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किसान आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट ने लगायी सरकार को फटकार, कहा- कहीं तब्लीगी जमात वाला हाल न हो जाए

By Prabhat khabar Digital
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Kisan Andolan
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PTI

Kisan Andolan नयी दिल्ली : कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ पिछले 40 से ज्यादा दिनों से दिल्ली बॉर्डर पर प्रदर्शन कर रहे किसानों (Farmers Protest) की भीड़ को लेकर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने चिंता जाहिर की है. सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के प्रदर्शन को लेकर केंद्र सरकार को फटकार लगायी है. कोरोनावायरस संक्रमण (Coronavirus Protocol) को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने सरकार को प्रदर्शन के लिए गाइडलाइन बनाने का निर्देश दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि किसान आंदोलन 2020 में दिल्ली के निजामुद्दीन में तबलीगी जमात वाली स्थिति पैदा कर सकता है.

बता दें कि केंद्र सरकार के तीन नये कृषि कानूनों के खिलाफ हजारों की संख्या में किसान दिल्ली बॉर्डर पर जमा हैं. भीषण ठंड में किसानों ने वहां से हटना स्वीकार नहीं किया. वे बारिश को ठंड में भी बॉर्डर पर जमे हुए हैं. सुप्रीम कोर्ट ने किसानों के आंदोलन पर पहले भी चिंता जाहिर की है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या आंदोलन कर रहे किसान कोरोनावायरस संक्रमण के प्रसार के खिलाफ दिशा-निर्देशों का पालन कर रहे हैं.

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस ए बोबड़े की अध्यक्षता वाली पीठ ने किसानों के आंदोलन पर सुनवाई करते हुए कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों के कारण उन स्थानों पर कोरोनावायरस संक्रमण के मामले बढ़ सकते हैं. कोर्ट से सरकार को यह बताने के लिए बोला है कि प्रदर्शन स्थल पर सरकार की ओर से जारी कोविड-19 गाइडलाइंस का पालन हो रहा है या नहीं और सरकार से इसके लिए क्या कदम उठाए हैं.

इस पीठ में जस्टिस ए एस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम शामिल थे. जम्मू कश्मीर की वकील सुप्रिया पंडित की ओर दायर याचिका पर पीठ आज सुनवाई कर रही थी. याचिका में प्रदर्शन कर रहे किसानों के स्वास्थ्य को लेकर केंद्र सरकार, दिल्ली पुलिस और दिल्ली सरकार पर सवाल उठाये गये हैं. याचिका में कहा गया है कि इतनी ज्यादा संख्या में किसान प्रदर्शन स्थल पर जमा हैं और सरकार संक्रमण रोकने के लिए कोई उपाय नहीं कर रही है.

गौरतलब है कि किसानों और सरकार के बीच आंदोलन को लेकर सात दौर की वार्ता हो चुकी है. लेकिन बात नहीं बनी. किसान नये कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग पर अड़े हुए हैं. जबकि सरकार कानूनों में कुछ बदलाव के लिए तैयार हैं. किसानों का कहना है कि सरकार नये कानूनों के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य और कृषि मंडियों को समाप्त करना चाहती है. हालांकि सरकार ने कई मौकों पर कहा है कि एमएसपी समाप्त नहीं होगा.

Posted By: Amlesh Nandan.

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