ePaper

Karnataka Election 2023: कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र में भाजपा या कांग्रेस ? लिंगायत वोटरों पर खास नजर

Updated at : 07 Apr 2023 2:07 PM (IST)
विज्ञापन
Karnataka Election 2023: कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र में भाजपा या कांग्रेस ? लिंगायत वोटरों पर खास नजर

Karnataka Election 2023: पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की कुल 50 सीट में से 30 सीट भाजपा को मिली थी जबकि कांग्रेस को 17 और जद (एस) को दो सीट मिली थी. जानें क्या है कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र का समीकरण

विज्ञापन

Karnataka Election 2023: कर्नाटक में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं जिसको लेकर सभी पार्टियों ने कमर कस ली है. प्रदेश के हर राजनीतिक दल का अलग-अलग क्षेत्र में खासा प्रभाव है लेकिन हर हिस्से की “सूक्ष्म स्थिति” को समझना आपके लिए जरूरी है. ऐसे में, प्रदेश का कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र एक अहम क्षेत्र है जहां से 50 विधायक चुनकर विधानसभा पहुंचते हैं.

इस क्षेत्र की बात करें तो इसे पहले बंबई (मुंबई) कर्नाटक क्षेत्र कहा जाता था. इस क्षेत्र में सात जिले आते हैं जिनमें बेलगावी, धारवाड़, विजयपुरा, हावेरी, गडग, बागलकोट और उत्तर कन्नड़ शामिल हैं. इस क्षेत्र में, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और कांग्रेस के बीच जंग नजर आ रही है और माना जा रहा है कि इस क्षेत्र में जनता दल (सेक्युलर) कमजोर स्थिति में है.

राज्य सरकार ने 2021 में इस क्षेत्र का नाम बदल दिया

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के लिए 10 मई को वोटिंग होगी. राज्य सरकार ने 2021 में इस क्षेत्र का नाम बदल दिया था. आजादी से पहले यह क्षेत्र तत्कालीन बंबई ‘प्रेसीडेंसी’ के तहत था और सरकार ने इसका नाम मुंबई-कर्नाटक से बदलकर कित्तूर कर्नाटक कर दिया. कित्तूर नाम बेलगावी जिले के एक ऐतिहासिक तालुक के नाम पर रखा गया है जहां एक समय रानी चेन्नम्मा (1778-1829) का शासन था और उन्होंने झांसी की रानी लक्ष्मीबाई से पहले अंग्रेजों से मुकाबला किया था. यह क्षेत्र मुख्य रूप से एक लिंगायत बहुल क्षेत्र है और राज्य के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई सहित कई वरिष्ठ नेता इसी क्षेत्र से आते हैं.

पिछले विधानसभा चुनाव का हाल

पिछले विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र की कुल 50 सीट में से 30 सीट भाजपा को मिली थी जबकि कांग्रेस को 17 और जद (एस) को दो सीट मिली थी. इस क्षेत्र में एक समय कांग्रेस काफी मजबूत स्थिति में होती थी लेकिन बाद में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लिंगायत समुदाय के समर्थन से भाजपा इस क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति बन गयी. इस क्षेत्र में कांग्रेस के मुकाबले भाजपा के समर्थन में वृद्धि 1990 के दशक में हुई. तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राजीव गांधी ने तत्कालीन मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल को पद से हटा दिया था. लिंगायत पाटिल उस समय ‘स्ट्रोक’ बीमारी से उबर रहे थे. उसके बाद समुदाय कांग्रेस के खिलाफ हो गया.

बी एस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के प्रमुख नेता बन कर उभरे

बाद में भाजपा के बी एस येदियुरप्पा लिंगायत समुदाय के प्रमुख नेता बन कर उभरे और यह क्षेत्र कुछ समय तक भाजपा का गढ़ बना रहा. लेकिन येदियुरप्पा के भाजपा से अलग होने तथा तत्कालीन राज्य सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी रुझानों के बीच 2013 में कांग्रेस ने शानदार वापसी की और क्षेत्र की 50 में से 31 सीट पर कामयाबी हासिल की. वर्ष 2014 के आम चुनाव से पहले, येदियुरप्पा वापस भाजपा में आ गये जिससे पार्टी को पुन: अपनी स्थिति मजबूत करने का मौका मिल गया. हालांकि अब येदियुरप्पा के चुनावी राजनीति से अलग हो जाने के बाद कांग्रेस लिंगायत समुदाय का समर्थन पुन: पाने की कोशिश कर रही है.

Also Read: कर्नाटक चुनाव : 9 अप्रैल को उम्मीदवारों का नाम तय करेगी भाजपा, कांग्रेस की दूसरी सूची जारी

इस क्षेत्र के अलग-अलग हिस्सों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं की भी खासी संख्या है.

भाषा इनपुट के साथ

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola