पत्नी की याद में शख्स ने कर दिया कुछ ऐसा, जानकर रह जाएंगे दंग

मंदिर 29 मई को समाज को समर्पित होगा. साथ ही मैं युवाओं को यह संदेश भी देना चाहता हूं कि शादी के बाद प्यार ही सब कुछ है. इसलिए छोटी-छोटी बातों पर प्रेम या पत्नी का परित्याग नहीं करना चाहिए.
मध्य प्रदेश से एक अनोखी खबर सामने आ रही है. बुंदेलखंड के एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने अनूठी मिसाल कायम करते हुए अपनी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी को मंदिर निर्माण के लिए दान कर दिया. बताया जा रहा है कि शख्स ने पत्नी की याद में राधा-कृष्ण बनवाया है.
पत्नी की याद में मंदिर बनवाने का लिया संकल्प
मध्य प्रदेश के बीपी चनसोरिया ने अपनी पत्नी की मृत्यु के दिन ही अपनी जीवन भर की कमाई को दान करने और छतरपुर में मंदिर बनाने का संकल्प लिया था.
मंदिर के निर्माण में खर्च हुए 1.5 करोड़ रुपये
चांसोरिया ने एएनआई से बातचीत में बताया कि उन्होंने इसे बनवाया क्योंकि उनकी पत्नी हमेशा चित्रकूट में ‘राधा कृष्ण’ मंदिर चाहती थीं. नवंबर 2016 में मेरी पत्नी की मृत्यु के बाद. मैंने संकल्प लिया कि मैं मंदिर बनवाऊंगा. 1.50 करोड़ रुपये की लागत से मंदिर बनने में छह साल और सात दिन लगे. राधा कृष्ण के प्रतीक हैं. प्यार जिसे लोगों को सदियों तक याद रखना चाहिए. साथ ही राधा कृष्ण के साथ राधा जी की सखी ललिता और विशाखा भी यहां विराजमान होंगी. उन्होंने कहा, यह मंदिर 29 मई को समाज को समर्पित होगा. साथ ही मैं युवाओं को यह संदेश भी देना चाहता हूं कि शादी के बाद प्यार ही सब कुछ है. इसलिए छोटी-छोटी बातों पर प्रेम या पत्नी का परित्याग नहीं करना चाहिए.
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मुस्लिम कलाकारों ने मंदिर की नक्काशी की
मंदिर निर्माण के लिए संगमरमर के पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. जिसमें विशेष नक्काशी की गयी है, जो उसकी सुंदरता को बढ़ाती है. मंदिर में नक्काशी का काम राजस्थान के कई मुस्लिम कलाकारों द्वारा किया गया है. जिन्होंने तीन साल का समय लगा. चांसोरिया ने बताया छह साल तक लगातार काम चला, 2010 में कुछ समय के लिए रुका, लेकिन फिर से शुरू हो गया. आखिरकार सात साल बाद काम पूरा हुआ. एक कलाकार मोहम्मद आसिफ ने एएनआई को बताया कि यह आज की पीढ़ी में ‘ताजमहल’ जैसा उदाहरण है. एक समय शाहजहां ने अपनी दिवंगत पत्नी मुमताज के लिए ताजमहल बनवाया था, और आज उसने (बीपी चांसोरिया) अपनी दिवंगत पत्नी के लिए एक मंदिर बनवाया है.
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By अरबिंद कुमार मिश्रा
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झारखंड की समृद्ध संस्कृति और लोक परंपराओं में उनकी गहरी रुचि है. अपनी उत्कृष्ट और सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग के लिए उन्हें संस्थान स्तर पर कई बार सम्मानित और पुरस्कृत भी किया जा चुका है.
करियर का सफरनामा
अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
प्रमुख उपलब्धियां और ग्राउंड रिपोर्टिंग
खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:
34वें राष्ट्रीय खेल: झारखंड में आयोजित ऐतिहासिक 34वें नेशनल गेम्स की बेहतरीन और व्यापक ग्राउंड रिपोर्टिंग.
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट: रांची के जेएससीए (JSCA) स्टेडियम में आयोजित कई इंटरनेशनल क्रिकेट मैचों को करीब से कवर किया.
पुरुष हॉकी वर्ल्ड कप (2018): भुवनेश्वर में आयोजित वर्ल्ड कप के फाइनल मुकाबले की शानदार स्पोर्ट्स रिपोर्टिंग.
पंचायतनामा: प्रभात खबर के इस खास विंग के लिए ग्रामीण इलाकों का दौरा कर कई प्रेरक 'सक्सेस स्टोरीज' लिखीं.
शैक्षणिक योग्यता (Education & Credentials)
UGC NET: साल 2019 में यूजीसी नेट (UGC NET) की परीक्षा उत्तीर्ण की.
बैचलर ऑफ जर्नलिज्म (BJMC): रांची विश्वविद्यालय से साल 2011 में पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की.
एम.ए. (नागपुरी भाषा): रांची विश्वविद्यालय के 'जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग' से साल 2009 में नागपुरी भाषा में स्नातकोत्तर (MA) की डिग्री हासिल की.
लेखन शैली और विशेषज्ञता: एक्सप्लेनर, रिसर्च बेस्ड स्टोरीज, स्पोर्ट्स जर्नलिज्म, इंटरनेशनल अफेयर्स और झारखंड की लोक-संस्कृति.
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