लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को चाहिए हिंदुओं का साथ, मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं को दी अयोध्या जाने की अनुमति

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लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को चाहिए हिंदुओं का साथ, मल्लिकार्जुन खरगे ने नेताओं को दी अयोध्या जाने की अनुमति

कांग्रेस की छवि हिंदू विरोधी पार्टी की बन गई है और इस इमेज को तोड़ने के लिए पार्टी 2014 से संघर्ष कर रही है. पार्टी जितना ही इस इमेज को तोड़ने की कोशिश करती है, उसकी स्थिति और भी बुरी हुई है. 2014 के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 44 सीट मिली थी जबकि 2019 में 52 सीट मिली थी.

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अंतत: कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस नेताओं को अयोध्या जाने के लिए हरी झंडी दिखा दी है. सूत्रों के हवाले से जो खबरें सामने आ रही हैं उनके अनुसार मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि मंदिर दर्शन करने के लिए कोई कभी भी जा सकता है. खरगे से हरी झंडी मिलने के बाद अब कांग्रेस नेता 22 जनवरी से पहले ही अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जा सकते हैं.

अयोध्या नहीं जाने वाला हिंदू विरोध नहीं

गौरतलब है कि इससे पहले कांग्रेस नेता शशि थरूर ने कहा था कि अयोध्या के मसले का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. धर्म लोगों का निजी विषय है, इसलिए अगर कोई अयोध्या नहीं जाता है तो उसे हिंदू विरोध नहीं कहना चाहिए और ना ही जाने वाले को बीजेपी के साथ खड़ा मानना चाहिए. थरूर ने यह भी कहा था कि अयोध्या जाने या ना जाने से लोकसभा चुनाव पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, बेवजह इस मुद्दे को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है.

शशि थरूर ने कहा-राजनीतिकरण ना हो मुद्दे का

शशि थरूर चाहे जो भी कहें, लेकिन सच्चाई क्या है इससे पार्टी वाकिफ है और उसी के आधार पर मल्लिकार्जुन खरगे ने कांग्रेस नेताओं को अयोध्या जाने की अनुमति दे दी है. ज्ञात हो कि कांग्रेस की छवि हिंदू विरोधी पार्टी की बन गई है और इस इमेज को तोड़ने के लिए पार्टी 2014 से संघर्ष कर रही है. पार्टी जितना ही इस इमेज को तोड़ने की कोशिश करती है, उसकी स्थिति और भी बुरी हुई है. 2014 के चुनाव में कांग्रेस को सिर्फ 44 सीट मिली थी जबकि 2019 में 52 सीट मिली थी.

एके एंटनी ने बताया था- हिंदू विरोधी बन गई है कांग्रेस की

2014 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली हार के बाद मंथन चला. कांग्रेस की सरकार में रक्षा मंत्री रहे एके एंटनी ने उस वक्त यह कहा था कि पार्टी की छवि हिंदू विरोधी की बन गई है, इसलिए पार्टी की लोकसभा चुनाव में यह दुर्गति हुई. अगर कांग्रेस को सत्ता में आना है तो उसे अपनी छवि बदलनी होगी और अल्पसंख्यकों के साथ ही उसे बहुसंख्यकों की पसंद भी बनना पड़ेगा. एके एंटनी ने कहा था कि पार्टी को मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति छोड़नी होगी और हिंदुओं के साथ खड़े होना होगा.

सोनिया गांधी को भी मिला है निमंत्रण पत्र

लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारी शुरू हो गई है और निश्चित तौर पर कांग्रेस इस बार कुछ बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद में है, इसलिए वह हिंदुओं को नाराज करने की गलती नहीं करना चाहेगी और इसी लिहाज से कांग्रेस ने अयोध्या मामले में अपना स्टैंड क्लियर करते हुए पार्टी के नेताओं को वहां जाने की अनुमति दे दी है. मंदिर ट्रस्ट की ओर से कांग्रेस के बड़े नेताओं को निमंत्रण पत्र भी भेजा गया है, जिसमें सोनिया गांधी भी शामिल हैं. 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर का प्राण-प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित है, जिसकी तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और निमंत्रण पत्र बांटा जा रहा है. पीएम मोदी इस कार्यक्रम में शामिल होंगे.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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