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National Youth Day: भारत का दुश्मन नंबर 1 बन रहा चीन भारतीय युवाओं के आगे है फिसड्डी, एक नजर आंकड़ों पर

यूएनडीपी के आंकड़ों की मानें तो पूरी दुनिया में 121 करोड़ युवा हैं, जिनमें 21 फीसदी भारतीय हैं. स्वामी विवेकानंद की जयंती यानी नेशनल यूथ डे (National Youth Day) के मौके पर हम युवा भारत की ताकत से आपको अवगत करा रहे हैं.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
National Youth Day 2022
National Youth Day 2022
Unsplash

National Youth Day 2022: किसी देश का सुंदर भविष्य और काम करने की क्षमता उस देश के युवाओं की संख्या पर निर्भर करता है. भारत इस मामले में दुनिया में अव्वल है. यहां तक की दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश चीन भी भारत से इस मामले में कई कदम पीछे है. यूएनडीपी के आंकड़ों की मानें तो पूरी दुनिया में 121 करोड़ युवा हैं, जिनमें 21 फीसदी भारतीय हैं. स्वामी विवेकानंद की जयंती (swami vivekananda jayanti 2022) यानी नेशनल यूथ डे (National Youth Day) के मौके पर हम युवा भारत की ताकत से आपको अवगत करा रहे हैं.

भारत में सबसे ज्यादा युवा वर्ग के लोग हैं. यह युवाओं का देश हैं. वर्ल्डोमीटर्स के मुताबिक, इस समय दुनिया की कुल जनसंख्या सात अरब 87 करोड़ से ज्यादा है. इस आबादी में युवाओं की जनसंख्या 16 फीसदी है. सबसे खास बात कि दुनिया के 57 फीसदी युवा सिर्फ 10 देशों में रहते हैं. और इन देशों में भारत अव्वल है. यानी भारत युवा शक्ति के मामले में दुनिया का सबसे अग्रणी देश है. जिसकी कुल आबादी का 18 फीसदी युवा हैं. युवाओं के मामले में चीन भारत से फिसड्डी साबित होता जा रहा है.

युवाओं के मामले में पिछड़ चुका है चीन: चीन भले ही दुनिया का सबसे ज्यादा जनसंख्या वाला देश हो, लेकिन युवाओं की संख्या के मामले में वो भारत से काफी पीछे है. इसके पीछे का कारण है चीन की कठोर जनसंख्या नीति. 1979 के जिस दौर में चीन की जनसंख्या तेजी से बढ़ रही थी. उस समय चीनी सरकार ने पूरे देश में वन ताइल्ड पॉलिसी (One Child Policy) लागू कर दी थी. यानी एक कपल सिर्फ एक बच्चे को ही जन्म दे सकते थे. इसका नतीजा निकला की चीन में बूढ़ों की संख्या बढ़ती गई. युवा जनसंख्या में कमी आती गई.करीब 144 करोड़ की आबादी वाले देश चीन में 17 करोड़ युवा हैं. यानी चीन की आबादी में युवाओं की हिस्सेदारी 12 फीसदी ही है.

युवा शक्ति संपन्न देश है भारत: संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2019 में भारत की जनसंख्या करीब 1.37 अरब जबकि चीन की आबादी 1.47 अरब थी. यूएन की एक और रिपोर्ट के मुताबिक साल 2019 में भारत की जनसंख्या में 2019 से लेकर 2050 तक में करीब 27 करोड़ 30 लाख लोगों की बढ़ोत्तरी की संभावना है. यूएन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत 2027 तक चीन को आबादी के मामले में पीछे छोड़ देगा. हालांकि, चीन 2016 के बाद टू चाइल्ड पॉलिसी लागू कर दिया है, इसके बाद चाइना का पॉपुलेशन भी बढ़ है, लेकिन इसकी गति काफी धीमी रही. इसमें 0.53 फीसदी की ही बढ़ोत्तरी हुई.

यूएन के एक अनुमान के मुताबित आने वालों कुछ सालों में चीन की आबादी में गिरावट आएगी. जबकि भारत की जनसंख्या चीन को पछाड़ कर उससे आगे निकल जाएगी. चीन में जनसंख्या गिरने से श्रमिकों की कमी हो सकती है और उपभोग स्तर में भी गिरावट आ सकती है. ऐसे में आने वाले समय में जनसंख्या में कमी का असर चीन की आर्थिक उन्नति पर भी देखने को मिल सकता है.

आबादी के आंकड़ो पर गौर करें तो दुनिया की कुल आबादी सात अरब 87 करोड़ से ज्यादा है. जिसमें युवाओं की संख्या करीब 121 करोड है. यानी दुनिया का कुल आबादी का 16 फीसदी युवा है. भारत की कुल आबादी में 25 करोड़ से ज्यादा युवाओं की जनसंख्या हैं. यानी भारत की आबादी का 18 फीसदी हिस्सा युवा है. इसमें 15 साल से लेकर 25 साल के युवा शामिल हैं. जबकि चीन में सिर्फ 12 फीसदी ही आबादी का हिस्सा युवा है. इस हिसाब से देखें तो युवा शक्ति के रूप में भारत चीन को पछाड़ रहा है. गौरतलब है कि भारत में 15 से 30 साल के बीच की उम्र वाले लोगों को युवा माना जाता है, ऐसे में देश की 27 फीसदी आबादी युवा है.

Posted by: Pritish Sahay

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