Karnataka Election 2023: ‘लिंगायत मुख्यमंत्री’ पर फंस जाएगी भाजपा ? सीएम बसवराज बोम्मई ने कह दी ये बात

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 21 Apr 2023 3:07 PM

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karnataka election 2023 : दोनों भाजपा नेताओं के भाजपा छोड़ने के बाद कांग्रेस भाजपा पर लिंगायतों के साथ ‘अन्याय’ करने और उसके ‘लिंगायत विरोधी’ होने के आरोप लगा रही है. जानें मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने क्या कहा

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karnataka election 2023: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिंगायत नेताओं ने सत्तारूढ़ पार्टी को ‘लिंगायत विरोधी’ करार देने के कांग्रेस के दावे का जवाब देने के लिए चुनावी राज्य कर्नाटक में ‘लिंगायत मुख्यमंत्री’ अभियान शुरू करने की वकालत की है. इस बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई का बयान सामने आया है. उन्होंने कहा है कि लिंगायत मुख्यमंत्री पर भाजपा द्वारा कोई निर्णय फिलहाल नहीं लिया गया है. भाजपा के वरिष्ठ नेता बीएस येदियुरप्पा द्वारा बुलाई गयी बैठक राज्य में राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए थी.

‘लिंगायत’ मामले पर मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मीडिया से बात की और कहा कि कर्नाटक में मौजूदा राजनीतिक स्थिति का जायजा लेने के लिए पूर्व सीएम बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में आयोजित लिंगायत नेताओं की बैठक हुई. इस बैठक में लिंगायत मुख्यमंत्री के संबंध में कोई निर्णय नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं ने कांग्रेस नेताओं द्वारा किए जा रहे दुष्प्रचार का जवाब देने और लिंगायत मुख्यमंत्री मामले को लेकर भी सुझाव दिये हैं.

आबादी का लगभग 17 प्रतिशत है लिंगायत समुदाय

यहां चर्चा कर दें के कर्नाटक में राजनीतिक रूप से प्रभावशाली लिंगायत समुदाय राज्य की आबादी का लगभग 17 प्रतिशत है. इस समुदाय के ज्यादातर लोग राज्य के उत्तरी हिस्सों में हैं. भाजपा इन्हें अपने मजबूत समर्थक वर्ग के रूप में देखती है. वरिष्ठ लिंगायत नेता जगदीश शेट्टार और लक्ष्मण सावदी ने 10 मई को होने वाले विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने पर भाजपा छोड़ दी और कांग्रेस का दामन थाम लिया है.

भाजपा पर ‘लिंगायत विरोधी’ होने का आरोप

दोनों भाजपा नेताओं के भाजपा छोड़ने के बाद कांग्रेस भाजपा पर लिंगायतों के साथ ‘अन्याय’ करने और उसके ‘लिंगायत विरोधी’ होने के आरोप लगा रही है. इसके मद्देनजर, सत्तारूढ़ पार्टी नुकसान से भरपाई की कोशिशों में जुट गयी है. भाजपा के लिंगायत नेताओं ने बुधवार शाम कर्नाटक भाजपा के कद्दावर नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बी एस येदियुरप्पा के आवास पर एक बैठक की. इस बैठक में कांग्रेस के विमर्श का मुकाबला करने के लिए यह सुझाव सामने आया कि भाजपा को लिंगायत समुदाय के नेता को अगले मुख्यमंत्री के रूप में पेश करना चाहिए और मजबूती से यह अभियान चलाना चाहिए कि उसके सत्ता में आने की स्थिति में अगला मुख्यमंत्री लिंगायत समुदाय का ही होगा.

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कांग्रेस द्वारा फैलाई जा रही है ‘भ्रामक सूचना’

मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए पुष्टि की कि बैठक में ‘कुछ मुद्दों’ पर कांग्रेस द्वारा फैलाई जा रही ‘भ्रामक सूचनाओं’ का दृढ़ता से मुकाबला करने का निर्णय लिया गया. उन्होंने कहा कि कुछ सुझाव भी आए हैं (लिंगायत मुख्यमंत्री को लेकर)। धर्मेंद्र प्रधान (केंद्रीय मंत्री जो भाजपा के कर्नाटक चुनाव प्रभारी हैं) भी वहां थे. उन्होंने (प्रधान ने) कहा कि वह (लिंगायत-मुख्यमंत्री की जरूरत पर) हमारी भावनाओं से आलाकमान को अवगत कराएंगे. जब एक पत्रकार ने फिर से पूछा कि कांग्रेस भाजपा को ‘लिंगायत विरोधी’ बता रही है, तो मुख्यमंत्री ने उल्टा उसी से पूछ डाला कि ‘आप इस मुद्दे को जीवित रखना चाहते हैं?’’

भाषा इनपुट के साथ

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लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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