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Kisan Andolan : 11 महीने बाद खुला टिकरी बॉर्डर, गाजीपुर से बैरिकेडिंग हटाने का काम शुरू

बीते 21 अक्टूबर को किसान आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली की तीनों सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन सड़कों को अनिश्चितकाल तक के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
गाजीपुर बॉर्डर से दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग हटाने का काम शुरू.
गाजीपुर बॉर्डर से दिल्ली पुलिस की ओर से बैरिकेडिंग हटाने का काम शुरू.
फोटो : ट्विटर.

नई दिल्ली : केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसान बीते 11 महीने से लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब दिल्ली टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर और गाजीपुर बॉर्डर पर साफ-सफाई का काम शुरू हो गया है. दिल्ली और हरियाणा की सीमा पर टिकरी बॉर्डर से पुलिस के बैरिकेड को हटा दिया गया है, जबकि गाजीपुर बॉर्डर पर बैरिकेड हटाने का काम शुरू कर दिया गया है.

मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस की ओर से गुरुवार की देर शाम से टिकरी बॉर्डर पर किसान आंदोलन वाले प्रदर्शन स्थल को खोलने का काम शुरू कर दिया गया है. पूरी रात बैरिकेडिंग हटाने के साथ ही सीमेंट की दीवारें, पत्थर और कीलों को हटाने का काम किया गया. दिल्ली पुलिस की ओर से जेसीबी और क्रेन की मदद से सीमेंट की दीवारों को गिरा दिया गया, जबकि पांच से सात लेयर के बैरिकेडिंग को पहले ही हटाया दिया गया था. संभावना यह जाहिर की जा रही है कि शुक्रवार की देर शाम तक टिकरी बॉर्डर पर दिल्ली-बहादुरगढ़ लेन को पूरी तरह खोल दिया जाएगा.

इसके साथ ही, खबर यह भी है कि टिकरी बॉर्डर के बाद अब गाजीपुर बॉर्डर से भी बेरिकेडिंग को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है. पुलिस की ओर से बैरिकेड हटाए जाने के बाद गाजियाबाद से दिल्ली आने वाला रास्ता पूरी तरह से खुल जाएगा. फिलहाल, इस लेन पर कृषि कानूनों के विरोध में आंदोलन कर रहे किसान प्रदर्शन कर रहे थे. मीडिया से मिल रही जानकारी के अनुसार, गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस ने सबसे पहले कंटीले तारों को हटाना शुरू कर दिया है.

बता दें कि बीते 21 अक्टूबर को आंदोलन के मद्देनजर दिल्ली की तीनों सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों को हटाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि किसानों को विरोध करने का अधिकार है लेकिन सड़कों को अनिश्चितकाल तक के लिए अवरुद्ध नहीं किया जा सकता. कोर्ट ने किसान यूनियनों को इस याचिका पर जवाब देने का निर्देश दिया है. इस मामले पर अगली सुनवाई 7 दिसंबर को होगी.

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