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करतारपुर कोरिडोर की तर्ज पर शुरू की जाए PoK के शारदा मंदिर की यात्रा, कश्मीरी पंडितों ने सरकार की मांग

'सेव शारदा कमेटी इन कश्मीर' ने करतारपुर गलियारे की तर्ज पर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) स्थित शारदा मंदिर को कश्मीरी पंडितों और देश के अन्य हिन्दुओं की तीर्थयात्रा के लिए खोलने की मांग की है. समिति ने दुनिया भर में टकराव वाले धार्मिक स्थलों की तरह ही इस मंदिर में भी प्रार्थना शुरू करने की मांग की है.

By Prabhat khabar Digital
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1870 में कुछ इस तरह दिखता था मंदिर (बाएं), जो 2019 में केवल खंडहर बनकर रह गया.
1870 में कुछ इस तरह दिखता था मंदिर (बाएं), जो 2019 में केवल खंडहर बनकर रह गया.
फोटो : ट्विटर

बेंगलुरु : बॉलीवुड के डायरेक्टर की फिल्म 'द कश्मीर फाइल्स' ने बरसों से फाइलों की गर्त में दबी कश्मीरी पंडितों की समस्याओं को वास्तविक धरातल पर लाकर रख दिया है. उनकी फिल्म रिलीज होने के बाद से ही देश में कश्मीरी पंडितों की घर वापसी और उनके पुनर्वास से संबंधित मांग तेज हो गई है. कश्मीरी पंडितों की एक संस्था ने मांग की है कि केंद्र सरकार ने जिस तरह से पंजाब के लोगों के लिए पाकिस्तान स्थित करतारपुर गुरुद्वारा तक जाने के लिए विशेष गलियारे की व्यवस्था की है, उसी तर्ज पर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) स्थित शारदा मंदिर कश्मीरी पंडितों और देश के अन्य हिंदुओं की यात्रा के लिए खोला जाना चाहिए.

शारदा मंदिर में प्रार्थना शुरू करने की मांग

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, 'सेव शारदा कमेटी इन कश्मीर' ने करतारपुर गलियारे की तर्ज पर पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) स्थित शारदा मंदिर को कश्मीरी पंडितों और देश के अन्य हिन्दुओं की तीर्थयात्रा के लिए खोलने की मांग की है. समिति ने दुनिया भर में टकराव वाले धार्मिक स्थलों की तरह ही इस मंदिर में भी प्रार्थना शुरू करने की मांग की है.

करतारपुर दोबारा खोला गया तो शारदा पीठ क्यों नहीं

सेव शारदा कमेटी के संस्थापक रवींद्र पंडिता ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि करीब 72 साल बाद करतारपुर गुरुद्वारे को फिर से खोला गया था और इसके लिए भारत और पाकिस्तान की सरकारों ने एक साथ बैठकर एक मसौदा तैयार किया था और उस पर हस्ताक्षर किए थे. हमारा कहना है कि जब करतारपुर को फिर से खोला जाता है तो शारदा पीठ क्यों नहीं? मैंने खुद करतारपुर की यात्रा की है, तो मुझे शारदा पीठ जाने की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती?

एलओसी परमिट को दोबारा शुरू करे सरकार

उन्होंने कहा कि भारत और पाकिस्तान सरकारों के बीच पीओके जाने का एक सिस्टम है, जिसे नियंत्रण रेखा (एलओसी) परमिट कहा जाता है. रवींद्र पंडिता ने कहा कि एलओसी परमिट के तहत भारत सरकार और पाकिस्तान सरकार के बीच इस बात पर सहमति है कि यदि कोई व्यक्ति एलओसी के पार अपने रिश्तेदारों के यहां आना-जाना चाहता है, तो वे एलओसी परमिट के साथ आ-जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि यह वीजा नहीं है, बल्कि करतारपुर की तरह यात्रा परमिट है. सरकार इस एलओसी परमिट को दोबारा शुरू करके शारदा मंदिर की यात्रा शुरू करवा सकती है.

शंकराचार्यों से आवाज उठाने की मांग

रवींद्र पंडिता ने कहा कि उन्होंने विभिन्न मंत्रालयों में अधिकारियों से इस बाबत मुलाकात की है, लेकिन इस दिशा में प्रगति नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि गृह मंत्रालय ने सैद्धांतिक रूप से पंडितों को मंजूरी दे दी है और विदेश मंत्रालय इस मामले को देख रहा है, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ है. मां शारदा के अनुयायी और सभी शंकराचार्य जब तक आवाज नहीं उठाएंगे, तब तक कुछ नहीं होगा. कश्मीर में टीटवाल में आधार शिविर के समीप बनाए जाने जा रहे नए शारदा मंदिर के बारे में उन्होंने कहा कि यह मंदिर 4500 वर्ग फुट में बनाया जा रहा है और इस पर 1.2 करोड़ रुपये की लागत का अनुमान है.

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