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मणिपुर हिंसा मामले में न्यायपालिका पर टिप्पणी करना चेन्नई के प्रकाशक को पड़ा भारी, गिरफ्तार

Updated at : 29 Jul 2023 1:13 PM (IST)
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मणिपुर हिंसा मामले में न्यायपालिका पर टिप्पणी करना चेन्नई के प्रकाशक को पड़ा भारी, गिरफ्तार

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के प्रमुख के अन्नामलाई ने शेषाद्री की गिरफ्तारी की निंदा की. उन्होंने सत्तारूढ़ Dravida Munnetra Kazhagam (द्रमुक) पर आम आदमी द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से निपट नहीं पाने पर गिरफ्तारी का हथकंडा अपनाने का आरोप लगाया.

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मणिपुर पिछले 90 दिनों से हिंसा की आग में जल रहा है. रोजाना वहां से रह-रहकर झड़प, गोलीबारी और आगजनी की खबरें आ रही हैं. इस मामले में चेन्नई के प्रकाशक एवं ब्लॉगर बद्री शेषाद्री को एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार के दौरान न्यापालिका के खिलाफ कथित टिप्पणी करना भारी पड़ गया है. उन्हें इस मामले में शनिवार को गिरफ्तार कर लिया गया है.

वकील कविअरासू की शिकायत पर की गयी कार्रवाई

अधिवक्ता कविअरासू की शिकायत के आधार पर पेरंबलूर जिले की पुलिस ने शनिवार सुबह प्रकाशक को गिरफ्तार किया. वह कुन्नम जिले का रहने वाला है. अधिवक्ता ने अपनी शिकायत में कहा है कि वह 22 जुलाई को एक यूट्यूब चैनल को दिए साक्षात्कार में न्यायपालिका के खिलाफ शेषाद्री की टिप्पणियों से क्षुब्ध है.

आईपीसी की इन धाराओं के तहत की गयी कार्रवाई

पुलिस ने शेषाद्री के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 (दंगे भड़काने के इरादे से उकसाना), 153 ए (1) (ए) (समूहों के बीच शब्दों के जरिये शत्रुता को बढ़ावा देना) और 505 (1) (बी) (जनता में भय पैदा करना) के तहत मामला दर्ज किया है.

बीजेपी ने गिरफ्तारी की निंदा की

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की प्रदेश इकाई के प्रमुख के अन्नामलाई ने शेषाद्री की गिरफ्तारी की निंदा की. उन्होंने सत्तारूढ़ Dravida Munnetra Kazhagam (द्रमुक) पर आम आदमी द्वारा व्यक्त किए गए विचारों से निपट नहीं पाने पर गिरफ्तारी का हथकंडा अपनाने का आरोप लगाया. अन्नामलाई ने ट्वीट किया, क्या सत्तारूढ़ द्रमुक का प्रतिशोधात्मक एजेंडा चलाना पुलिस की जिम्मेदारी है?

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सीबीआई ने जांच अपने हाथ में ली

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने मणिपुर में मई में भीड़ द्वारा दो महिलाओं का कथित यौन उत्पीड़न किए जाने संबंधी मामले की जांच अपने हाथ में ले ली है. अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी. राज्य में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने संबंधी इस घटना का चार मई का वीडियो इस महीने की शुरुआत में वायरल हो गया था. इस घटना की देशभर में कड़ी आलोचना हो रही है. अधिकारियों ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर यह मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दिया गया है. सीबीआई ने अज्ञात लोगों के खिलाफ मणिपुर पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी के संबंध में अपनी प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई शुरू कर दी है.

क्या है मामला

3 मई को मणिपुर में शुरू हुई हिंसा ने उस समय सारी हदें पार कर दी थी, जब अगले दिन करीब एक हजार से अधिक लोगों की भीड़ ने दो आदिवासी महिलाओं को अपना शिकार बनाया. भीड़ ने पहले गांव पर हमला किया, फिर अपनी जान बचाकर भाग रही दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर सड़क पर परेड कराया. यही नहीं दरिंदों ने दोनों महिलाओं के साथ गैंगरेप भी किया. दोनों महिलाओं का आरोप है कि उन्हें मुक्त करने से पहले भीड़ ने उनका यौन उत्पीड़न भी किया था. इस घटना के संबंध में 26 सेकंड का एक वीडियो 19 जुलाई को सामने आया था. वीडियो में दिखाई दे रही एक महिला पूर्व सैनिक की पत्नी है. उसके पति असम रेजिमेंट में सूबेदार के रूप में कार्यरत थे और करगिल युद्ध में भी हिस्सा लिया था. वीडियो करीब 75 दिनों के बाद दुनिया के सामने आया. हालांकि इस घटना के संबंध में शिकायत करीब एक महीने पहले 21 जून को कांगपोकपी जिले के सैकुल पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी. लेकिन पुलिस ने मामले पर कुछ नहीं किया.

