मणिपुर वीडियो मामला: सुप्रीम कोर्ट ने DGP को किया तलब, पुलिस कार्रवाई पर भड़के CJI कहा- FIR में हुई देरी

Published by : ArbindKumar Mishra Updated At : 01 Aug 2023 4:06 PM

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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर पुलिस से नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना की जांच बहुत सुस्त है और राज्य में कानून एवं व्यवस्था और संवैधानिक तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है. पुलिस ने राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर से नियंत्रण खो दिया है और अगर लोगों की रक्षा नहीं कर सकता तो नागरिकों का क्या होगा.

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मणिपुर हिंसा मामले पर सुप्रीम कोर्ट में लगातार दूसरे दिन सुनवाई हुई. जिसमें सीजेआई ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया और कहा, घटना के संबंध में प्राथमिकी दर्ज करने में काफी देरी हुई. सुप्रीम कोर्ट ने दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने संबंधी वीडियो को बेहद परेशान करने वाला बताया. सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाली पीठ ने मौखिक टिप्पणी की, एक चीज बहुत स्पष्ट है कि वीडियो मामले में प्राथमिकी दर्ज करने में काफी देरी हुई. अब इस मामले में अगली सुनवाई 7 अगस्त को होगी.

हिंसा भड़कने के बाद 6523 एफआईआर दर्ज की गयी

सुनवाई शुरू होने पर मणिपुर सरकार ने पीठ को बताया कि उसने मई में जातीय हिंसा भड़कने के बाद 6,523 प्राथमिकियां दर्ज कीं. केंद्र तथा मणिपुर सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ को बताया कि दो महिलाओं के यौन उत्पीड़न के मामले में राज्य पुलिस ने जीरो प्राथमिकी दर्ज की थी. मेहता ने कोर्ट को बताया कि मणिपुर पुलिस ने वीडियो मामले में एक नाबालिग समेत सात लोगों को गिरफ्तार किया है. उन्होंने पीठ को बताया कि ऐसा लगता है कि राज्य पुलिस ने घटना का वीडियो सामने आने के बाद महिलाओं के बयान दर्ज किए.

सुप्रीम कोर्ट ने पुलिस कार्रवाई को बेहद सुस्त बताया

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर पुलिस से नाराजगी जताते हुए कहा कि घटना की जांच बहुत सुस्त है और राज्य में कानून एवं व्यवस्था और संवैधानिक तंत्र पूरी तरह चरमरा गया है. इसने कहा कि यह साफ है कि पुलिस ने राज्य में कानून एवं व्यवस्था की स्थिति पर से नियंत्रण खो दिया है और अगर कानून एवं व्यवस्था तंत्र लोगों की रक्षा नहीं कर सकता तो नागरिकों का क्या होगा. इसने कहा कि राज्य पुलिस जांच करने में अक्षम है, उसने स्थिति से नियंत्रण खो दिया है. कोर्ट ने पूछा कि क्या महिलाओं को भीड़ को सौंपने वाले पुलिसकर्मियों से पूछताछ की गयी.

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सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के डीजीपी को किया तलब

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि मणिपुर के डीजीपी शुक्रवार को दोपहर 2 बजे कोर्ट के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहेंगे और अदालत को जवाब देने की स्थिति में होंगे. कोर्ट ने बार-बार नाराजगी जताते हुए पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाया.

मणिपुर हिंसा में आधिकारिक रूप से अबतक 150 लोगों की हुई मौत

सुप्रीम कोर्ट ने उस रिपोर्ट को रिकॉर्ड किया है जो मणिपुर की ओर से दायर की गई है, जिसमें कहा गया है कि 25 जुलाई, 2023 तक 6496 एफआईआर दर्ज की गई हैं. स्थिति रिपोर्ट में कहा गया है कि आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार 150 मौतें हुईं, 502 घायल हुए, 5,101 मामले आगजनी की और 6,523 एफआईआर दर्ज की गईं. 252 लोगों को गिरफ्तार किया गया. स्टेटस रिपोर्ट में कहा गया है कि 11 एफआईआर के सिलसिले में 7 गिरफ्तारियां की गई हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, सीबीआई पर अधिक बोझ नहीं डाला जा सकता

सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि इन 6500 एफआईआर को विभाजित करने के लिए एक तंत्र की आवश्यकता है क्योंकि सीबीआई पर सभी 6500 का बोझ नहीं डाला जा सकता है अन्यथा इसके परिणामस्वरूप सीबीआई तंत्र भी टूट जाएगा.

क्या है मामला

दरअसल 3 मई को मणिपुर में मैतेई समुदाय के एसटी दर्जे के खिलाफ कुकी समुदाय द्वारा विरोध मार्च का आयोजन किया गया था. जिसमें हिंसा भड़क उठी थी. उसके ठीक दूसरे दिन 1000 से अधिक लोगों की भीड़ एक गांव पर हमला कर दिया और दो महिलाओं को निर्वस्त्र का सड़क पर घुमाया कराया था. उस घटना के करीब 75 दिनों के बाद 19 जुलाई को उसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. जिसके बाद पूरे देशभर में आक्रोश भड़क उठा. सड़क से संसद तक इस घटना की निंदा की गयी. वीडियो सामने आने के बाद खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी निंदा की और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का निर्देश दिया.

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लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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