Middle-East crisis: उवर्रक, बीज और कीटनाशकों की खरीद-ब्रिकी पर निगरानी के गठित होगा विशेष सेल
Published by : Vinay Tiwari Updated At : 25 Mar 2026 7:50 PM
केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई. बैठक में मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा करने और आगामी खरीफ सीजन के लिए रणनीतिक तैयारी सुनिश्चित करने पर विचार किया गया. केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे समय सभी को सक्रियता के साथ काम करना होगा. उर्वरकों की न्यायसंगत और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया.
Middle-East crisis: मध्य पूर्व में जारी युद्ध के कारण ऊर्जा का संकट पैदा हो गया है. यह संकट सिर्फ भारत ही नहीं अन्य देशों को भी प्रभावित कर रहा है. युद्ध के कारण पेट्रोल-डीजल, गैस के साथ उवर्रक संकट भी पैदा हो सकता है. ऊर्जा संकट को दूर करने के लिए भारत सरकार लगातार उच्च-स्तरीय बैठक कर रही है. इस कड़ी में बुधवार को केंद्रीय कृषि कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय बैठक हुई. बैठक में
मौजूदा वैश्विक अस्थिरता के बीच भारतीय कृषि क्षेत्र और किसानों के हितों की रक्षा करने और आगामी खरीफ सीजन के लिए रणनीतिक तैयारी सुनिश्चित करने पर विचार किया गया. केंद्रीय कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे समय सभी को सक्रियता के साथ काम करना होगा. उर्वरकों की न्यायसंगत और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दिया. इसके लिए अधिकारियों को ‘फार्मर आईडी’ के काम में तेजी लाने के निर्देश दिए ताकि वितरण व्यवस्था पारदर्शी हो सके. इस बाबत जल्द ही राज्य के कृषि मंत्रियों के साथ बैठक होगी.
जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ होगी सख्त कार्रवाई
वैश्विक संकट का फायदा उठाकर कुछ लोग उवर्रक और बीजों की कालाबाजारी करने में जुट जाते हैं. ऐसे लोगों के खिलाफ कृषि मंत्री ने कार्रवाई करने को कहा. राज्य सरकारों को भी इस दिशा में कड़े कदम उठाने के लिए कहा जाएगा. बैठक में सीड्स (बीज) सुखाने के लिए आवश्यक गैस और एग्रो-केमिकल्स की उपलब्धता की समीक्षा की गयी और पैकेजिंग सामग्री (खासकर दूध और अन्य कृषि उत्पादों के लिए) की कमी नहीं हो इसके लिए पेट्रोलियम मंत्रालय और संबंधित विभागों के मिलकर काम करने का निर्देश दिया. कृषि क्षेत्र की पल-पल की निगरानी के लिए एक ‘विशेष सेल’ का गठन होगा. यह सेल खाद, बीज और कीटनाशकों की उपलब्धता की साप्ताहिक रिपोर्ट केंद्रीय कृषि मंत्री को सौपेंगा.
उवर्रक के उत्पादन पर हो सकता है असर
मध्य-पूर्व में युद्ध के कारण उवर्रक के उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है. अगर युद्ध लंबा चला तो यूरिया और डीएपी की कमी हो सकती है. क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चा माल जैसे अमोनिया, सल्फर और पोटाश का आयात काफी कम हो गया है. इसका उपयोग उवर्रक बनाने में होता है. युद्ध के कारण देश के कई यूरिया प्लांट क्षमता से कम कम पर चल रहे हैं. क्योंकि उत्पादन के लिए कच्चा माल और गैस की कमी है. प्राकृतिक गैस से अमोनिया बनता है, जिसका उपयोग यूरिया के उत्पादन में किया जाता है. इसके अलावा सल्फर भी रिफाईनरी से आता है और इसका उपयोग उवर्रक, फार्मा, केमिकल इंडस्ट्री और इलेक्ट्रोनिक्स में होता है. मध्य-पूर्व के देशों से भारत गैस, पेट्रोल, डीजल के अलावा उवर्रक भी खरीदता है. हालांकि सरकार का कहना है कि देश में पर्याप्त मात्रा में उवर्रक उपलब्ध है और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दूसरे देशों से खरीद की प्रक्रिया चल रही है.
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