Menstruation Leave : पीरियड्स के दौरान महिला कर्मचारियों को 6 दिन पेड लीव देने की तैयारी

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 22 Sep 2024 9:05 AM

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Menstruation Leave

Menstruation Leave : मासिक धर्म यानी माहवारी के दिनों में छुट्टी का प्रावधान सरकार ला सकती है. इसपर अभी विचार किया जा रहा है. जानें किन राज्यों में अभी मिल रही है छुट्टी

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Menstruation Leave : मासिक धर्म यानी माहवारी लड़कियों की जिंदगी में खास महत्व रखता है. माहवारी लड़कियों को हर महीने में एक बार जरूर आता है. जिसे बोल चाल की भाषा में मासिक धर्म चक्र कहा जाता है. कर्नाटक सरकार महिलाओं के इस चक्र को लेकर बड़ा फैसला लेने की तैयारी कर रही है जिसके तहत सरकारी और प्राइवेट दोनों सेक्टर्स में पेड पीरियड लीव का प्रस्ताव लाया जाएगा. इसमें महिलाओं के लिए साल में 6 दिन के पेड पीरियड लीव का प्रावधान रखा जा सकता है.

सरकार के इस फैसले से माहवारी के दौरान होने वाली शारीरिक और मानसिक चुनौतियों का सामना करने में महिलाओं को मदद मिलेगी. सरकार ने इसके लिए 18 सदस्यों की एक कमेटी गठित भी कर दी है. यह महिलाओं के काम और जीवन के बीच संतुलन बनाने का प्रयास है. मामले को लेकर कर्नाटक के श्रम मंत्री संतोष लाड ने कहा कि यह छुट्टियां फ्लेक्सिबल होंगी. यह महिलाएं अपने हिसाब से तय कर सकेंगी कि उन्हें कब छुट्टी लेनी है. हम प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं. समिति के सदस्यों के साथ बैठक होगी और आगे चर्चा होगी. इस पहल का उद्देश्य महिला कर्मचारियों को सहूलियत देना है.

संतोष लाड समिति के सदस्यों से मिलकर सिफारिशों पर चर्चा करेंगे. इसके बाद उन्हें जनता, कंपनियों और अन्य पक्षों के साथ परामर्श के लिए रखा जाएगा. सारी चीजें होने के बाद मामले पर सरकार फैसला लेगी. यदि यह पहल अमल में आती है तो कर्नाटक पीरियड लीव देने वाला चौथा प्रदेश बन जाएगा. इससे पहले बिहार, केरल और ओडिशा में महिला कर्मचारियों को पीरियड लीव पहले से ही दी जा रही है.

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Menstruation Leave : किस राज्य में क्या है प्रावधान

  1. बिहार में 1992 में यह पॉलिसी आई थी जिसमें महिलाओं को हर महीने दो दिन के मासिक धर्म अवकाश की अनुमति दी गई.
  2. 2023 में केरल ने सभी विश्वविद्यालयों और संस्थानों में महिला छात्रों के लिए मासिक धर्म अवकाश का प्रावधान लाया गया.
  3. ओडिशा सरकार ने अगस्त में सरकारी और प्राइवेट क्षेत्र दोनों में महिला श्रमिकों के लिए एक दिन की मासिक धर्म अवकाश नीति पेश की थी.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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