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मणिपुर मामले को लेकर सड़क से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन

मणिपुर में महिलाओं के साथ बर्बरता को लेकर सड़क से लेकर संसद तक विरोध प्रदर्शन जारी है. विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों ने मानसून सत्र के दौरान भारी हंगामा जारी रखा है. उनकी मांग है कि मणिपुर के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद के दोनों सदनों में बयान दें. इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने लोकसभा में सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाई है. जिसपर चर्चा के लिए तिथि का ऐलान किया जाएगा.

विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के सांसद मणिपुर रवाना

विपक्षी गठबंधन ‘इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस’ (इंडिया) के घटक दलों का एक प्रतिनिधिमंडल मणिपुर में जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए हिंसा प्रभावित राज्य के दो दिवसीय दौरे पर शनिवार को रवाना हुआ. सांसद दिल्ली से एक वाणिज्यिक विमान के जरिये मणिपुर रवाना हुए. लोकसभा में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने रवाना होने से पहले संवाददाताओं से कहा कि वह मणिपुर में अधिक से अधिक राहत शिविरों का दौरा करना चाहते हैं और हिंसा से प्रभावित हुए लोगों से बात करना चाहते हैं. चौधरी ने कहा, हमारी कोशिश राज्य के मौजूदा हालात का आकलन करने की है. हमें उम्मीद है कि राज्य सरकार हमारे दौरे में कोई बाधा पैदा नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि सरकार को मणिपुर में सामान्य स्थिति बहाल करने, शांति लाने और राज्य के लोगों के दुख एवं पीड़ा को दूर करने के प्रयास करने चाहिए.

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मणिपुर हिंसा में अबतक 160 लोगों की हो चुकी है मौत

गौरतलब है कि मणिपुर में अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मेइती समुदाय की मांग के विरोध में पर्वतीय जिलों में तीन मई को आयोजित ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ के दौरान हिंसा भड़कने के बाद से राज्य में अब तक 160 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं तथा कई अन्य घायल हुए हैं. राज्य में मैतेई समुदाय की आबादी करीब 53 प्रतिशत है और वे मुख्य रूप से इंफाल घाटी में रहते हैं. वहीं, नगा और कुकी जैसे आदिवासी समुदायों की आबादी 40 प्रतिशत है और वे अधिकतर पर्वतीय जिलों में रहते हैं.

कुकी और मैतेई में विवाद का क्या है कारण

कुकी और नगा पारंपरिक रूप से एक-दूसरे का विरोध करते आये हैं. हालांकि जब मामला मैतेई के खिलाफ आती है, तो दोनों समुदाय के लोग एकजुट हो जाते हैं और यही कारण है कि मैतेई समुदाय को दोनों से भिड़ना होता है. शुरुआत दिनों की बात करें, तो कुकी को मणिपुर की पहाड़ियों में मैतेई राजाओं ने ही बसाया था. ताकि वे इंफाल घाटी में मैतेई और घाटी पर आक्रमण करने वाले नागाओं के बीच एक बफर के रूप में काम कर सकें. 1993 में, मणिपुर में भयंकर नागा-कुकी हिंसा देखी गई जिसमें सौ से अधिक कुकी नगाओं द्वारा मारे गए. वर्तमान में मैतेई और कुकी के बीच संघर्ष की वजह आरक्षण है. पहाड़ियों में रहने वाले कुकी समुदाय सरकार की अनुसूचित जनजातियों की सूची में शामिल हैं, लेकिन मैतेई नहीं हैं. इसलिए मैतेई समुदाय के लोग लंबे समय से अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं. दूसरी ओर कुकी और नगा का आरोप है कि विकास के रूप में अधिकांश मैतेई समुदाय को मिलता है. विवाद तब और बढ़ गयी, जब मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने के लिए केंद्र को एक प्रस्ताव भेजने को कहा था. कुकी और नगा मैतेई को एसटी का दर्जा देने के खिलाफ. उनका मानना है कि अगर मैतेई को एसटी का दर्जा मिल गया, तो जरूरत से ज्यादा नौकरियां और लाभ हासिल कर लेंगे.

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

मुख्यधारा की पत्रकारिता में 14 वर्षों से ज्यादा का अनुभव. खेल जगत में मेरी रुचि है. वैसे, मैं राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय खबरों पर काम करता हूं. झारखंड की संस्कृति में भी मेरी गहरी रुचि है. मैं पिछले 14 वर्षों से प्रभातखबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इस दौरान मुझे डिजिटल मीडिया में काम करने का काफी अनुभव प्राप्त हुआ है. फिलहाल मैं बतौर शिफ्ट इंचार्ज कार्यरत हूं.

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