Lok Sabha: संसदीय कूटनीति में भारत की बड़ी छलांग, 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन

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Glimpses of the new Parliament Building, in New Delhi

लगभग  60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों (पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप) का गठन किया है. इस पहल के जाहिर होता है कि भारत की संसद अब वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों की संसद के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद को एक नयी दिशा देना चाहती है. खासबात है कि इस समूह में सभी दलों के नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है.

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Lok Sabha: दुनिया के देशों के साथ भारत के संसदीय संबंधों को और अधिक सशक्त बनाने के लिए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है. इस कड़ी में लगभग  60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों (पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप) का गठन किया है. इस पहल के जाहिर होता है कि भारत की संसद अब वैश्विक स्तर पर विभिन्न देशों की संसद के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद को एक नयी दिशा देना चाहती है. खासबात है कि इस समूह में सभी दलों के नेताओं की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है. दलीय राजनीति को दरकिनार करते हुए विभिन्न दलों के वरिष्ठ नेताओं को इन मैत्री समूहों की कमान सौंपी गयी है. इसमें सत्ता पक्ष और विपक्ष के प्रमुख नेताओं को शामिल किया गया है, जो विश्व पटल पर भारत के जीवंत और विविध लोकतंत्र की तस्वीर पेश करेंगे. यह मैत्री समूह सिर्फ  व्यापार और तकनीक पर ही चर्चा करेंगे, बल्कि देशों के बीच एक सेतु का काम करेंगे.

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देशों के साथ कूटनीतिक रिश्ता हाेगा मजबूत

पहले चरण में जिन देशों के साथ मैत्री समूह गठित किए गए हैं, उनकी सूची काफी विस्तृत है. इसमें  श्रीलंका, जर्मनी, न्यूजीलैंड, स्विट्जरलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इजराइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राजील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं. गौर करने वाली बात है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर भारत का पक्ष मजबूती से रखने के लिए बहुदलीय शिष्टमंडल भेजने की जो परंपरा शुरू की थी, लोक सभा अध्यक्ष ने उसे अब औपचारिक रूप देने का काम किया है. यह पहल यह संदेश देने का काम करेगी कि जब बात राष्ट्रहित और सुरक्षा की आती है, तो भारतीय संसद एक स्वर में बोलती है. पहले चरण में 60 देशों को कवर करने के बाद सचिवालय जल्द ही अन्य देशों के साथ भी ऐसे ही मैत्री समूहों के गठन की तैयारी कर रहा है.

इससे सांसदों को अपने विदेशी समकक्षों के साथ अनुभव साझा करने, व्यापार, सामाजिक नीतियों और वैश्विक चुनौतियों पर मिलकर काम करने का अवसर मिलेगा. मैत्री समूह में रवि शंकर प्रसाद, एम थंबीदुरई, पी चिदंबरम, राम गोपाल यादव,  टीआर बालू, काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि,  मनीष तिवारी,  डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असादुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, केसी वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, शशि थरूर, निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डी पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी जैसे दिग्गजाें को शामिल किया गया है. 

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