Ladli Behna Yojana : महिलाओं के लिए बुरी खबर, 1.63 लाख लाभार्थियों के खाते में नहीं आएंगे पैसे
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 10 Jan 2025 9:44 AM
मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना
Ladli Behna Yojana: मध्य प्रदेश की लाडली बहना योजना को लेकर एक खबर आ रही है जिसकी चर्चा प्रदेश की महिलाओं के बीच हो रही है. 1.63 लाख महिलाओं को योजना का लाभ अब नहीं दिया जाएगा. चलिए जानते हैं पूरी खबर.
Ladli Behna Yojana : मध्य प्रदेश सरकार ने साल 2023 में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए एक योजना की शुरूआत की. इसका नाम मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना है. इस योजना से जुड़ी एक बड़ी खबर आ रही है. दरअसल, राज्य में फिलहाल कुल 2 करोड़ 47 लाख महिलाओं को योजना का लाभ दिया जा रहा है. सरकार की ओर से ऐलान किया गया है कि योजना में लाभ ले रही 1.63 लाख महिलाओं के नाम काटे जाएंगे. बताया जा रहा है कि ये महिलाएं 60 साल से ज्यादा की उम्र की हो चुकी हैं. इसी वजह से इन महिलाओं के नाम योजना में लाभार्थी की लिस्ट से काट दिए जाएंगे.
लाड़ली बहना योजना की अगली किस्त का इंतजार खत्म
मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के तहत मध्य प्रदेश की लाखों महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है. योजना की शुरुआत करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रत्येक लाभार्थी महिला के खाते में 1,000 हर महीने भेजने की घोषणा की थी. इसके बाद मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बढ़ाकर इसे 1,250 कर दिया. योजना के अंतर्गत लाभान्वित महिलाएं अब अगली किस्त का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं, जो 10 जनवरी को जारी की जाएगी.
मुख्यमंत्री लाडली बहना योजना के आवेदन की शर्तें जानें
- किसी भी वर्ग की महिलाएं लाडली बहना योजना का लाभ लेने में सक्षम हैं.
- आवेदनकर्ता को मध्यप्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए.
- शादीशुदा, विधवा, परित्यक्ता व तलाकशुदा महिलाएं योजना के लिए पात्र हैं.
- 21 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी शादीशुदा महिलाएं आवेदन कर सकती हैं.
कांग्रेस नेता कमलनाथ ने साधा निशाना
मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस नेता कमलनाथ ने एक्स पर मामले पर रिएक्शन दिया है. उन्होंने लिखा कि राज्य में लाडली बहनों से डॉक्टर मोहन यादव सरकार की धोखाधड़ी जारी है. ऐसा लग रहा है जैसे बीजेपी लाडली बहना योजना समाप्त करना चाहती है. 1.63 लाख लाडली बहनें इस योजना से बाहर कर दी गई है. चुनाव से पहले जो बीजेपी लाडली बहनों को 3 हजार रुपया प्रतिमाह देने का वादा कर रही थी, वही बीजेपी अब सम्मान राशि बढ़ाने की जगह लगातार लाडली बहनों की संख्या घटाने में लग गई है.
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By Amitabh Kumar
अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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