भया की मां भी इसी वक्त हाई कोर्ट की ओर बढ़ी. थोड़ी देर बाद ही एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दायर कर राष्ट्रपति द्वारा दया याचिका खारिज किये जाने के फैसले को चुनौती देने का काम किया. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट, दोनों जगह आवेदन दिया गया है. थोड़ी देर में हाई कोर्ट में सुनवाई होगी.

-करीब 10:15 बजे दिल्ली हाई कोर्ट में जस्टिस मनमोहन और जस्टिस संजय नरुला की डिविजन बेंच में एपी सिंह की याचिका पर सुनवाई शुरू की. कोर्ट ने निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह सिंह से पूछा कि कोई ऐफिडेविट नहीं है…कोई एनेक्सर भी आपके पास नहीं है…कोई मेमो नहीं है…इस मामले में कुछ नहीं है…क्या आपके पास याचिका दाखिल करने की अनुमति है ? जिसपर एपी सिंह ने जवाब दिया कि कोरोना वायरस का असर है. कोई फोटोकॉपी मशीन काम नहीं कर रही हैं. बेंच ने कहा कि आपको रोक के लिए वाजिब दलीलें देनी होंगी. अगर आप वाजिब दलीलें नहीं देंगे तो हम रोक नहीं लगा सकते हैं. आपका ढीला-ढाला रवैया है. उन्होंने कहा कि रात को हम आपसे कह रहे हैं कि कृपया पॉइंट पर आइए. आप पॉइंट पर नहीं आ रहे हैं. याचिका में कोई आधार नहीं है और वकील से मजबूत कानूनी बिंदु रखने को कहा. दोषियों के वकील ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सामने भी एक याचिका लंबित है. इतनी सारी याचिकाएं लंबित होने पर भी फांसी कैसे दी जा सकती है.

– करीब 10:47 बजे का वक्त था, दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्भया के दोषियों के वकील एपी सिंह से कहा कि समय गुजरता जा रहा है, ज्यादा वक्त नहीं. आपके क्लायंट का भगवान से मुलाकात करने का वक्त करीब आता जा रहा है. यदि आप आखिरी समय में महत्वपूर्ण बातें नहीं कहेंगे तो हम आपकी मदद नहीं कर पाएंगे. आपके पास केवल चंद घंटे शेष हैं. इसके थोड़ी देर बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि सिस्टम के साथ खेल खेला जा रहा है.

-करीब 11:30 बजे निर्भया के दोषियों के एक अन्य वकील शम्स ख्वाजा ने दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी दलीलें दी. इसके करीब आधे घंटे के बाद दिल्ली हाई कोर्ट ने दोषियों की याचिका खारीज कर दी.

-करीब 12:20 बजे वकील एपी सिंह कोर्ट से बाहर निकले और पत्रकारों से बात की. उन्होंने कहा कि निर्भया केस में फैसले तो हो रहे हैं, लेकिन न्याय के लिए हम दौड़ रहे हैं. कोर्ट के आदेश की कॉपी मिलते ही वह सुप्रीम कोर्ट का रुख करेंगे. इसके करीब सवा घंटे के बाद दोषियों के वकील एपी सिंह किदवई नगर स्थित सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार के घर पहुंचे.

-सुप्रीम कोर्ट की ओर से सुनवाई के लिए रात 2.30 बजे का वक्त तय किया गया. इस बीच निर्भया की मां भी सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं. करीब आधे घंटे के बाद सुनवाई शुरू हुई और दोषी पवन गुप्ता की तरफ से सुप्रीम कोर्ट मे पेश हुए वकील एपी सिंह ने दावा किया कि घटना के वक्त पवन नाबालिग था. उन्होंने स्कूल का सर्टिफिकेट, स्कूल रजिस्टर और अटेंडेंस रजिस्टर कोर्ट के समक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस भूषण ने कहा कि उन्होंने ने पहले भी ये दस्तावेज कोर्ट में पेश किये थे. जस्टिस भूषण ने यह भी पूछा कि वकील एपी सिंह किस आधार पर मर्सी पिटिशन खारिज होने को चुनौती देने का काम कर रहे हैं? एपी सिंह ने कोर्ट से कहा कि मुझे पता है कि इन्हें फांसी की सजा दे दी जाएगी, लेकिन क्या दो-तीन दिन के लिए फांसी टाली जा सकती है ताकि पवन गुप्ता का बयान दर्ज किया जा सके.

करीब 3:10 बजे सुप्रीम कोर्ट ने दोषी पवन गुप्ता के घटना के वक्त नाबालिग होने के दावे वाली याचिका खारिज करने का काम किया. अगले पांच मिनट के अंदर यानी करीब 3:15 बजे ही राष्ट्रपति की ओर से पवन की दया याचिका खारिज किये जाने को चुनौती देने वाली याचिकी भी खारिज कर दी गयी और दोषियों के बचने के सारे दरवाजे बंद हो गये.

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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